पढिए : आरएसएस व देशभक्ति! दोनों का मेलजोल क्यों संभव नहीं!

@KhileriBaba : आपने घोड़े की झाप के बारे में सुना ही होगा! शादी में जो घोड़ा लाया जाता है उसके दोनों कानों को ढक दिया जाता है व दांए-बांए नहीं देख पाता। सिर्फ आगे की तरफ 60° एंगल में ही देख पाता है। आरएसएस से जुड़े जितने भी लोग होते है उनको त्रिवर्षीय कोर्स के प्रथम ईयर में ही यह झाप पहना दिया जाता है। Thought of bunch सरीखी आदर्शवादी किताबों के जरिये बंच ऑफ़ बुद्धू में तब्दील कर दिया जाता है। बस उसी एंगल से हर बात/मुद्दे को परिभाषित करना होता है। दुनियाँ की हर चीज को अलग-अलग एंगल से देखा जाएगा तो हटकर विचार पैदा हो सकते है जो संघी व्यवस्था अर्थात मनुवादी व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर देती है इसलिए दुनियाँ से एक्सपोज़र की सारी लाइने यह झाप पहनाकर काट दी जाती है।

आरएसएस अर्थात संघी व्यवस्था कभी भी अपने विचारधारा से किसी व्यक्ति को महान नहीं बनने देती। मनुवादी व्यवस्था व्यक्ति की उपयोगिता देखती है। उपयोगिता खत्म और काम तमाम! इसलिए किसी संघी को किसी और से कोई खतरा नहीं होता है। इस देश मे दो तरह के वर्ग है एक मेहनत के बल पर पूँजी पैदा करने वाला और दूसरा पूँजी से पूँजी पैदा करने वाला। आरएसएस अर्थात मनुवादी पूँजी से पूँजी पैदा करने वाले वर्ग के हित मे व्यवस्था बनाये रखने का काम करता है इसलिए संघ कभी किसान आत्महत्या, बेरोजगारी, भुखमरी, अशिक्षा, चिकित्सा, गरीबी के लिए कोई आंदोलन नहीं करता है।

आरएसएस अर्थात संघी विरोधियों से निपटने के लिए चार तरीकों से काम करता है।
► पहला नजरअंदाज करना जैसे आप उनके विचारों/नीतियों का विरोध करते हो तो चुपचाप आपको नजरअंदाज कर दिया जाएगा।
► दूसरा विरोध करना यानी आरएसएस आपके बीच से ही पैदा किये अपने झाप पहनाए गुलामों से ही आपका विरोध करवायेगा ताकि आप आपस मे उलझकर ही अपना समय व ऊर्जा बर्बाद करते रहो।
► तीसरा हत्या यानि आरएसएस को लगने लगता है कि यह अब उनकी व्यवस्था के लिए खतरा बनता जा रहा है तो जो दिमाग मे नफरतों का जहर भरकर कट्टर उन्मादी तैयार किये है उनको अप्रत्यक्ष तौर पर उकसाता है कि देखो हमारे धर्म को गालियां दे रहा है! देश के विरोध में काम कर रहा है! धर्मवाद फैलाकर देश को तोड़ रहा है! फिर कलबुर्गी/गौरी लंकेश जैसे परिणाम सामने आते है!
► चौथा तरीका है खुद अपना लो अर्थात जब लगे कि किसी के साथ बड़ा जनमत जुड़ा हुआ है और उनसे सीधी टक्कर लेना संभव नहीं तो उसको खुद अपनाकर उनके विचारों में विकृतियां पैदा करके हत्या कर दी जाती है। गौतम बुद्ध विष्णु के अवतार, सरदार पटेल के साथ कांग्रेस ने अन्याय किया, महाराजा सूरजमल महान थे सरीखे परिणाम आपको देखने को मिलते है।

