ब्लॉग : हे प्रभु, इन्हें क्षमा मत कर देना क्योंकि इन्हें पता है कि ये असत्य प्रचार कर रहें हैं…

हे प्रभु, इन्हें क्षमा मत कर देना.....
हे प्रभु, इन्हें क्षमा मत कर देना…..

ब्लॉग : अभिजीत सिंह (यूनाइटेड हिन्दी) – न्यू टेस्टामेंट (यानि बाईबिल का उत्तर भाग) खोल कर देखिये कि वहां मसीह ने अपने शिष्यों को क्या प्रार्थना सिखाई थी। मैथ्यू,( 6:9-13) में मसीह कहते हैं……

“अत: तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो: ‘हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में हैं; तेरा नाम पवित्र माना जाए। तेरा राज्य आए, तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो, हमारी दिन भर की रोटी आज हमें दे।”

इसके विपरीत हमारे पूर्वज क्या प्रार्थना करते थे ‘श्रीदुर्गा सप्तशती’ खोल के पढ़ लीजिये। वहां हमारे ऋषि कहतें हैं…..

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विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तञ्च मां कुरु ।।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥॥

यानि, माँ ! तुम मुझे विद्वान्, यशस्वी और लक्ष्मीवान करो। मुझे रूप (यानि आत्मस्वरूप का ज्ञान) दो, जय दो, यश दो और मेरे काम, क्रोध आदि व्याधियों का (शत्रुओं का) नाश करो।

तुम मुंह उठाकर हम लोगों में ज्ञान की अलख जगाने आये हो मूर्ख मिशनरियों ! जिस वक़्त तुम सिर्फ दिन की रोटी मिलने को ही जीवन का ध्येय मानने थे और केवल उसी के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते थे, उससे सदियों पहले से हम ईश्वर से विद्या ,यश, लक्ष्मी और जय मांगते थे। रोटी हमें हमारा पुरुषार्थ देता था न की ईश्वर!

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