कम्युनिस्ट इंशा अल्लाह क्यों बोलता है, मुझे उम्मीद है ये पोस्ट पढ़कर अब तक आपको समझ में आ गया होगा!

और आप दोनों से नहीं कह पाएंगे की भाई थोड़ा विषय को ही पढ़ लो : मुस्लिम भाई मुस्लिम ब्रदरहूड में विश्वास करते हैं यानि दुनिया में सारे मुस्लिम आपस में भाई हैं। इसीलिए फिलिस्तीन में कुछ होता है , बर्मा में कुछ होता है तो भारत में प्रदर्शन होते हैं। आगजनी दंगा फसाद कुछ भी हो सकता है। आखिर दुनिया भर के मुस्लिम एक हो यही नारा है।

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इसी तरह कम्युनिस्ट कहते हैं की दुनिया के मजदूरो एक हो। कहीं किसी देश में किसान मजदूर को कुछ होता है , अमेरिका और पूंजीवादी देशो की साजिश के खिलाफ मार्क्सवादी, अखबारों और पत्रिकाओ में लेख लिखते हैं।

और यही एक होने वाली भावना राष्ट्र की भावना के खिलाफ जाती है। दोनों ही देश के बंधन को नहीं मानते। धर्म या साम्यवाद भारत से कहीं बड़ा है। नेशनलिज्म की भावना दोनों पक्ष ख़ारिज करते हैं।

ऐसे तो मुस्लिम और कम्युनिस्ट दोनों ही शांति और अहिंसा के पुजारी हैं। दोनों ही अपना फैलाव दुनिया भर में समानता लाने के लिए करते हैं। मुस्लिम गैर मुस्लिम को काफिर समझते हैं , उन्हें इस्लाम में लाना अपना फर्ज समझते हैं। इसी तरह कम्युनिस्ट गैर कम्युनिस्ट को बुर्जुवा समझते हैं , कैपिटलिस्ट समझते हैं। दुनिया भर में प्रोलेट्रिएट या सर्वहारा की तानाशाही लाना चाहते हैं। और जब तक ये नहीं हो जाता तब तक हमारे मुस्लिम और कम्युनिस्ट भाई अभिव्यक्ति की और अपने धर्म को मानने की स्वतंत्रता चाहते हैं।

वैसे अपने धर्म की या विचारधारा की सरकार बनने के बाद अपने विरोधियों को ये कितनी स्वतंत्रता देते हैं ये कोई अबूझ पहेली नहीं।

अभी देखिये ऐसे तो दोनों ही पक्ष हिंसा के खिलाफ हैं। लेकिन इस्लाम के फैलाव के लिए हिंसा ही एकमात्र सहारा है। काफिर को इस्लाम कबूल करवाना है या उसका सर कलम करना है। जिहाद आखिर शांतिपूर्ण आंदोलन धरना प्रदर्शन का तो नाम नहीं है।

इसी तरह कम्युनिस्ट भी क्रांति की तैयारी करता है। जब सर्वहारा यानी किसान मजदूर तैयार होगा , तब एक खूनी क्रांति होगी। बुर्जुआ और कैपिटलिस्ट वर्ग को मार काट कर ख़तम किया जायेगा।

वैसे तो दोनों ही पक्ष पूछते हैं की नोटबंदी के लिए सरकार ने क्या तैयारी की। लेकिन ये नहीं बताते की जब जिहाद होगा या क्रांति हो जाएगी तब बिना आम जनता को नुक्सान पहुंचाए कैसे उनका सर कलम किया जायेगा।

दोनों शांतिप्रिय पक्ष हैं। लेकिन उनका एक हिस्सा बगावत पर उतर आया है , उसे इंतजार नहीं है। इसलिए एक तरफ दुनिया ISIS से जूझ रही है , गजवाये हिन्द के लिए पाकिस्तान में तमाम आतंकवादी संगठन मौजूद हैं जिनके नाम इस्लामी हैं। बांग्लादेश में भी इंडियन मुजाहीदीन है। और अगर कल कश्मीर अलग होता है तो वो भी भारत के खिलाफ यही जंग छेड़ेगा। वो भी अपने यहाँ ऐसे आतंकवादियो को प्रशिक्षण देगा, हथियार देगा।

इसी तरह भारत अपने ह्रदय क्षेत्र में नक्सल समस्या से जूझ रहा है , नक्सल भी खूनी क्रांति हथियार आतंकवाद के जरिये भारत पर कब्ज़ा चाहते हैं। और नक्सल ही नहीं उत्तर पूर्व यानि नागालैंड , त्रिपुरा , असम , मणिपुर में भी जो आतंकवादी संगठन है वो इस्लाम से नहीं कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित हैं। चीन के सक्रिय सहयोग और प्रशिक्षण से भारत के खिलाफ लड़ रहे हैं।

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और हमारे कम्युनिस्ट भाई सिर्फ भारत में ही नहीं दक्षिण अमेरिका में भी लड़ रहे हैं। कोलंबिया , वेनेजुएला क्यूबा तमाम देशो में कम्युनिस्ट सोवियत संघ की मदद से लड़ते आ रहे हैं। नेपाल में इन्ही नक्सल समूहों ने अब सत्ता पर कब्ज़ा किया है। प्रचंड बाबा अब नेपाल में प्रधान मंत्री हैं।

हमारे मुस्लिम भाई खुद को सबसे श्रेष्ठ धर्म मानते हैं , कम्युनिस्ट भाई खुद को सबसे बेहतर विचारधारा मानते हैं।

जैसे हमारे मुस्लिम भाइयो को लगता है की इस्लाम खतरे में है। पूरी दुनिया मुस्लिम लोगों की दुश्मन है। वैसे ही हमारे कम्युनिस्ट भाई कल्पना किया करते हैं की देश में फासीवाद आ गया है। हिटलर आ गया है। अब वो लेखको को मार्क्सवादियों को जीने नहीं देगा। दंगे होंगे सब मारे जायेंगे। रोज रात को गैस चैंबर के सपने देखते हैं।

दोनों ही पक्ष कहते हैं की वो महिलाओं के लिए आदर्श हैं। बस एक अंतर है , एक नारी देह को पूरा उघाड़ कर नारी को स्वतंत्र करना चाहता है , दूसरा नारी देह को ढक कर। लेकिन दोनों सिर्फ नारी देह तक ही सीमित हैं।

हमारे मुस्लिम भाइयों के लिए अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी है जिसने अपनी स्थापना के बाद भारत विभाजन के बीज बोये। वहां से निकले स्कालरों ने पूरे भारत में घूमघूमकर पाकिस्तान का प्रचार किया। इसी तरह हमारे कम्युनिस्ट भाइयों के पास JNU है। जो आज नारे लगाता है भारत तेरे टुकड़े होंगे , इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह।

कम्युनिस्ट इंशा अल्लाह क्यों बोल रहा है , मुझे उम्मीद है ये पोस्ट पढ़कर अब तक आपको समझ में आ गया होगा।

अगर नहीं आया है तो भगवान् आपका भला करे।

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