पढ़िये- 1 रुपये में से 85 पैसे खाने वालों पर इस चायवाले मोदी के बेइंतिहा जुल्म की दास्तान

आनंद जी. शर्मा (यूनाइटेड हिन्दी) फेडरेशन ऑफ ऐंटीनेशनल सेक्यूलरिस्ट स्लीपरसेल ऐंड दहशतगर्द = #फ़साद (Federation of Antinational Secularist Sleepercell and Dahshatgard = #FASSAD) का ऐलान-ए-जंग

पढ़िये इस चायवाले के बेइंतिहा जुल्म की दास्तान

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टैक्स पेयर के 1 रुपये में से 85 पैसे खा जाने वाली चमत्कारी और नायाब मशीन की मदद से हमने 60-62 बरसों में दूर दृष्टि – पक्के इरादे और कड़ी मेहनत से हमारे विश्व प्रसिद्ध अर्थशास्त्री के 15 अगस्त 2013 के ऐलान-ए-आम के मुताबिक सिर्फ 81 करोड़ ही भिखारी बना पाये थे जो 1, 2 और 3 रूपया किलो में सड़ा गला अनाज भीख में ले कर 5 बरस जिन्दा रहते थे और हमारे इस एहसान के बदले हमें वोट दिया करते थे ।  chai-wala

सब कुछ ठीक चल रहा था और हमारा टार्गेट अगले आम चुनावों तक 100 करोड़ भिखारी बनाने का था लेकिन 2014 में पता नहीं कहाँ से एक चाय वाला आ गया और हम जैसे शातिर मक्कारों को पानी पिला कर – सबका साथ सबका विकास के झूठे नारे से बरगला कर कुछ लोगों को झांसे में ले कर मुल्क का वजीर-ए-आजम बन बैठा और अब हमारे गुलाम इन 81 करोड़ भिखारियों को आजादी दिलाने और हमारे शिकंजे से छुड़ा कर जमीर के साथ ईमानदारी गैरत खुद्दारी की जिंदगी जीने का ख़्वाब दिखा कर 500 और 1000 रूपये के नोट रद्द कर दिये ।

हम फेडरेशन ऑफ ऐंटीनेशनल सेक्यूलरिस्ट स्लीपरसेल ऐंड दहशतगर्द के सारे फ़सादिस्ट अपने फ़साद गिरोह के परचम तले यह कसम खाते हैं कि हम भिखारी बनाने वाली अपनी खानदानी पेशे वाली पुश्तैनी दुकान बंद नहीं होने देंगे और खून की एक एक बूंद से हमारे गिरोह के सरगना की हिफाज़त करेंगे ।

हम इन 81 करोड़ भिखारियों को हमारे चंगुल से निकल कर एक इज्जतदार जिंदगी जीने का जोखिम उठाने की इजाजत हरगिज नहीं देंगे और न ही इतने जतन और नायाब कारीगरी से बनायी गयी 1 रुपये में से 85 पैसे खा जाने वाली चमत्कारी मशीन को बेकार होने देंगे ।

हम अपने प्यारे गुलाम भिखारियों को पुश्त दर पुश्त भिखारी बनाये रखने के लिये चाहे जितनी भी घटिया पैंतरेबाजियाँ करनी पड़े – हमारे डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेंट को चाहे जितने बेबुनियाद बेतुके बेहुदे बचकाने और बिना सबूत के झूठे इल्जाम ईजाद करने पड़ें – हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे । हम अपनी जान से प्यारे गुलाम भिखारियों को इस नमो चाय वाले के सबकी तरक्की और खुशहाली के जाल में हरगिज नहीं फँसने देंगे ।

सब फ़सादी लोग मुट्ठी बाँध कर पूरी ताकत से गला फाड़ कर 3 बार चीखो : #या_बेईमानी_तेरा_आसरा

– या बेईमानी तेरा आसरा – या बेईमानी तेरा आसरा ।

(लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं , एवं यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम स्‍वागत करता है। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया  [email protected] पर भेज सकते हैं। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें। अगर आप भी भारत के लिए ब्‍लॉग लिखने के इच्छुक लेखक है तो भी आपका यूनाइटेड हिन्दी पर स्वागत है।)

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