विडियो देखे : RSS की वजह भारत विश्व का सबसे घटिया दर्जे का देश बनने की कगार पर खड़ा है !

 

आरएसएस के हिन्दु (ब्राह्मण धर्म) ने बोए बीज बबूल के तो अब आम कहाँ से होय! क्रिया की प्रतिक्रिया जरूर होती है यह भौतिक अवस्थाओं में तो ठीक लगती है लेकिन मानवता के मुद्दों पर क्रिया की प्रतिक्रिया होने लगे तो हालात भयावह हो जाते है।

मैं हमेशा से कहती आई हूँ कि तमाम तरह के धर्म अब मानवता के दुश्मन बन चुके है। परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि कौनसा हथियार किस प्रवृति के आदमी के हाथ मे है।

मोहम्मद पैगम्बर के हाथ मे भी तलवार थी लेकिन वो तलवार शांति का संदेश देती थी लेकिन जैसे ही उनके हाथ से तलवार उनके अनुयायियों के हाथों में आई तो उसी तलवार को हथियाने के लिए खून की प्यासी हजारों अन्य तलवारें लहराई जाने लगी! सैंकड़ों गुटों में बंटकर पूरे मध्य एशिया को बर्बादी के मंजर में धकेल दिया।आज अफगानिस्तान, पाकिस्तान में रोज चरमपंथियों द्वारा मानवता का कत्ल किया जा रहा है।

यूरोप के लोग तेल की लूट में शामिल होने के लिए ईसाई धर्म की मिशनरीज को आगे भेजकर पीछे-पीछे गए! अमेरिकी राष्ट्रपति ने येरुशलम को इजरायल की राजधानी यूँ ही नहीं बताया है! येरूसलम को लेकर जो धर्मयुध्द हुए थे उनको दुबारा जिंदा किया जा रहा है! धर्म के नाम पर फिर से मानवता की हत्या का षड्यंत्र रचा जा रहा है और भूख सिर्फ और सिर्फ सर्व शक्तिमान दिखने की व पूंजी लूटने की है। जो खुद अपने आप को नहीं बचा पाया उसके अनुयायी दावा तो दुनियाँ को बचाने का कर रहे है लेकिन सबसे ज्यादा खून-खराबा प्रभु यीशु के इन्हीं अनुयायियों ने किया है!

भारत की हालत भी ज्यादा जुदा नहीं रही है! वर्ण भेद के आधार पर जन्म से ही नीच घोषित करने वाले ब्राह्मण धर्म (हिंदुत्व) की कार्यशैली भी मानवता को कमजोर करने वाली रही है। ब्राह्मण धर्म के अन्याय व अत्याचारों से पीड़ित प्रजा ने बगावत कर बौद्ध परंपरा अपना ली तो पुष्यमित्र शुंग द्वारा गद्दारी व नमक हरामी से सत्ता हथियाने के बाद बौद्धों पर अत्याचारों का अनवरत सिलसिला चल पड़ा था।

जब भी ब्राह्मण धर्म कमजोर हुआ तो इस देश मे शांति रही और जब भी ब्राह्मण धर्म मजबूत हुआ बहुसंख्यक जनता पर अमानवीय जुल्म ढहाए गये थे। इतिहास इनके अत्याचारों की कथाओं से भरा पड़ा है। तेल की कड़ाईयों में बौद्धों को जिंदा डालकर मारा गया था। दलितों को कभी इंसान ही नहीं माना गया था। आज इनके 33 करोड़ देवता धर्म बचाने में नाकाम (विफल) हो गए लेकिन विचित्र बात देखो कि एक अम्बेडकर का लिखा ग्रंथ इस देश को चला रहा है। यह इन लोगों को फूटी कौड़ी नहीं सुहाता है।

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