सबसे पहले इन्होंने किया था मृत्युंजय मंत्र का जप, जानें इतिहास के अनोखे बच्चों के बारे में

कहते हैं बच्चे साक्षात ईश्वर का स्वरूप होते हैं, क्योंकि उनके मन में किसी के लिए भी बुरे विचार नहीं

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एकेश्वरवाद और धर्म के मामले में भी भारत इसी पूर्वाग्रही दृष्टी का शिकार हुआ!

ब्लॉग (यूनाइटेड हिन्दी) – Govinda Chauhan : मौलाना मुहम्मद हुसैन आज़ाद (१८३०-१९१०) ने अपने ‘सुखनदान-ए-फारस’ नामक ग्रन्थ में लिखा लिखा है की “हिन्द

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