टाटा समूह महज कंपनी नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक कॉरपोरेट संस्कृति है।

Prev1 of 2Next
Click on Next Button

ब्लॉग – ( शुभाष सिंह सुमन) टाटा = ट्रस्ट ! – एक स्वतंत्र उपक्रम में, समुदाय कारोबार का महज एक अन्य भागीदार न होकर उपक्रम के अस्तित्व का अंतिम उद्देश्य होता है। यह कथन है जमशेदजी टाटा का और टाटा कंपनी के ट्रस्ट का पर्याय हो जाने का मूलमंत्र भी। यह महज इसलिये मत मान लीजिये कि हम या कोई और कह दे रहा है। तथ्यों को परख लीजिये, कसौटियाँ कसिये, जान जाएँगे। पर, हम फिलहाल अपनी बात बड़ी करते हैं।

tata-group
Source

टाटा समूह में सौ से अधिक कंपनियाँ हैं जिनमें टाटा नमक से लेकर जगुआर लैंड रोवर तक शामिल हैं। विश्व के 173 देशों में इन कंपनियों का कारोबार है और इन में करीब छह लाख साठ हजार आठ सौ लोग नौकरी करते हैं। वित्त वर्ष 1995-96 में कंपनी का कुल राजस्व 14,092 करोड़ रुपये था जो वित्त वर्ष 2015-16 में बढ़कर छह लाख सतहत्तर हजार पाँच सौ छप्पन करोड़ रुपये हो गया है। यह आंकड़ा देश के सबसे धनी व्यक्ति मुकेश अंबानी की सभी कंपनियों के राजस्व के नौ गुणे से भी अधिक है।

बीएसई में टाटा समूह की मात्र 29 कंपनियाँ लिस्टेड हैं और महज इन कंपनियों का बाजार पूँजीकरण पूरे बीएसई के बाजार पूँजीकरण का आठ प्रतिशत है। कुल सात लाख इकहत्तर हजार दो सौ करोड़ रुपये।

अब आते हैं सामाजिक चीज़ पर। एक प्रावधान है कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी। कंपनी एक्ट 2013 के तहत इसका प्रावधान किया गया और यह एक अप्रैल 2014 से अमल में आया। इसके तहत कंपनियों को मुनाफे का दो प्रतिशत सामाजिक कार्यों पर खर्च करना होता है।

Prev1 of 2Next
Click on Next Button

To Share it All 🇺🇸🇮🇹🇩🇪NRI Citizens

Leave a Reply

Your email address will not be published.