TATA ग्रुप से जुड़ा एक किस्सा : (Yogendra singh की कलम से)

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यूनाइटेड हिन्दी (Yogendra sing) – “हुआ यूं था कि मैंने घर पर वोल्टास का AC लगवाया था , दो दिन चलने के बाद AC कूलिंग नहीं दे रहा था । गर्मी चरम पर , पर AC बेकार , काम नहीं कर रहा था । मैं उस स्टोर (जहाँ से AC लिया था ) से लेकर , कॉल सेंटर तक फोन पर फोन किये जा रहा था , सिर्फ सिर्फ आश्वासन मिल रहा था । अब मेरा गुस्सा सातवे आसमान पर पहुच चुका था … मैं आर पार की लड़ाई कीसोच लिया था । इनका कॉल सेंटर पुणे में था , मेरी वहां जितनी बार बात हुयी सबका कमिटमेंट और नाम नोट करता गया । 5 दिन बीत गए कोई एक्शन नहीं , वजह बताया गया , इतना AC बिक रहा है कि , सभी इतने बिजी है जिसकी वजह से देरी हो रही है , हम देरी के लिए माफी चाहते हैं ।ratan-ji-tata

अब वोल्टास के चिंचपोकली ऑफिस के कुछ बड़े अधिकारियों का नंबर निकाल चुका था , मेरी उनसे बात होने लगी , कुछ और प्रयास करने के बाद मेरी वोल्टास के GM से फोन पर बात हुई , उनसे मैंने कहा मुझे आज का आज AC रिप्लेस करके चाहिए ?क्या आप इस बात गारंटी दे सकते हैं ?

उन्होंने साफ़ मना कर दिया , कहा कल आपके घर पर टेक्नीकल टीम से कोई विजिट करेगा । मैंने कहा नहीं मुझे किसी की विज़िट नहीं चाहिए , आप AC चेंज कर रहे हैं या नहीं , मैं पिछले एक हफ्ते से फोन पर फोन किये जा रहा हूँ, कोई एक्शन नहीं हुआ , आप भी कॉल सेंटर वालों की तरह आश्वासन दे रहे हैं ,, क्या आप मुझे आप आज AC चेंज करके दे रहे हैं या नहीं ? मुझे हाँ या ना में जवाब दीजिये , इस पर GM साहब उखड गए कहा “आय ऍम नॉट अंसरेबल टू यू” कहकर फोन पटक दिया । फिर जितनी बार भी बोर्ड लाइन पर फोन लगाकर उनका एक्सटेंशन माँगा , मुझे उनसे बात नहीं करायी गयी । अब मेरा वोल्टास में प्रयास पूरा हो चुका था , उंगली टेढ़ी करने का वक़्त आ गया था।

मेरे एक बचपन के मित्र IIT कानपुर से पढ़ने के बाद सीधे TATA स्टील ज्वाइन किये थे ( आज भी वे TATA ग्रुप के एक डिवीजन को हेड कर रहे हैं ) मैंने उन्हें फोन लगाया , और उससे कहा , मुझे रतन टाटा का email ID चाहिए । वो हंसने लगा बोला क्या हो गया ? मैने कहा तू मुझे email ID दे मैं उनका कस्टमर हूँ , मुझे कुछ बातें कहनी है ।

मैंने एक मेल बनाया , जिसमे सारे डिटेल्स लिखा , कब किससे किससे बातें हुयी , क्या क्या बातें हुयी, कितनी बार बातें हुयी , किसने किसने क्या क्या आश्वासन दिया …और अंत में लिखा सर निम्न मध्यम परिवार से हूँ , AC मेरे लिए लग्जरी है , जब इस लग्जरी के लिए हिम्मत जुटाई तब ज़ेहन में भी बात आई TATA …इस नाम पर इतना भरोसा है कि कुछ सोचने की ज़रूरत नहीं , लेना है तो ‘वोल्टास’ का ही …. आज मेरा वो भरोसा इस कदर टूट रहा है, मानो मेरे साथ छल हुआ हो । घर आते ही बिटिया पूछती है , पापा AC कब ठीक होगा ? चेयरमैन सर, अब आप ही मेरी बेटी को जवाब दीजिये ??

ये मेल करके मैं चुप चाप बैठ गया , घंटो खामोशी ,  मैंने पत्नी से इतना ही कहा देखना अब तमाशा ।।

करीब 3 से 4 घंटे बाद घर के विंडो से देखता हूँ , एक टेम्पो रुकी है , फिर देखता हूँ , टेम्पो से AC उतारा जा रहा है … । जिस टेक्नीकल टीम के पास टाइम नहीं था , उस टीम से 3 बन्दे मेरे लिए नयी AC लेकर आये , तीनो का चेहरा देखने लायक था , बिलकुल सहमे हुए थे । पहले वाली AC को चुप चाप उतारा और नयी AC फिट कर अच्छे से डेमो देकर पूछा , सर आप सेटिस्फाईड़ हो ?

मैंने कहा क्या हुआ ? आज मेरी इतनी चिंता तुमलोगों को ? फिर उसने पूछा सर आप रतन टाटा को जानते हो ? मैंने कहा क्या हुआ ? उसने कहा सर आज तक ऐसा अर्जेंट केस नहीं देखा , ऊपर से आर्डर आया , ये केस अभी अभी सॉल्व कर कस्टमर को सेटिस्फाईड़ करके ही लौटना , ये रतन टाटा का आर्डर है …. और तो और कंपनी में जिससे जिससे आपकी बात हुई थी उन्हें पनिशमेंट के तहत उनकी 3 दिन की सैलरी काटने का हुक्म है ।

और मैं मुस्कुराने लगा – योगेंद्र सिंह

 

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