जनता आखिर जनता ही होती है भारतीय हो या अमरिकी, वेलकम ट्रम्प और गो बॅक ट्रम्प

Siddharth Bharodiya (यूनाइटेड हिन्दी) – कल मेरा फेसबूक बिगड गया था । पूरा स्क्रीन ही काला हो जाता था । कितना भी नीचे जाओ दो तीन पोस्ट रिपीट होती रहती थी । फिर ऐसा हुआ कि १५-२० पोस्ट दिखाई देने लगी और लास्ट में मेसेज आने लगा कि अब आगे दिखाने के लिए कोइ पोस्ट नही है । कमाल ये था कि एक बार १९ पोस्ट में से ९ पोस्ट इस Tony McBride की थी और लगभग सभी पोस्ट ट्रम्प के विरोध में थी । सैधान्तिक तोर पर अमरिका में ट्रम्प हारे या जीते हम भारतियों को कोइ मतलब नही होना चाहिए लेकिन युएन के माफिया अमरिका द्वारा भारत को नियंत्रित कर रहे तो भारत की जनता के लिए ट्रम्प की हारजीत महत्व रखती है।

ट्रम्प के चुनावी भाषण राष्टवाद से भरे थे, तो अमरिकी राष्ट्रवादी जनता ने उसे वोट दिया । और सभी जानते हैं वोट से कोइ नही जीतता, लेकिन ट्रम्प जीता । चुनावी प्रक्रिया पर दखल देनेवालों ने उसे जीतने दिया और दुसरी तरफ ट्रम्प विरोधी जनता को रोड पर आने के लिए उकसाया । वेलकम ट्रम्प और गो बॅक ट्रम्प (Wellcome Trump and same time go back trunp !)।

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जनता आखिर जनता ही होती है, भारतिय हो या अमरिकी । चुनावी भाषणो पर विश्वास कर लेती है । अमरिका की लगभग सभी युनिवर्सिटी जे.एन.यु जेसी ही है । अमरिका की आम जनता के साथ उन युनिवर्सिटी के शिक्षक, विद्यार्थी, इतिहासकार भी रोड़ पर आ गये हैं ।

विरोधियों में महान मेसोनिक लेडी गागा का नाम देखकर विश्वास हो गया के विरोधियों के पिछे युएन के ग्लोबलिस्ट धन माफिया खडे है । हेतु ? अमरिका में अराजकता फैलाना, राष्ट्रवादी और ग्लोबलिस्ट सेक्युलर जनता का ध्रुविकरण करना और दुनिया की सब से मजबूत कही जानेवाली लोकशाही के खातमे की तैयारी करनी है । भारत में तो लोकशाही के नाम पर ही लोकशाही के हर सिध्धांतों की धज्जिया उडने लगी है ।

अमरिकी जे.एन.यु वाले इतिहासकारों ने तो ट्रम्प के विरोध में वेबसाईट

ही खोल दी है । उनका मुख्य दर्द है ट्रम्प के इस्लाम विरोधी भाषण।


शायद अमरिका में नेता अपने वादे और भाषण पर कायम रहते होंगे, भारतिय नेताओं की तरह गुलांट नही मारते होंगे तो उसके भाषणो को गंभीरता से ले लिया और दुखी मन से विरोध पर उतर गये हैं ।

अमरिका का अपने ही प्यादे बगदादी पर हमला, भारत की प्रथम सर्जीकल स्ट्राईक के बाद, बातावरण में जो बदलाव आ रहा था वो समज के बारह था । भारत की दुसरी सर्जिकल स्ट्राईक और अमरिका के घटनाक्रमने साफ समझा दिया कि अब दुनिया में लोकशाही की जरूरत नही रही, युएन की साम्यवादी विश्व-सरकार बनाने का समय हो गया है । दुनिया की व्यवस्थाओं को तोडने के लिए १४०० साल तक इस्लाम के कट्टरबाद का गैरुपयोग कर लिया, अब जब कि जगत की जनता उनके आर्थिक शिकंजे में फंस चुकी है, बिलकुल गुलाम हो चुकी है तो अब इस्लामी कट्टरवादियों की भी जरूरत नही रही । ट्रम्प जैसा भराडी मोनीटर हो तो युएन का माउस और कीबोर्ड बहुत तेजी से अपना काम निकाल सकते हैं ।

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