मोदी ने जो निर्णय लिया है, यदि वो इसमें सफल रहे तो वो इस शदी के महानायकों में गिने जायेंगे।

Click on Next Button
सरकार की मंशा में नियत में कोई खोट नहीं ।
सरकार की मंशा में नियत में कोई खोट नहीं ।

अजित सिंह (यूनाइटेड हिन्दी) –  कल से अब तक 20 से ज़्यादा बैंक कर्मी मित्रो के फोन और inbox message आ चुके हैं । सबने यही कहा कि नोट बदलने का सिस्टम इतना फूलप्रूफ है की large Scale घपले की कोई गुंजाइश ही नहीं । एक एक नोट और सिक्के तक का हिसाब देना है । न सिर्फ आरबीआई बल्कि पुलिस , आयकर विभाग यहाँ तक कि आईबी तक बैंक , एटीएम के अन्दर बाहर , भीड़ में और लोगों की लाइन पर नज़र रख रही है । निगरानी का स्तर ये है कि लोगों की लाइन में इनकम टैक्स और आईबी के लोग खड़े सूंघते फिर रहे हैं ।

कोई बैंक मैनजर और बैंककर्मी किसी सेठ का लाख दो लाख रु तो कमीशन ले कर रक्षित कर सकता है पर करोड़ों का घपला करना संभव ही नहीं है । उसमे भी पकडे जाने की संभावना प्रबल है और सरकार की policy zero tolerance है । जो पकड़ा गया वो जेल जाएगा और नौकरी से भी जाएगा ।

सरकार की मंशा में नियत में कोई खोट नहीं ।
जहां तक बात चोरी चकारी उठाई गिरी की है तो भैया ये तो हमारा राष्ट्रीय चरित्र है । अब इसको तो मोदी जी रातों रात बदल नहीं सकते । घर में आग लगी हो तो पूरा मुहल्ला बुझाने चला आता है … अब उसी में कुछ चोर लगे हाथ मौक़ा देख के हाथ भी साफ़ करेंगे ही … चोर चोरी से जाए हेरा फेरी से न जाए ।

पर ये काले धन वाले सब कोशिश करके भी क्या बचा लेंगे ? कितना बचा लेंगे ? 90 % काला धन रद्दी में तब्दील होना तय है ।

जहां तक बात कैस की logistics की है तो ये जान लीजिये कि इतने बड़े मुल्क में इतने बड़े पैमाने पे इतना ज़्यादा काश देश के दूर दराज के इलाकों तक पहुंचाना , दुर्गम इलाकों तक पहुंचाना , वो जहां न रास्ते हैं , न संसाधन , नक्सली इलाकों में , आतंक वाद से प्रभावित इलाकों में … पूरी सुरक्षा के साथ cash पहुंचाना और Simultaneously पहुंचाना …. ये इतनी बड़ी इतनी massive exercise है कि आप इसकी कल्पना तक नहीं कर सकते ।

आज से दो चार महीने बाद जब ये exercise ख़त्म हो जायेगी और जब इसकी समीक्षा होगी तब जा के पता चलेगा कि ये अपने आप में एक ऐसा काम हुआ जिसकी कोई मिसाल आज तक दुनिया के किसी मुल्क में कोई नहीं … इतने बड़े पैमाने पे छोटे नोट यानी 100 और 50 के नोट पूरे देश में banks तक पहुंचाना और पुराने नोटों को वापस RBI को सुपुर्द करना … यूँ समझ लीजे कि कुम्भ का मेला है ।

मोदी जी ने जो निर्णय लिया है , यदि वो इसमें सफल रहे तो वो इस सदी के महानायकों में गिने जायेंगे ।

जहां तक बात विपक्ष के नेताओं की है , तो उनकी बौखलाहट सिर्फ नोट बंदी को ले के नहीं है । वो आने वाले कल को लेकर आशंकित हैं जब अगली स्ट्राइक उनकी प्रॉपर्टी पर होगी … विपक्ष अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है ।

Click on Next Button

To Share it All 🇺🇸🇮🇹🇩🇪NRI Citizens