आरएसएस यानी संघी मनुवादियों का झुंड है। संघी मतलब सर्वश्रेष्ठ! यह एक श्रेष्ठी वर्ग है जो मानवता, नैतिकता, संविधान किसी को नहीं मानता है। यही कारण था कि अंडमान की सेलुलर जेल में महाराष्ट्र के 550 कैदी थे सब वहीं मर गए लेकिन एक माफिवीर सावरकर बाहर आया था! महारानी विक्टोरिया को सलामी देते थे! देश की आजादी से इनका कोई लेना देना नहीं था। ये लोग अपनी व्यवस्था बनाये रखने की जद्दोजहद में फंसे हुए थे। इनकी व्यवस्था को खतरा आजादी के बाद शुरू होने वाला था इसलिए ये लोग अपनी ऊर्जा भविष्य के लिए बचा रहे थे। यही कारण रहा कि एक भी संघी देश की आजादी के लिए शहीद नहीं हुआ था।

आरएसएस यानी संघियों को खतरा मुसलमानों व ईसाइयों से था। कमेरा वर्ग तो इनका सदियों से गुलाम रहा था और आगे भी गुलाम बनाये रखने को लेकर अपनी काबिलियत पर पूरा भरोसा था। जब अंग्रेजों के समय सबको मतदान व प्रतिनिधित्व का अधिकार दिया जाने लगा तो तथाकथित लोकमान्य तिलक का गुस्सा फूट पड़ा और कहा “ये तेली-तम्बोली संसद में क्या करेंगे?” यही कारण रहा कि देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था तब संघी मुसलमानों व ईसाइयों के खिलाफ नफरत की जहरीली फसल की बुवाई कर रहे थे इसी का परिणाम था कि आजादी के समय ये लोग संविधान व तिरंगे का विरोध कर रहे थे! ये लोग खुद को संविधान से ऊपर मानते है इसलिए आज तक आरएसएस का रेजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है क्योंकि संघ मनुस्मृति को सर्वोपरि मानता है व उसी व्यवस्था का पोषक है।

आरएसएस का विरोधियों को खत्म करने का चौथा नुस्खा अभी धड़ाधड़ चल रहा है कि अपनाकर/कब्जा करके मिलावट करके विकृत कर दो ताकि मनुवादी व्यवस्था के लिए लंबे समय तक कोई खतरा पैदा न हो! संविधान को 60° एंगल से परिभाषित किया जा रहा है! शिक्षण संस्थानों सहित हर लोकतांत्रिक व्यवस्था को झाप वाले 60° एंगल से सेट किया जा रहा है। सरकारी तंत्र में धीरे-धीरे 60° एंगल वाले इतने सेट कर दिए है कि न इनको शाखा लगाने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत पड़ती है न निक्कर पहनकर हाथों में लाठियां, तलवारे सहित हथियार लेकर पथ संचलन करने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत पड़ती है। झाप पहने पुलिस वाले कहते है कि हिन्दू संगठन ही तो कर रहा है! झाप पहने शिक्षक कहते है हमारा ही तो संगठन है स्कूल मैदान में करे तो क्या दिक्कत है! मोहल्ले वाले कहते है देशभक्त लोग है पार्क में दूब थोड़ी-बहुत खराब हो भी जाएगी तो क्या हो जाएगा!

देशभक्ति के प्रमाणपत्र बांटने वालों का वीडियो देखिए। तिरंगे की होली जलाने वाले लोगों का तिरंगे के प्रति दिलों में सम्मान कभी नहीं हो सकता!

भाजपा के झंडे को राष्ट्रगान के साथ सलामी!
बस चले तो ये लोग करदे देश की ही नीलामी!!

मतलब संघी/मनुवादी व्यवस्था खुद को बनाये रखने के लिए संविधान, लोकतंत्र, मानवता, नैतिकता, मानवाधिकार आदि ठेंगे पर रखकर हर वो काम कर रही है जिससे एक सभ्य समाज, एक राष्ट्र कमजोर होता जाएं लेकिन विरोध उस अंदाज में नहीं होते जिस अंदाज में होना चाहिए क्योंकि झाप वाली 60° वालों की संख्या ज्यादा जुटा ली है व स्वतंत्र सोच, दुनियाँ से एक्सपोज़र रखने वाले लोग खामोश है। चाहे संविधान की हत्या कर दें लेकिन लोगों का बचना जरूरी है क्योंकि भगतसिंह आज भी दस्तावेजों में एक आतंकी ही तो है!