धरती पर ऐसी कोई ताकत नहीं जो PAK को कश्मीरियों का साथ देने से रोक सके : नवाज शरीफ

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने एक बार फिर कश्मीर राग अलापते हुए नापाक बयान दिया है। शरीफ ने कहा कि दुनिया में कोई ऐसी ताकत नहीं है जो पाकिस्तान को कश्मीरियों के संघर्ष का समर्थन करने से रोक सके।

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इस्लामाबाद : कश्मीर को लेकर पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़े पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ सुधर नहीं रहे हैं। गुलाम कश्मीर में भारत के सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सदमे में चल रहे शरीफ बडी बेशर्मी के साथ कश्मीर में जारी आतंकवाद की तुलना आजादी की लड़ाई से कर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने कश्मीरी आतंकवादियों का फिर खुला समर्थन किया। कहा कि कश्मीर में जारी संघर्ष की तुलना आतंकवाद से नहीं की जा सकती है।

रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक पीएमएल-एन की सेंट्रल वर्किंग कमेटी (CWC) की मीटिंग में कहा कि कश्मीर में हो रहे “फ्रीडम फाइट” की तुलना आतंकवाद से करके भारत गलती कर रहा है। शरीफ ने एक बार फिर से आतंकी बुरहान वानी की शान में कसीदे पढ़ते हुए कहा कि मशहूर विद्रोही नेता के मारे जाने के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों का कत्ल कर दिया।

बुरहान वानी को हीरो बताते हुए शरीफ ने कहा कि घाटी (कश्मीर) की स्थिति के कारण ही दोनों न्यूक्लियर देशों के बीच एलओसी पर तनाव है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार आतंकवाद समेत सभी चुनौतियों पर काबू करने का प्रयास कर रही है। इससे पहले पाकिस्तानी संसद में बोलते हुए शरीफ ने कहा था कि वह शांति चाहते हैं और कश्‍मीर समेत बाकी मुद्दों को शांति से सुलझाना चाहते हैं। शरीफ ने कहा, ”उरी हमले के कुछ ही घंटों बाद बिना किसी जांच के भारत ने इसके लिए पाकिस्‍तान को जिम्‍मेदार ठ‍हरा दिया। हम जंग के खिलाफ हैं, हम शांति चाहते हैं और कश्‍मीर समेत सारे मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करना चाहते हैं।”

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) की केंद्रीय कार्यकारिणी को संबोधित करते हुए नवाज शरीफ ने अपना नापाक मंसूबा जाहिर किया। वह बोले, ‘भारत अगर यह सोचता है कि आजादी की लड़ाई की तुलना आतंकवाद से की जा सकती है तो वह गलती कर रहा है।’ नवाज के अनुसार, कश्मीरी अपने आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं और पाकिस्तान उनका समर्थन करता रहेगा। कहा, ‘दुनिया की कोई भी ताकत हमें कश्मीरियों की जंगे आजादी की लड़ाई का समर्थन करने से रोक नहीं सकती है।

‘ इससे पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र आम सभा के संबोधन के दौरान भी कश्मीर का राग अलापा था, लेकिन दुनिया के किसी भी देश ने उनकी बात पर गौर नहीं किया। उनके द्वारा नियुक्त विशेष दूत भी विदेश से खाली हाथ लौट आए। किसी भी देश ने कश्मीर पर उनकी दलील को नहीं माना। कई देशों ने तो आतंकवादियों को शरण देने के मुद्दे पर इन विशेष दूतों की फजीहत भी कर डाली।

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