Rani Durgawati Historical Reality of Indi – रानी दुर्गावती

रानी दुर्गावती (सन् 1524-1564)
रानी दुर्गावती (सन् 1524-1564)

ब्लॉग: केशर देवी (यूनाइटेड हिन्दी) – रानी दुर्गावती (सन् 1524-1564) महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्ति सिंह चंदेल की एकमात्र संतान थी। महोबा के राठ नामक गाँव में 1524 ई. की दुर्गाष्टमी पर जन्म के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया। नाम के अनुरूप ही तेज, साहस, शौर्य और सुन्दरता के कारण इनकी प्रसिद्धि सब और फैल गयी। दुर्गावती के मायके और ससुराल पक्ष की जाती भिन्न थी। फिर भी दुर्गावती की प्रसिद्धि से प्रभावित होकर राजा संग्राम शाह ने अपने पुत्र दलपत शाह से विवाह करके, उसे अपनी पुत्रवधू बनाया था।

दुर्भाग्यवश विवाह के चार वर्ष बाद ही राजा दलपत शाह का निधन हो गया। उस समय दुर्गावती की गोद में तीन वर्षीय नारायण ही था। अत: रानी ने स्वयं ही गढ़मंडल (गोंडवाना) का शासन संभाल लिया। उन्होंने अनेक मंदिर, मठ, कुएं, बावड़ी तथा धर्मशालायेँ बनवाई। वर्तमान जबलपुर उनके राज्य का केन्द्र था। उन्होने अपनी दासी के नाम पर चेरीताल, अपने नाम पर रानीताल तथा अपने विश्वस्त दीवान आधारसिंह के नाम पर आधारताल बनवाया।

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रानी दुर्गावती के इस सुखी और सम्पन्न राज्य पर मालवा के मुसलमान (जिनकी फितरत ही दंगा करना होती है) शासक बाजबहादुर ने कई बार हमला किया, पर हर बार वह पराजित हुआ। मुगल शासक अकबर भी उसके राज्य को जीतकर, रानी को अपने हरम (कोठे) में डालना चाहता था। उसने विवाद प्रारम्भ करने हेतु रानी दुर्गावती के प्रिय सफ़ेद हाथी (सरमन) और उनके विश्वस्त वजीर आधारसिंह को भेंट के रूप में अपने पास भेजने को कहा परन्तु रानी ने अकबर की मांग ठुकरा दी।

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