जिनकी वजह से हुई थी नोटबंदी, अब उसने दिया संकेत, बंद होंगे 2000 के नये नोट

दो हजार के नए नोट को लाने का मकसद हजार, 500 के नोट खत्म होन के चलते परेशानी को कम करना था।
दो हजार के नए नोट को लाने का मकसद हजार, 500 के नोट खत्म होन के चलते परेशानी को कम करना था।

नई दिल्ली: 2000 हजार की नई करेंसी को सरकार बहुत जल्दी खत्म करने वाली है। ये कहना है एक हजार व पाँच सौ की नोटबंदी के मास्टरमाइंड माने जाने वाले अर्थक्रांति एनजीओ के सदस्य अनिल बोकिल का। अनिल ने एक बिजनेस कॉलेज में अपनी स्पीच में यह बात कही। बता दें कि इससे पहले संघ से जुड़े इकोनॉमिस्ट एस गुरुमूर्ति भी कह चुके हैं कि पांच साल में 2000 रुपए का नोट बंद हो जाएगा।

हार्ट सर्जरी जैसी है नोटबंदी…
अर्थक्रांति एनजीओ के सदस्य अनिल बोकिल के मुताबिक 500 और एक हजार के नोट भारत में कुल कैश का 86 फीसदी थे। ऐसे में इन्हें एक बार में खत्म करने से नागरिकों की समस्या काफी बढ़ जाती। इसलिए 2000 हजार के नए नोट को लाने का मकसद इसी परेशानी को कम करना था।

अर्थक्रांति एनजीओ के सदस्य अनिल बोकिल ने इसे हार्ट सर्जरी के उदाहरण से समझाया। उन्होंने कहा कि जब दिल किसी बायपास सर्जरी से गुजरता है तो उसके जगह कोई दूसरा इंस्ट्रूमेंट लगाया जाता है। इस सर्जरी में दो हजार का नोट उसी इंस्ट्रूमेंट का काम कर रहा है।

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टूटी सड़क में एक डाइवर्जन की तरह है दो हजार का नोट
कैश अर्थव्यवस्था की एक टूटी फूटी सड़के से तुलना की। अनिल बोकिल ने कहा कि 2000 हजार का नोट इन सड़कों में डाइवर्जन का काम करेगा। जैसे ही रोड़ की मरम्मत पूरी हो जाती है तो डाइवर्जन को हटा दिया जाता है। इसी तरह दो हजार के नोट को भी कुछ सालों में खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि नोटबंदी में हो रही परेशानी पर अनिल बोकिल का कहना है कि ये आज नहीं तो कल होनी ही थी। ये सुधार का जरिया है। इसके पीछे सरकार की मंशा अच्छी है।

राजन के बदलने के दो महीने बाद बनी थी योजना
इससे पहले गुरुमूर्ति ने कहा था कि “रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के बदलने के दो महीने बाद नोटबंदी की प्लानिंग बनी थी।” “सीक्रेसी रखते हुए बहुत कम वक्त में इसे लागू किया गया। ऐसे में कुछ कमियां स्वाभाविक हैं। “इतने कम समय में 500 और 1000 रुपए के नोट छापना मुश्किल था। लेकिन 2000 का नोट तो चलन से बाहर करना ही होगा।”

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