NSG में भारत की सदस्यता को लेकर चीन ने फिर दिया संकेत, रुख नहीं बदलेंगे

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चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग (दाएं) के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग (दाएं) के साथ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: गोवा में होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शिरकत के लिए चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा से पहले चीन ने फिर संकेत दिए हैं कि वह न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) में भारत की पूर्ण सदस्यता के मुद्दे पर समर्थन करने में असमर्थ है, हालांकि उसका कहना है कि वह ‘संभावनाओं’ को लेकर भारत के साथ आगे बातचीत करने के लिए तैयार है।

unitedhindi से बातचीत करते हुए चीन के विदेश उपमंत्री ली बाओडॉन्ग ने कहा कि एनएसजी में नए सदस्यों को शामिल करने के लिए उनके नाम पर सभी मौजूदा सदस्यों को सहमत होना होता है, तथा ये नियम चीन ने नहीं बनाए हैं। हालांकि उन्होंने कहा, “एनएसजी में शामिल होने के मुद्दे पर भारत और चीन के बीच अब तक बहुत अच्छी बातचीत हुई है, तथा मतैक्य की दिशा में बढ़ने के लिए (चीन) भारतीय पक्ष के साथ आगे बातचीत करने का इच्छुक है। इसी तरह भारत एनएसजी के अन्य सदस्य देशों के पास भी जा सकता है।”
ली ने कहा, “इस मुद्दे पर, हिंदुस्तान के साथ मिलकर सभी तरह की संभावनाओं को तलाश करने के लिए चीन इच्छुक है, लेकिन ऐसा NSG के नियमों के तहत ही किया जाना चाहिए, और कुछ नियमों का पालन सभी पक्षों को करना होगा।” एनएसजी के नियमों के मुताबिक किसी भी ऐसे देश को एनएसजी की सदस्यता नहीं दी जा सकती, जिसने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर दस्तखत नहीं किए हैं।

एनपीटी के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों – अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन तथा फ्रांस – को ही परमाणु शक्तियों के रूप में स्वीकार किया जाता है, किसी भी अन्य देश को नहीं! भारत ने एनपीटी पर दस्तखत करने की संभावना को नकार दिया है, लेकिन उसका कहना है कि अप्रसार के क्षेत्र में भारत के ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर उसे एनएसजी का सदस्य बना लिया जाना चाहिए। वर्ष 2008 में भारत को परमाणु संबंधी व्यापार में शामिल होने के लिए एनएसजी से छूट मिल गई थी, लेकिन संगठन के फैसलों में वोट देने का अधिकार भारत के पास नहीं है।

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