अभिजीत सिंह का ब्लॉग: पढ़िये जमात-अहमदिया, खालिस्तान और आर्य समाज की सच्चाई…

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ब्लॉग : ( अभिजीत सिंह ) – आपमें से किसी को जमात-अहमदिया की किसी मज़लिस में जाने अथवा उनके साहित्य पढ़ने का अवसर मिला है या नहीं मुझे नहीं मालूम पर अगर आप इस्लाम से बहिष्कृत इस फिरके को जानने लगेंगे तो पता चलेगा कि ‘बौद्धिक जिहाद’ तलवार वाले जिहाद से कहीं अधिक खतरनाक होता है।

ये बात सच है कि जमात अहमदिया वाले कभी तलवार लेकर नहीं निकले पर इनकी बौद्धिक तलवारों ने भारत को बहुत गहरे जख्म दियें हैं जिसका दर्द न जाने समय तक हमको महसूस होता रहेगा। पाकिस्तान नाम के विषवृक्ष को जमात-अहमदिया वालों ने ही खाद-पानी दिया था इस तथ्य के ऊपर तो कई बार लिख चुका हूँ, आज इनकी एक करतूत और अपराध और बता रहा हूँ।

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जमात-अहमदिया के संस्थापक “मिर्ज़ा गुलाम अहमद कादियानी” ने खुद को पहले नबी घोषित किया फिर कहा कि हिन्दू और बौद्ध ग्रंथों में वर्णित कल्कि अवतार और अमिताभ मैत्रेय भी मैं ही हूँ। हौसला बढ़ा तो आगे जाकर ये भी कह दिया कि जिस जीसस के दुबारा आने की बात बाईबल में है वो भी मैं ही हूँ। खुद को नबी, अवतार बताने के दावे करने वाले तो कुकुरमुत्ते की तरह रोज़ पैदा होते रहतें हैं इसलिये चिंता इस बात से नहीं है पर मिर्ज़ा गुलाम अहमद की हरकत यहीं पर नहीं रुकी! अपनी किताब ‘सतवचन’ में उन्होंने लिख दिया कि सिख पंथ प्रवर्तक गुरु नानक देव एक सच्चे मुसलमान थे और उनकी गुरुग्रन्थ साहिब और कुछ नहीं बल्कि कुरान-शरीफ की ही व्याख्या है। अपने इस दावे को मिर्ज़ा गुलाम अहमद ने पूरे पंजाब में फैला दिया। मिर्ज़ा गुलाम अहमद के दावों से पंजाब का सिख समाज और विशेषकर फौजी सिख बड़े परेशान हो गये। वो सबके सब इस बात से चिंतित थे कि अगर हमारे प्रवर्तक गुरु ही मुसलमान थे तो फिर हम सब सिख भी मुसलमान ही हुए।

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इसी उहापोह में वहां सिख समाज के कुछ लोग आर्य समाज के पास गये कि गुरु नानक देव जी के बारे में जो सत्य है उसे उद्घाटित करिये! आर्य समाज ने पंडित लेखराम (आर्यसमाज में पण्डितजी का स्थान बहुत ऊँचा है | धर्मरक्षा के लिए इस्लाम के नाम पर एक मिर्जाई की छूरी से वीरगति पाने वाली प्रथम विभूति पं. लेखराम ही थे) से कहा कि वो फिरोजपुर शहर में एक सार्वजनिक सभा आयोजित करें और वहां गुरु नानकदेव जी के बारे में जो सत्य है उसे उद्घाटित करें। रात में एक बड़ी सार्वजनिक सभा हुई और सरस्वती पुत्र आर्य समाजी पंडित लेखराम ने गुरू नानक देव जी को हिन्दू साबित करने के लिये प्रमाणों की झड़ी लगा दी, वो कई घंटे तक बोलते रहे और मिर्ज़ा गुलाम अहमद के बकवासों की धज्जियाँ उड़ा कर रख दी। डावांडोल मन के साथ जी रहा अपना सिख समाज आनंदित हो उठा, सबके मन से ये संशय दूर हो गया कि बाबा गुरु नानक देव मुसलमान थे। जब पंडित लेखराम भाषण देकर नीचे उतरे तो सिख फौजियों में उन्हें कंधे पर उठाने के लिये हंगामा बरपा हो गया। सारी रात उनके नाम के जय-जयकारे लगते रहे।

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उस समय तो पंडित लेखराम थे जिन्होंने अलगाववादियों के दुष्प्रचार से हमारे सिख समाज को बचा लिया था पर उनके बाद इस काम को करने का बीड़ा उठाने वाला कोई था नहीं इसलिये सिख समाज फिर इस षड्यंत्र में फँस गया, जिसके नतीजे में खालिस्तान नाम का जिन्न वजूद में आया।

धर्मवीर पं.लेखराम की महानता का वर्णन करने में लेखनी असमर्थ है | स्वामी श्रद्धानंद जैसे नेता उनका अदब मानते थे |

आपको कई बार ताज्जुब होता होगा कि सिख गुरुओं पर हुए इतने भीषण अत्याचारों को और विभाजन के समय अपने साथ हुई क्रूरताओं को भूल कर कुछ सिख खालिस्तान जैसी अलगाववादी सोच कैसे रख सकतें हैं तो इसके मूल में अहमदियों का गुरु नानक देव जी के बारे में किया गया दुष्प्रचार है।

अहमदियों के दुष्प्रचार ने कुछ सिखों को ये समझा दिया था कि तुम और तुम्हारे गुरु तो इस्लाम के ज्यादा करीब थे और ये हिन्दू तो गंदे लोग हैं जिन्होंनें तुम्हारे पवित्र पंजाब और अमृतसर पर कब्ज़ा किया हुआ है, इनसे छुटकारा चाहिये तो अलग खालिस्तान बनाओ हम यानि पाकिस्तान तुम्हारे साथ हैं। अहमदी तो खैर पाकिस्तान की तलपट से गायब हो गये पर उनका फार्मूला आईएसआई ने हाथों-हाथ लिया और भारत को भिंडरावाले जैसे कई ज़ख्म दिये।

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समस्या की मूल वजह पता न हो। खालिस्तान समस्या के मूल में अहमदियत और उसके प्रवर्तक की वो किताब है जिसने कुछ सिखों को अलगाववाद सिखाया। इस चुनाव में मफ़लर वाले ने पंजाब में इसी विचार को हवा दी थी, भगवान न करे कि पंजाब में इनको सफलता मिले वर्ना हिन्दू विरोध की यात्रा पहले भारत विरोध फिर पूर्ण अलगाववाद पर ही जाकर रुकेगी।

हाँ, पंजाब को बचाने में आर्य समाजी पंडित लेखराम का स्मरण संजीवनी साबित हो सकती है अगर कोई हनुमान बने तो।

Note : पंडित लेखराम का सम्पूर्ण जीवन की कुछ जानकारी पढ़ने के लिया यहाँ Click करिए…. 

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