प्लास्टिक में आंत रखकर दर-दर भटकने को मजबूर है हिंदुस्तान का एक जवान

जवानों के लिए अपना सब कुछ कुर्बान कर देने का दावा करने वाली बीजेपी की असलियत क्या है उसे सीआरपीएफ जवान मनोज तोमर की जहालत भरी जिंदगी से समझा सकता है। मध्य प्रदेश के तरसमा गांव के रहने वाले मनोज तोमर 2014 के एक नक्सली हमले में घायल हो गए थे। उसके बाद से ही मनोज अपनी आंत को पेट के बाहर पॉलीथिन में बांध कर घूमने के लिए मजबूर हैं। न तो उनका आपरेशन हो पा रहा है और न ही उसका कोई दूसरा रास्ता सूझ रहा है। आपको बता दें कि इस हमले में एक गोली उनकी आंख में भी लगी थी जिससे मनोज की एक आंख भी खराब हो गयी है। हालांकि उनकी केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात भी हुई थी। वहां से उन्हें आश्वासन तो जरूर मिला लेकिन पैसा नहीं मिला।

दैनिक जागरण में छपी खबर के मुताबिक मनोज 2014 में झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में सात गोलियां लगी थीं। इस हमले में उनकी आंत पेट से बाहर आ गयी। उस समय गोलियां लगने के चलते उनका तत्काल आपरेशन नहीं हो सकता था। लिहाजा चिकित्सकों ने उसे टाल दिया। इस बीच उनकी आंत बाहर ही लटकी रही। लेकिन अब जब शरीर आपरेशन के लायक हो गया है तो मनोज के पास पैसे नहीं हैं।

दरअसल मनोज के इलाज में सरकार के नियम आड़े आ रहे हैं। नियम कहता है कि मनोज चूंकि छत्तीसगढ़ में ड्यूटी के दौरान घायल हुए थे इसलिए उनका इलाज रायपुर के अनुबंधित अस्पताल नारायणा में ही होगा। अगर इलाज की सारी सुविधाएं और व्यवस्था हो तो भला किसी को क्या एतराज होगा। लेकिन बताया जा रहा है कि वहां इलाज संभव ही नहीं है। जानकारों का कहना है कि सरकार एम्स से आंत और चेन्नई से उनकी आंख का इलाज करवा सकती है। लेकिन उस दिशा में किसी की तरफ से कोई पहल नहीं हो रही है। इस बीच मनोज रायपुर स्थित नारायणा अस्पताल में नियमित चेकअप के लिए जाते हैं। लेकिन उसमें भी उन्हें ढेर सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

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