वायरल हुई नरेंद्र मोदी और कांग्रेसी नेता शंकर सिंह वाघेला की ‘ट्रेन जर्नी’

कुमार प्रियांक (यूनाइटेड हिन्दी) – 1990 की गर्मियों की बात है। इंडियन रेलवे (ट्रैफिक) सर्विस की दो महिला प्रशिक्षु लखनऊ से ट्रेनिंग समाप्त कर के दिल्ली आ रही थीं। उनकी बोगी में यूपी के दो सांसद भी सवार थे, जो अपने 12 बेटिकट लफेड़ों के साथ दिल्ली आ रहे थे। इन लफेड़ों ने उक्त बोगी में ऐसी हुड़दंग मचायी और गाली-गलौज़ की, कि इन दोनों महिला प्रशिक्षुओं को अपनी आरक्षित बर्थ छोड़ कर अपने सामान पर ही बैठ कर और जाग कर आना पड़ा। बाक़ी सहयात्री भी सहमे रहे और टीटीई भी लापता हो गया।

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ख़ैर, आगे इन महिला प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण के लिए तुरन्त अहमदाबाद निकलना था। पर उक्त घटना से सहमी एक महिला प्रशिक्षु ने फिलवक़्त अहमदाबाद जाने का कार्यक्रम टाल दिया। पर दूसरी महिला प्रशिक्षु जो आसाम से थीं, उनकी एक और महिला बैचमेट जो भी आसाम से ही थीं, वह उनके साथ अहमदाबाद जाने के लिए पहले से ही दिल्ली से तैयार थीं। पर अब इन दोनों महिला प्रशिक्षुओं के सामने समस्या टिकट की थी क्योंकि आननफानन में टिकट कन्फर्म नहीं हुआ था। पर जाना भी जरुरी था।

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तो ऐसे में करें क्या..?? ख़ैर, ये दोनों दिल्ली से अहमदाबाद जाने वाली ट्रेन की टीटीई से मिली और अपना परिचय दिया। टीटीई ने सहृदयता दिखाई और उन्हें एक बोगी में बिठा दिया। वहाँ दो सहयात्री खादी का कुर्ता-पायजामा पहने बैठे थे। टीटीई ने बताया कि दोनों गुजरात से नेता हैं और अकसर यात्रा करते हैं, मैं इन्हें जानता हूँ, अच्छे लोग हैं, सो आप दोनों चिंतित न हों।

मरता क्या न करता..?? सहमी सी ये दोनों बैठी क्योंकि नेताओं को लेकर इनकी छवि बिगड़ चुकी थी लखनऊ से दिल्ली आते वक़्त। पर इस बोगी में ये दो नेता एकदम से अपने बर्थ पर सिमट गए ताकि ये दोनों महिला प्रशिक्षु आराम से उनके बर्थ पर बैठ सकें। फिर इनमें आपस में शुरुआती अभिवादन के बाद बातें होने लगी।

बातचीत राजनीति व इतिहास के विभिन्न मुद्दों पर होने लगी। दोनों नेताओं में जो ज्यादा बड़ी उम्र के थे, वे खुलकर बात कर रहे थें, जबकि छोटे वाले अपेक्षाकृत कम बोलते, पर सुनते ज्यादा थे चौकस होकर। जो लखनऊ से ही महिला प्रशिक्षु आ रही थीं, उन्होंने इन दोनों नेताओं से मात्र 51 वर्ष की उम्र में ही श्यामा प्रसाद मुख़र्जी की रहस्यात्मक मृत्यु की चर्चा छेड़ दी..!!
तब कनिष्ठ नेता ने आश्चर्य से पूछा कि अरे, आप उन्हें कैसे जानती हैं..??
तब उक्त महिला प्रशिक्षु ने बताया कि जब आसाम से आने वाले उनके पिता जी कलकत्ता विश्वविद्यालय से पोस्ट-ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे थे, तब वहाँ के वाईस चांसलर श्यामा प्रसाद मुख़र्जी ही थें, और उन्होंने ही उनके पिता जी की पढ़ाई के लिए स्कालरशिप की व्यवस्था की थी..!!

