पत्रकार रवीश कुमार के नाम एक भारतीय मुसलमान दर्शक का खुला खत

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ravish

रवीश कुमार जी मैं आपका बड़ा फैन हूं,
वैसे रवीश जी आप खुद को हज़ारों लोगों का प्रेरक, और आदर्श भी मानते हैं, पर कुछ बातें एैसी हैं जो इसी आदर्श व प्रेरक की निष्पक्षता और सहंशीलता पर उंगली उठाती हैं। उन्हीं का जवाब आप से चाहिए!
रोहित वेमुला, कनहैय्या, दीना मांझी, जे.एन.यू, डेंगू, मच्छर, जैसे सैंकड़ों मुद्दों पर प्राइम टाईम पर कई कई घंटे आपने बोलने में आवाज़ उठाने और सच को बाहर निकालने में गुज़ार दिया। टी.वी पर अंधेरा कर दिया। नेता, जनता, पत्रकारिता और विधिता हर एक को आपने झकझोरा…………..
सुधीर चौधरी, राहूल, यशवंत, रजत, और सरदाना जैसे बिकाऊ मालों की भीड़ में आप जैसे निष्पक्ष, ईमानदार और सच्चे पत्रकार को देख मीडिया के कुछ इकाईयों पर यकीन बाकी रहा…………
आप बिहार के रवीश से भारत के एक बड़े पत्रकार ही नहीं हमारी आवाज़ और लोकतंत्र के सुतून बन गये.. आपका क़स्बा एक शहर नहीं इंटरनेशनल प्लेटफार्म बन गया। लेकिन ज़ाकिर नाईक का मीडिया ट्रायल, चांदबाग़ दिल्ली से 13 निर्दोषों की गिरिफ्तारी, जामिया नगर के मुस्लिम बच्ची  के साथ रेप, डींगरहेड़ी में संघियों द्वारा  सामूहिक रेप और हत्या, रुकिये अभी एक लम्बी लिस्ट है।
गुजरात के अय्यूब की गौआतंकियों द्वारा हत्या, और अब बिजनौर के पेदा में हिंदुओं का 5 मुसलमानों को सरेआम पूलिस की संरक्षण में गोली मारकर हत्या कर देना। चलते रहिये छिट पुट बहूत सारे हादसे हैं जो होते रहते हैं। पुराने हो जाते हैं। हम जैसे हज़ारों इन पर प्राईम टाईम होते देखना और सुनना चाहते हैं टीस यही है कि इन पर आज तक हमने टीवी को अंधेरा होते नहीं दिखा।
NDTV पर इन सब घटनाओं के लिये कोई प्रोग्राम नहीं चला… सवाल ये है कि आप की नज़र में ये सब मुद्दे बनने के क़ाबिल नहीं है? या NDTV इन्हें मुद्दा समझती ही नहीं? या ये समाज के उस तबक़े के मसाएल हैं जो ध्यान देने के क़ाबिल ही नहीं ??
रवीश जी!
पत्रकारिता के मापदंडों, उसूलों और आदर्शों को आपसे बेहतर कौन समझ सकता है ? पर अगर आप और आपका चैनल भी इन पर खरे नहीं उतरते तो हमें ये कहने में कोई संकोच और हिचकिचाट नहीं होगी कि सम्पूर्ण भारत की मीडिया दोग़ली है और हर किसी का मुस्लिम समाज के साथ दोहरा रवय्या ही है… याद रखिये लाखों लोग आप को फॉलो करते हैं.. आपकी गुणगान करते हैं। निशपक्ष पत्रकारिता का दूसरा नाम रवीश कुमार का नारा लगाते हैं। क्योंकि आप निष्पक्ष समझे जाते हैं….. इसलिये नहीं कि आप अच्छा बोल लेते हैं! चुभते सवाल उठाते हैं! ये काम तो सुधीर, रजत और राहुल आप से बढ़िया करते हैं पर उन्हें गालियां मिलती हैं और आपको दुआयें। इनकी क़दर कीजिये। इन के स्वाभिमान और यकीन को डगमगाने ना दीजिये… आपसे इन सवालों के जवाब चाहिये.. आपका एक प्रशंसक होने के नाते….
हां बरखा और अनिर्बान से कोई शिकायत नहीं क्यों हम उन्हें फक़त पढ़ते हैं और आप को दिल में रखते हैं…  शायद ये दिल की आवाज़ आप तक पहुंचे और आप इसे समझें…….
मुआफी के साथ सवालों के जवाब का इंतज़ार रहेगा..
 मेहंदी हसन एैनी कासमी के निजी विचार हैं। ये खत उन्होंने ही लिखा है।
इस नंबर पर 09565799937 आप उनसे संपर्क कर सकते हैं।
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