तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने जनता के टेक्स वाले सरकारी धन से मंदिर में चढ़ाया 3.7 करोड़ का मुकुट

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तेलंगाना: सूखे के कारण कर्ज में डूबे तेलंगाना के किसान एक और आत्महत्या कर रहे हैं वहीँ दूसरी और राज्य के मुख्यमंत्री करोडो रूपये के गहने मंदिरों में चड़ा रहें हैं।

सरकारी तिजोरी को बाप का माल समज कर अपने नाम पर धार्मिक स्थलों में खर्च करने की नेताओ की पुरानी आदत रही है। कभी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में भारत के सरकारी खर्चे से 2 करोड़ रूपये का चंदन का लकड़ी चढ़ाया था….

जबकि भगवान या देवी माँ तभी खुश हो सकते है जब सभी मनुष्य प्रेम से रहे, कोई भूखा ना हो, कोई बीमार ना हो, किसी नारी पर अत्याचार ना हो रहा हो। अपने कर्तव्य का पालन ही सबसे बड़ा धर्म है…. पर सुर्खियों में बने रहने वाले नेता ये कभी नहीं समझेंगे।

रविवार को मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने वारंगल के भद्रकाली मंदिर में 3.7 करोड़ रुपये का मुकुट चढ़ाया. 11.7 किलोग्राम वजन के इस मुकुट को बनवाने के लिए राज्य सराकर के सरकारी खजाने के धन का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान पत्नी शोभा राव और मंत्रिमंडल के कुछ सहयोगियों के साथ राव ने मंदिर में मौजूद थे।

दरअसल के. चंद्रशेखर राव ने मन्नत मांगी थी कि आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना राज्य के गठन पर वह दोनों राज्यों के मंदिरों में आभूषण चढ़ाएंगे। लेकिन इसमें सरकारी धन के इस्तेमाल करने पर सवाल उठ रहें हैं।

तेलंगाना सीएम के लिए ये कोई नया मामला नहीं हैं. इससे पहले भी वह धार्मिक प्रयोजन में इतनी बड़ी सरकारी रकम खर्च खर्च चुके हैं।

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