बातचीत के दौरान वरिष्ठ नेता ने उन दोनों महिला प्रशिक्षुओं से आग्रह किया कि आइये हमारे गुजरात में और हमारी पार्टी ज्वाइन कीजिये। तब दोनों महिला प्रशिक्षुओं ने हँसते हुए कहा कि वो दोनों तो गुजरात से नहीं हैं..!! तब कनिष्ठ नेता ने कहा कि अरे, इससे क्या हुआ..हमें कोई समस्या नहीं है..हम अपने राज्य में हमेशा टैलेंटेड लोगों को आमन्त्रित करते हैं..!!

तभी बातों के दौरान शाकाहारी भोजन के चार थाल आ गए। खाना खाने के उपरान्त सारा पैसा कनिष्ठ नेता ने दिए। उन दोनों महिला प्रशिक्षुओं को न देने दिया।
इसी बीच टीटीई आये और उन्होंने बताया कि बर्थ की व्यवस्था तो हुई नहीं महिला प्रशिक्षुओं के लिए क्योंकि ट्रेन तो ठसाठस भरी हुई है यात्रियों से।

इससे पहले की दोनों महिला प्रशिक्षु दोबारा से परेशान होती, दोनों ही नेताओं ने नीचे ट्रेन की फ़र्श पर अपने चादर बिछाएं और खुद की दोनों बर्थ उन दोनों महिला प्रशिक्षुओं के लिए खाली कर दी बिना किसी शिकन के.. और रात भर दोनों नेता ट्रेन की फ़र्श पर ही सोते हुए आएं..!!

सुबह जब ट्रेन अहमदाबाद पहुँचने को हुई, तो वरिष्ठ नेता ने शिष्टाचारवश उन दोनों महिला प्रशिक्षुओं से कहा कि अगर उन दोनों को किसी भी प्रकार की दिक्कत हो, तो वे उनके परिवार के साथ उनके घर पर रुक सकती हैं। कनिष्ठ नेता ने कहा कि चूँकि वह घुमक्कड़ किस्म के हैं और उनका रहने लायक कोई घर नहीं, सो वे दोनों महिला प्रशिक्षु चाहे तो बड़े आराम से वरिष्ठ नेता के घर सुरक्षित रुक सकती हैं।

तब दोनों महिला प्रशिक्षुओं ने बताया कि नहीं उनके रहने की कोई समस्या नहीं है यहाँ। फिर चलते-चलते वह महिला प्रशिक्षु, जो लखनऊ से ही चली थीं, उन्होंने अपनी डायरी निकाली और उन दोनों नेताओं से उनका नाम बताने का आग्रह किया क्योंकि शुरुआती अभिवादन के वक़्त बताये गए नाम को वह जल्दी-जल्दी में भूल गयीं थीं। जो वरिष्ठ नेता थें, उन्होंने अपना नाम लिखाया- शंकर सिंह बाघेला..!!
कनिष्ठ नेता ने अपना नाम लिखाया- नरेंद्र मोदी….!!!!!!?

नोट:- @”यह संस्मरण श्रीमती लीना सरमा दी (एफबी लिस्ट में हैं, पर टैग नहीं कर रहा..) का लिखा हुआ है अंग्रेजी में (जिसे मैंने हिंदी में अपने शब्दों में ढाला है), जो सम्प्रति रेलवे इनफार्मेशन सिस्टम केंद्र की जनरल मैनेजर हैं नई दिल्ली में और यही लखनऊ से चली थीं उस वक़्त और जो दूसरी दिल्ली से चली थीं इनकी बैचमेट, वह वर्तमान में रेलवे बोर्ड की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्रीमती उत्प्लपर्णा हज़ारिका जी हैं..!!”

– कुमार प्रियांक..?

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