बीजेपी किसानो के लिये एक जहरीला नाग है! लेकिन कांग्रेस नाग से भी बड़ा कोबरा नाग है!

कांग्रेस ने राजस्थान के जाट नेताओं को एक-एक करके ठिकाने लगा दिए ! कांग्रेस से जो जाट नेता चिपके हुए है उनका न जाट कौम से कोई लेना देना है और न किसान-दलित-अल्पसंख्यकों से! इस देश मे पूंजीवाद की आग कांग्रेस ही लेकर आई थी व उसके बाद ब्राह्मण-बनियों के अलावे किसी का भला नहीं हुआ है। मिर्धा-मदेरणा-कुम्भाराम जी आर्य व ओला साहब के बाद कांग्रेस भटक गई। 1991 में पूंजीवाद अपनाया गया व 1992 में हिंदूवाद! आज मैं बात सिर्फ राजस्थान के संदर्भ में कर रहा हूँ। इसलिए कोई बंधु अलग नजरिये से विश्लेषण न करे!

1977 में लोकदल के समय कुछ कांग्रेस से परे जाट नेता खड़े हुए थे लेकिन उनकी न कोई विचारधारा थी न भविष्य की कोई रूप रेखा!इसलिए कांग्रेस से परे खड़े हुए जाट नेताओं का राजस्थान की राजनीति में कोई वजूद नहीं रहा है। अजमेर सांसद सांवरलाल जाट के अलावा बीजेपी के झंडे के नीचे कोई जाट नेता तैयार हुआ हो तो आप बता दीजिए!

दुविधा यह है कि कांग्रेस ने राजस्थान के जाट नेताओं की राजनीति खत्म कर दी! बीजेपी ने कभी जाट नेताओं को इतना मजबूत ही नहीं होने दिया कि वो जाटों के हकों के लिए आवाज बने! अब कांग्रेस-बीजेपी से परे राजस्थान के जाट कुछ धरातल तलाशने लगे तो बाकी राज्यों के जाटों को लगा कि हम स्थानीय समीकरण सेट कर लेते है फिर राजस्थान के जाटों के बारे में सोचेंगे!

दुविधा यहीं खत्म नहीं हो रही है! दलित व अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने राजस्थान के जाटों से बहुत उम्मीदें पाल रखी है! राजस्थान का जाट घरेलू अभ्यास कर रहा है व यूपी व हरियाणा वाले खुश हो रहे है कि जो हमारे साथ हुआ व हो रहा है वो अब राजस्थान में होगा!

यूपी व हरियाणा वाले भाइयों हमारे साथ तो पहला राउंड है दूसरे राउंड की तैयारी आप कर लो???

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