पटाने रिझाने के लिए जैसे प्रेम प्रत्र आदि लिखे जाते थे, उसी का मॉडर्न रूप है डेटिंग

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संजय कोटियाल (जर्मनी से)डेटिंग स्ट्रेस सिंगल लोगो को बर्न आउट की तरफ भी धकेल सकता है ।  ये न्यूज छपी तो जाहिर है एक विकसित देश और समाज के नजरिये को जानने की इच्छा रहती है । भारत से अलग तो है ही । पढ़कर आभास भी हो जाता है क्योंकि बाते लगातार होती रहती हैं । या दिखता रहता है ।

इस जर्मन में लिखे का वर्ड टू वर्ड ट्रांसलेट करने की चेष्टा रहेगी, जिस भाव में समझा है । काम का हो तो अच्छा होगा । काम की बात नहीं लगे तो इग्नोर करने में कोई बड़ी बात भी नहीं है । जिसकी जैसी इच्छा ।

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लगातार डेट पर जाने वाले सिंगल्स और घंटो तक टिंडर पर जुटे रहने वाले पार्टनर नहीं ढूंढ पाते जो परफेक्ट मैच कहलाता है और वो संतुष्ट नहीं रहते । युगल थेरापोएट्स इस बात को ऑब्जर्व कर रहे हैं कि ज्यादातर सिंगल्स की शक्ति चुक गयी है और और प्यार पर विश्वास खो चुके हैं । “ऐसे कई हैं जो 25 साल के हैं, जिनको डेटिंग बर्न आउट है” – ऐसा महिला सलाहकार क्लाउडिया लीथा कहती हैं ।

जो ऑनलाइन रहता है, बड़ा प्यार ढूंढता है, थेरापोएट्स के मुताबिक, अक्सर अकेले रह जाते हैं, एक्झास्ट हो जाते हैं, या संबंधों के लायक ही नहीं रह जाते हैं ।

इसके बिलकुल विपरीत कि कुछ क्लिक्स के द्वारा स्विस लोग अपना ऑनलाइन पार्टनर ढूंढ सकें, वो थक जाते हैं ।
पार्टनर पोर्टल, लुक एंड लव , की क्लाउडिया लीथ के मुताबिक 25 साल के सिंगल्स को डेटिंग बर्न आउट होता दिख रहा है ।
बल्कि कई असफल सिंगल्स को इसी कारण से बीमारी के कारण जॉब से छुट्टी लेते देखा गया है । लीथा के अनुसार -“वो अपने को अनाकर्षक पाते हैं, अपने आत्मविश्वास की कमी पाते हैं, स्वयं का कोई मूल्य ना होने से प्रेम पर से विश्वास हट जाता है और संभावना हो जाती है कि फेमिली प्लानिंग के लायक नहीं रह पाते हैं ।” jarmani-news2

कई थेरापोएट्स तो यहाँ तक बताते हैं कि दो दो अपेरो होने के बावजूद सिंगल्स सवेरे के पांच बजे तक डेटिंग प्रोफ़ाइल फ़िल्टर करते रहते हैं । ऐसा राइनर ग्रुनर्ट कहते हैं । ऐसे सिंगल्स हमेशा “किसी बेहतर” की तलाश में रहते हैं । (इस वाक्य को गौर से पढ़ा जा सकता है , मेरी पर्सनल टिपण्णी है ), ऐसा मानकर कि हर एक नई डेट एक नया किक होगी ।  ऐसे में वो डेटिंग लत में पड़ जाते हैं । नतीजे में सम्बन्ध बना सकने में पूर्ण रूप से लायक नहीं रह जाते हैं ।

एंजेला देल्ला टोरे के ऑब्जर्वेशन के अनुसार, “जैसे ही किसी की हॉबी दुसरे को पसंद नहीं आती, तुरंत ही वो डेटिंग की संभावना ख़ारिज हो जाती है, नए को ढूंढना शुरू हो जाता है । ऐसा देखा जाने लगता है कि अगला उस मानक पर परफैक्ट मैच बन रहा है या नहीं ।”

लीथा का कहना है कि प्रॉब्लम है डेटिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध मॉस । ये इतना ज्यादा है कि सिंगल्स निर्णय कर पाने में दिक्कत होती है, और वो नहीं जानते कि वो कौन हैं और उनको क्या चाहिए । इस समस्या को स्टेला जेको भी इस तरह से देखती है कि ऐसे कई डेटिंग पोर्टल्स हैं, जो ऊपरी समानताओं के आधार पर नजदीक लाने की कोशिश करती है ।

डेटिंग की सफलता के तरीके, क्लाउडिया लीथा के मुताबिक –

• प्रोफ़ाइल को अच्छे से भरें । और अपने मित्रों और परिवार के लोगो से सहायता लें ।
• अपनी क्वालिटी फोटो जो प्रोफेशनल फोटोग्राफ से खिंचवाई गयी हो, उसका उपयोग करें ।
• जिससे संपर्क हो उससे बात करें, रूचि दिखाएं ।
• पहली डेट को केवल आधा घंटा का रखें । इससे मालुम पड़ जाएगा कि आपको दूसरा खोजना है ।
• अगर आपको पहली डेट पर ही kiss करने का विचार टकराता है, तो आपका सही पार्टनर या पार्टनरिन नहीं है ।

ये बाते अवॉयड करनी चाहिए डेटिंग में –

• प्रोफ़ाइल में ये ना लिखें कि आपको कैसे लोग पसंद हैं । ऐसे में शिकारी लोगो के फिल्टर से आप छंट सकते हैं ।
• अपनी फोटो को कभी एडिट मत करिए, और ना छिपाइए, अगर आप अपने लिए खड़े हैं ।
• अगर आपका फोटो नीचा डेकोलेट दिखाता है या शरीर का ऊपरी हिस्सा ट्रेंड बॉडी का हिस्सा, तो ये दिखाता है कि आप पहले संबंधों में असफल रहे हैं ।
• पहली ही डेट में अचानक से अपनी रूचि , फ़ुटबाल और रोमेंटिक फिल्मों की बात में मत लग जाईये ।
• पहली डेट में अपने पार्टनर को कभी किस मत करिए, थिरकते हुए बाँधने वाले हॉर्मोन्स को रेडपिंक चश्मे का जरुरत होता है ।

जे पोस्ट तो अपन पेल दिया । जानना चाहिए । आँखे फाड़ फाड़ के भी मत देखिये । जो आपको पता है वो मुझे भी पता है । इतनी सी बात है । प्रेक्टिकल तौर पर कौन ऐसी आदर्श डेटिंग के चक्कर में पड़ता है ? या क्या इतना सोचकर कोई डेटिंग पर जाने का हिम्मत करेगा भी ? कहीं ये तो नहीं कि मानव कमजोरी का आफ्टरमैथ है जो विश्वास को ही ख़त्म कर देता है कि समाज के लायक वो नहीं रहे या अपेक्षाओं का इतना बड़ा कागज़ का घड़ा बना दिया जाता है जो ज़रा सी पानी की बूंदों से ख़त्म हो जाने के कगार पर रहता है । आखिर सच्चे सिंगल्स और प्रेमी इस मॉडर्न डिजिटल युग में जाएँ तो कहाँ जाएँ ??

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