आपकी दीपावली रोशन करने के लिए बारुद के ढेर में बीतती है 24 घंटे 5 लाख लोगों की रोजी-रोटी

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यूनाइटेड हिन्दी स्पेशल रिपोर्ट – शिवकाशी: तमिलनाडु राज्य के शिवकाशी की कहानी आपको हैरान कर देगी। क्योंकि दिल्ली, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात्म, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब सहित भारत के कई राज्यों में दीपावली पर जो भी पटाखे जलते हैं उसका 75% हिस्सा तमिलनाडु के शहर शिवकाशी से आता है।

 

हर साल दीपावली से पहले शिवकाशी शहर हेडलाइन में आता है। शिवकाशी की पटाखा फैक्ट्री या दुकान में धमाके से इतने की मौत! हर साल एक जैसी कहानी। इतने जख्मी, कल भी यही हुआ। पटाखा गोदाम में आग लगने से 8 लोगों की मौत हो गई।

तमिलनाडु राज्य के शिवकाशी बारूदी ढेर पर बैठा देश का सबसे बड़ा शहर है, जो हर साल जलता है लेकिन भारत की कभी दीपावली काली नहीं होने देता है।

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लेकिन सवाल ये है कि शिवकाशी जलता क्यों है?

इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए यूनाइटेड हिन्दी के संवाददाता कैलाश चौटिया मद्रास से पाँच सौ पचास किलोमीटर दूर शिवकाशी में दाखिल हुये। कैलाश चौटिया की दीपावली वाली आँखों देखि एक्सक्लूसिव इन्वेस्टिगेशन पढ़ने से पहले जान लीजिए कि दीवाली औऱ शिवकाशी का रिश्ता क्या है?

शिवकाशी में देश की सबसे बड़ी दीपावली फैक्ट्री है। जहां हर साल 90 फीसदी पटाखे बनते है। सम्पूर्ण भारत के कई राज्यों में दीपावली पर बिकने वाले 75 फीसदी पटाखों पर शिवकाशी का लेबल लगा होता है।

दीपावली पर दो हजार करोड़ का पटाखा कारोबार इसी शहर में होता है। करीब पाँच लाख लोगों की रोजी-रोटी बारुद के ढेर में चौबीस घंटे बीतती है। सात सौ पैंसठ फैक्ट्रियों में दीपावली की रोशनी के लिए इतनी ही तेजी से काम होता रहता है। शिवकाशी में पटाखे की इंडस्ट्री चल रही है जिसकी बुनियाद लोगों की मजबूरी, पैसों के लालची फैक्ट्री मालिकों और पुलिस-प्रशासन की काहिलियत पर टिकी है।

अगले पेज पर पूरी रिपोर्ट जरूर पढ़े… 

 

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