ब्लॉग: नागाप्रदेश और उत्तर-पूर्व की इस हालत के अपराधी कौन ?

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ब्लॉग: अभिजीत सिंह (यूनाइटेड हिन्दी) – असम की ब्रह्मपुत्र घाटी और बर्मा के बीच पहाड़ी इलाके के संकरी पंट्टी में बसे राज्य नागालैंड की लगभग सारी आबादी जनजातीय है। यहाँ कई कबीले और उप-कबीले हैं जिनकी पृथक भाषायें, परम्परायें और सांस्कृतिक विशेषतायें हैं।nagaland

हमारे महाकाव्य महाभारत में नागालैंड के लोगों और इस प्रदेश के बारे में काफी कुछ मिलता है। भीम की पत्नी और घटोत्कच की माता हिडिम्बा इसी प्रदेश से थी, इसके अलावा अर्जुन की पत्नी उलूपी भी नागा-कन्या थी। अफ़सोस कि जिस नागाप्रदेश के साथ हमारे इतने प्राचीन संबंध थे, हमने कभी उनकी सुध लेने की नहीं सोची! महाभारत काल में पांडवों के वहां जाने का वर्णन मिलता है पर उसके बाद हमारे किसी पूजनीय शंकराचार्य, माधवाचार्य, महामंडलेश्वर या किसी बड़े नेता द्वारा उस प्रदेश के भ्रमण का वृतांत नहीं मिलता। यानि हमने कभी पांडववीर भीम और अर्जुन के ससुराल वालों की तरफ मुड़कर नहीं देखा, कभी उनका हाल पूछने नहीं गये, वो किस दुःख या परेशानी का सामना कर रहें हैं हमने कभी जानने की कोशिश नहीं की।

यहाँ के लोग शुरू से ही बड़े सीधे-साधे, प्रकृति पूजक और भोले-भाले थे पर कबीलाई रीति के कारण आपस में इनकी अक्सर भिड़ंत भी होती थी, हमने उन्हें भूला दिया था तो वो भी किसी बाहरी की आहट से ही खौफजदा हो जाते थे इसलिये किसी भी बाहरी पर हमला कर देना या उसे क़त्ल देना इनके लिये आम था।

फिर जब भारत में अंग्रेजों का शासन आया तो नागालैंड और पूर्वोत्तर की वनवासी आबादी उन्हें मतान्तरण की फसल नज़र आई जिसे काटने के लिये उन्होंने नागाप्रदेश में कई पादरी भेजें। बाहरी लोगों से सशंकित नागाओं ने इन पादरियों का कड़ा विरोध किया और कई ईसाई प्रचारकों को मार भी दिया पर उन्होंनें प्रयास नहीं छोड़ा। 1938 में अंग्रेजों ने एक भाषा-विज्ञानी अब्राहम ग्रियसन को ख़ास तौर पर बुलवाया और उसे नागाप्रदेश में भेज दिया। नागा कबीलों में “आओ” कबीला बड़ा प्रभावी माना जाता है और उनकी अपनी “आओ भाषा” भी बड़ी उन्नत है, इसलिये अब्राहम ग्रियसन ने इसके ऊपर फोकस किया, उसने बड़े जतन कर नागाओं से मधुर संबंध बनाये फिर उनकी आओ भाषा सीखी। उसके बाद उसने आओ भाषा का पहला व्याकरण तैयार किया जिसने उसने नाम दिया “तेतन जक्बा आओ ग्रामर”। इस काम में उसे कई वर्ष लग गये पर इस दौरान उसने अपने असली उद्देश्य को छिपाये रखा पर जैसे ही उसने आओ भाषा पर महारत हासिल कर ली तुरंत अपने एक चेले पादरी को बुलाया।

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