मुस्लिम दार्शनिक ने कहा, ‘ इस्लाम ने केवल शैतान पैदा किया’

अज्ञेय आत्मन् (यूनाइटेड हिन्दी) – फ्रेंच मुस्लिम दार्शनिक अब्देनूर बिदार ने अक्टूबर 2014 में एक लेख लिखकर इस्लाम की विसंगतियों की आलोचना की थी। अपने आलोचनात्मक लेख में उन्होंने मुस्लिम समुदाय से सुधार की अपील की थी। इस लेख में उन्होंने इस्लाम के नाम पर होने वाली हिंसा और आतंक की भी आलोचना की थी। लेख का सारांश इस तरह है….. 

शार्ली ऐब्दो के ऑफिस पर इस्लामिक आतंकियों ने हमला किया था।
शार्ली ऐब्दो के ऑफिस पर इस्लामिक आतंकियों ने हमला किया था।

मुस्लिम समुदाय! मैं देख पा रहा हूं कि आप अपनी गरिमा खोते जा रहे हैं और सही मायने में अपने अस्तित्व को भी। आपके अंदर एक शैतान जन्म ले चुका है और आप अपना सारा वक्त और ताकत इस सच को नकारने में लगाते हैं। डियर मुस्लिम वर्ल्ड! मैं आपके समुदाय का ही एक बेटा हूं और फ्रांस में रहता हूं। उसी मुल्क में जहां आज बड़ी संख्या में आपमें से बहुतों के बच्चे रहते हैं। मैं एक दार्शनिक की तीक्ष्ण आंखों और सूफी और पश्चिम के विचारों को जानने वाले के तौर पर देखता हूं।

दूर से और निरपेक्ष होकर मैं देख रहा हूं कि आप बेहद दयनीय हालत में हैं। एक मुसलमान के तौर पर मेरे लिए यह दुखद है, लेकिन एक आलोचक के तौर पर कटु अनुभव देनेवाला। एक दार्शनिक के तौर पर मेरा मानना है कि आपके अंदर शैतान जन्म ले चुका है, जिसे आप ‘इस्लामिक स्टेट’ कहकर बुलाते हैं।

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मेरे प्यारे समुदाय! इस समुदाय से ही आपकी बगावत करने वालों का रुदन मैं सुन पा रहा हूं। इस्लाम का एक गौरवशाली अतीत रहा है। अपने मूल रूप में इस्लाम मानव जीवन को अधिक सुंदर, न्यायपूर्ण और बेहतर बनाने वाला रहा है। इस्लाम मानव जीवन के रहस्यपूर्ण रास्तों को प्रकाश दिखाने का काम करता रहा है। यहां पश्चिम में रहने के दौरान मैं दूर से इस्लामी समुदाय को देख पा रहा हूं। मैं देख रहा हूं कि एक शैतान ने आपके मानवीय चेहरे को पूरी तरह से ढंक दिया है।

मैं देख रहा हूं कि दुनिया के सभी संप्रदाय के लोग मानवीय मूल्यों को आगे ले जाने के लिए 21वीं सदी में अपना योगदान दे रहे हैं। इस्लामी समुदाय की तमाम खामियों के बाद भी कुछ लोग हैं, जो इसमें सुधार की गुंजाइश देखते हैं। सुधार की संभावनाओं पर यकीन रखने वाले ये लोग इस्लाम में बड़े बेहतर सुधार के लिए काम करने को भी तत्पर हैं। मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि ‘इस्लामिक स्टेट’ जैसे शैतानी जुमलों को तरजीह न दें। आपको सुधार की जरूरत है और इसकी शुरुआत बेहतर शिक्षा से हो सकती है। शिक्षा जिसमें मानवीय मूल्य शामिल हों और जो विश्व को देखने के लिए एक बेहतर नजर दे सके।

सलाम, आप सबके लिए शांति की दुआ के साथ…

आपका – अब्देनूर बिदार

टॉप कमेन्ट : इस्लाम और इस्लाम के माननेे वालों में अन्तर को समझना होगा। अगर इस्लाम के मूल सिद्धान्त में हिन्सा या आतंकवाद पाया जाता है तब तो आप इस्लाम को गलत कह सकते हैं लेकिन अगर नाम मुसलमान जैसा है और काम आतंकवादियों जैसा है तो इसलाम कहां से दोषी होगा। जैसे किसी भी देश की जेल में हर तरह के सजाफता मुजरिम पाये जाते है – Imam Khan

आतंकवदिओ को सबसे ज्यादा सपोर्ट करने वाला और नये नये ग्रूप बनाने वाला ए सौदी अरब ही दुनिया का सबसे बड़ा दुश्मन है जब तक ए देश रहेगा तब तक आतंकवाद रहेगा – Abhineet Singh

(इस लेख के प्रकाशित होने के तीन महीने बाद ही पैरिस में मैगजीन शार्ली ऐब्दो के ऑफिस पर इस्लामिक आतंकियों ने हमला किया था।)

खबर की सोर्स 

 

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