खिलेरी का ब्लॉग- आधुनिकता के कारण किसान के मित्र पक्षि मौत की भेंट चढ़ गए

महावीर प्रसाद खिलेरी (यूनाइटेड हिन्दी) – किसानों के मित्र समझे जाने वाले मित्र पक्षियों की कई प्रजातियां काफी समय से दिखाई नहीं दे रहीं हैं। किसान मित्र पक्षियों का धीरे-धीरे गायब होने के पीछे बहुत से कारणों में एक बड़ी वजह किसानों द्वारा कृषि में परंपरागत तकनीक छोड़ देने, मशीनीकरण व कीटनाशकों के व्यापक इस्तेमाल को माना जा रहा है। गाँव-गाँव में मोबाइल फोन के टावरों से निकलने वाली तरंगों से भी मित्र पक्षियों तथा कीटों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। gauriya


कौन से हैं किसानों के मित्र
किसान मित्र पक्षियों में मोर, तीतर, बटेर, कौआ, शिकरा, बाज, काली चिड़ी और गिद्ध आदि हैं, जो दिन-प्रतिदिन लुप्त होते जा रहे हैं। ये पक्षी खेतों में बड़ी संख्या में कीटों को मारकर खाते हैं। आज से एक दशक पहले तक ये पक्षी काफी अधिक संख्या में थे लेकिन अब इनमें कुछ पक्षियों के दर्शन ही दुर्लभ हो गए हैं। सबसे ज्यादा असर तो खेतऔर घरों में आमतौर पर दिखने वाली गौरया चिड़ी पर पड़ा है। खेतों में तीतर व बटेर जैसे पक्षी दीमक को खत्म करने में सहायक थे, क्योंकि उनका मनपंसद खाना दीमक ही है। इनके प्रजनन का माह अप्रैल, मई है और ये पक्षी आम तौर पर गेहूं के खेत में अंडे देते है। आज किसान गेहूँ कम्बाइन से काटते हैं और बचे हुए भाग को आग लगा देते हंै। इससे तीतर, बटेर के अंडे, बच्चें आग की भेंट चढ़ जाते है। इसी कारण इनकी संख्या में कमी आ रही है। नरमा, कपास के खेतों में दिन-प्रतिदिन कीटनाशकों का जरूरत से ज्यादा छिड़काव हो रहा है। जिससे बड़ी संख्या में तीतर-बटेरों की हर साल मौत हो जाती है। कमोबेस यही स्थिति मांसाहारी पक्षियों बाज, शिकरा, गिद्ध और कौवों की भी है।

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खूबसूरत मोर भी हुए लुप्तप्रायpeacock
गाँव का सबसे खूबसूरत पक्षी और वर्षा की पूर्व सूचना देने वाले मोर भी अब लुप्त होते जा रहे है। ये पक्षी किसानों को सांप जैसे खतरनाक जंतुओं से भयमुक्त रखता है और साथ ही पक्षी शिकार कर खेतों से चूहे मारकर खाने में मशहूर है। वर्तमान में जहरीली दवाओं की वजह से मोरों की संख्या बहुत कम हो गई है।

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