‘वो रिश्तेदार जो मुझे बेबकूफ बता रहे हैं, उनमें से कोई हैजे या प्लेग से मर जायेगा पर मुझे ये मौत….

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16 नवंबर : किसी के पुण्य स्मरण का दिन
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इस देश के युवाओं के लिये भगत सिंह सबसे बड़े आदर्श हैं पर भगत सिंह जिन्हें अपना आदर्श मानते थे उनके बारे में बहुत कम लोग जानतें हैं। भगत का आदर्श कोई बुजुर्ग साधू-संन्यासी , कोई राजनेता या कोई आध्यात्मिक व्यक्तित्व नहीं था बल्कि साढ़े 19 साल का एक युवक था। भगत अपने जेब में साढ़े 19 साल के इस युवक की तस्वीर रखा करते थे और उसकी तस्वीर के सामने माल्यार्पण कर किसी सभा की शुरुआत करते थे।

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भगत का ये आदर्श पंजाब के लुधियाना के एक छोटे से गाँव के धनाढ्य परिवार में जन्मा था। उसके तीनों चाचा सरकारी सेवा में अच्छे पदों पर थे। अपने उम्र के 11 वे साल में थे तब बंगाल में बंग-भंग आन्दोलन शुरू हो गया और वहीं से क्रांति और देशप्रेम का बीजारोपण उनके अंदर हुआ। हाई स्कूल की परीक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिये उस बालक ने 1911 में अमेरिका का रुख किया। जहाज से जब अमेरिका की भूमि पर सैनफ्रांसिस्को तट पर कदम रखा तो वहां के अधिकारियों ने बेहद अपमानजनक तरीके से उनकी तलाशी ली और उनके साथ बुरा व्यवहार किया। ऐसा बर्ताव जहाज से आने वाले दूसरे लोगों के साथ नहीं किया जा रहा था तो वो उस अधिकारी से पूछ बैठे कि ऐसा व्यवहार केवल मेरे साथ ही क्यों ? जबाब मिला, तुम गुलाम देश इंडिया से आये हो इसलिये….  इस घटना ने उनकी जिन्दगी और सोच की दिशा ही बदल दी।

फिर उन लोगों की संगत खोजने लगे जिनके अंदर भारत को आजाद कराने का जूनून था। मदाम भिकाजी कामा, तारक नाथ दास, सोहन सिंह भाखना, बाबा ज्वाला सिंह, बरकतुल्लाह, लाला हरदयाल और इन जैसे कुछ जुनूनियों ने मिलकर 1913 में गदर पार्टी की स्थापना की। उद्देश्य था अंग्रेजों से भारत को आजाद करवाना। संगठन ने कई भाषाओं में ग़दर नाम का एक अख़बार शुरू किया जो क्रान्ति की लौ जलाती थी। भारत से गये इस बालक को उस अखबार के गुरुमुखी संस्करण को संपादित करने की अहम जिम्मेदारी दी गई। इतने बड़े उद्देश्य वाले अख़बार के इस गुरुमुखी संस्करण के सम्पादक की उम्र थी महज 17 साल….. इस लड़के को जितनी अच्छी गुरुमुखी आती थी उतनी ही महारत उसे आंग्ल भाषा पर भी थी। अमेरिका में संगठन ने तय किया कि 1857 की ही तर्ज़ पर भारत जाकर वहां की सैनिक छावनियों में विद्रोह कराया जाये। इस अहम काम का जिम्मा उस युवक को भी सौंपा गया और वह कोलम्बो के रास्ते भारत आ गया।

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