श्री कृष्ण ने यहां त्यागा था अपना शरीर, अंतिम समय का 5 हजार साल पुराना पेड़ आज भी है मौजूद

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श्रीकृष्ण ने मानव रुप में अवतार लेकर अनेक लीलाएं की । श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रीकृष्ण से जुड़ी अनेक रहस्यमयी कहानियां आप सुनते आ रहें होंगे लेकिन हम जो आपको बताने जा रहे हैं उसके बारे में आपने पहले नहीं सुना होगा । शायद सबको पता होगा कि श्रीकृष्ण ने अपनी मृत्यु खुद निर्धारित की थी । हम आपको उस रहस्यमयी जगह के बारे में जानकारी देंगे जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपना शरीर त्यागा था ।

यहां पर शरीर त्यागा था भगवान श्रीकृष्ण नेshri-krishnas-death1

भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी देह गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित भालका तीर्थ में अपना शरीर का त्याग किया था । यहां भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर बना हुआ है जो उनके आखिरी समय की याद दिलाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहां कुछ मांगता है, भगवान श्रीकृष्ण उसकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं । इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण और जरा (शिकारी) की प्रतिमा स्थापित है और जो सबसे खास बात है यहां कि वो है उस समय का वो पेड़, जिसके नीचे भगवान श्री कृष्ण ने अपनी देह का त्याग किया था । ये पेड़ कभी नहीं सूखता है । बरसों से ये उसी हालत में विद्यमान है ।

ऐसे त्यागा था भगवान श्री कृष्ण ने अपना शरीर 

श्री कृष्ण जग के रचयीता थे । श्री कृष्ण ने अपनी मृत्यु का समय निश्चित किया । श्री कृष्ण इसी पेड़ के नीचे विश्राम कर रहे थे तभी एक शिकारी ने श्री कृष्ण के पैर पर तीर चलाया । दरअसल शिकारी ने पैर पर इसलिए तीर चलाया क्योंकि श्री कृष्ण के पैर में मणी लगी हुई थी और वो बहुत चमक रही थी । शिकारी को लगा कि कोई जानवर है जिससे ये प्रकाश आ रहा है । तीर लगने पर श्री कृष्ण घायल हो गये और घायलावस्था में ही भालका से थोड़ी दूर पर स्थित हिरण नदी के किनारे पहुंचे । जहां भगवान पंचतत्व में विलीन हो गये ।

आज भी मौजूद है यहां भगवान कृष्ण के चरणों के निशान

हिरण नदी सोमनाथ से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। यहां नदी के किनारे आज भी भगवान के चरणों के निशान आज भी मौजूद हैं। इस जगह को आज दुनिया भर में देहोत्सर्ग तीर्थ के नाम से मशहूर है।

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