15,000 किलो सोने का भारत में मंदिर, इस धन से एक हजार बार देश की गरीबी मिटाई जा सकती है!

भारत की एक ऐसी जगह जहां सूर्योदय पर चमचमाता मंदिर सोने की चिड़िया रूपी भारत के दर्शन कराता है और डूबते सूर्य से जन्मी सिंदूरी शाम इसे विशाल स्वर्णिम रथ सा दर्शाती है। ये दोनों नजारे आपको इस धरती पर स्वर्ग के नजारें का सुख दे सकते हैं… एक ऐसा पवित्र स्थल जहां बारहों महीने असली लक्ष्मी जी की सेवा पल-पल की जाती है और आप कभी भी यहां हर कभी दीवापली मना सकते हैं। आप सोच रहेंगे होंगे हम ऐसे कौन से धार्मिक स्थल की बात कर रहे हैं ! तो हम आपको बता दें कि ये भव्य मंदिर तमिलनाडु के वेल्लोर जिले में स्थित श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर है जिसे महालक्ष्मी मंदिर और मलईकोडी के रूप में भी जाना जाता है और यह दक्षिण भारत का एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक जगह है।

300 करोड़ रूपए की लागत से बना है

यह मदिर अपनी भव्यता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि वेल्लोर जिले का महालक्ष्मी मंदिर को बनाने में 15 हजार किलो सोने का इस्तेमाल हुआ है और इस पर करीब 300 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. दुनिया में ये इकलौता मंदिर है जिसके अंदर और बाहर इतनी बड़ी मात्रा में सोने का इस्तेमाल किया गया है. रात की चांदनी रौशनी जब इस सोने के मंदिर पर पड़ती है तो मानो स्वर्ग जमीन पर उतर आया है।

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देश का पहला मंदिर जहां लहराया जाता है तिरंगा

संभवत: यह भारत का पहला मंदिर होगा, जहां राष्ट्रपति भवन, लोकसभा और अन्य सरकारी कार्यालयों की तरह तिरंगा ध्वज फहराया जाता है। इसका दर्शन कहता है कि मंदिर हिन्दु, मुस्लिम, सिक्ख और इसाईयों के लिए खुला है। तभी तो पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व गर्वनर डॉ. सुरजीतसिंह बरनाला और जॉर्ज फर्नाण्डीज यहां दर्शन करके जा चुके हैं।

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