विडियो: काफिर हिंदुओं को सोचना है! कि वह कब तक टॉइलेट और कंडोम बने रहेंगे ?

Anand Rajadhyaksha( यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम ) – इस्लाम की ढाल काफिर होता है … व काफिर इस्लाम का कंडोंम होता है…… समझिये कैसे…. सैफुल इस्लाम (सैफ उल इस्लाम), सैफुद्दीन (सैफ उद दीन) ये नाम तो आप ने सुने होंगे। दीन का अर्थ भी इस्लाम ही है और सैफ का अर्थ है तलवार।

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आप को यह तो पता ही है कि केवल तलवार से लड़ा नहीं जाता, तलवार के साथ ढाल अनिवार्य है और ढाल टूटनेपर तलवारबाज काफी कमजोर भी पड़ता है। ढाल को सिपर कहा जाता है लेकिन मैंने आज तक कोई सिपरुद्दीन या सिपरुल इस्लाम नहीं सुना। स्लीपरुद्दीन (Sleeper उद दीन) मिलेंगे, लेकिन उनकी चर्चा अन्य पोस्ट में करेंगे।

मतलब मुसलमान केवल तलवार होने में ही मानता है, ढाल होने में नहीं मानता! और अगर बिना ढाल के तलवार कमजोर, तो ढाल का क्या करता होगा ?सिंपल बात है, वो काफिर को अपनी ढाल बनाता है। इस्लाम की कोई किताब में यह नुस्खा नहीं बताया गया लेकिन इस्लाम का इतिहास देखिये, मेरी बात सिद्ध हो जायेगी। आज भी मुसलमान वही करते पाया जाता है।

जरा ढाल क्या होती है समझिये….. ढाल से क्या होता है जानिये…..
ढाल पर विरोधी का वार झेलकर खुद को बचाया जाता है। ढाल वार झेल झेलकर टूट जाती है तो उसे replace किया जाता है और तो और, ढाल से प्रहार भी किया जाता है।

इस्लाम में काफिर का अर्थ इस्लाम के आदर्श मौलवी से सुनिए 

इतिहास इसका गवाह है की मुसलमान शासकों ने हमेशा हिन्दुओं से लड़ने के लिए हिन्दुओं का इस्तेमाल किया। मानसिंह को राणा जी के खिलाफ, शिवाजी महाराज के खिलाफ मिर्ज़ा राजा जयसिंह, आसाम में जय सिंह के पुत्र राम सिंह को भेजा।गोकुला जाट को जो मुग़ल सेना पकड़ लाई उसका सहसेनापति ब्रह्मदेव सिसोदिया तो महाराणा के खानदान से था (सीधा वंशज नहीं)। ढाल और ढाल से प्रहार के ये सर्वज्ञात उदाहरण हैं, इतिहास खंगालने निकले तो और भी निकलेंगे।

आगे पढ़े: नाकाम हुई ढाल कहाँ फेंकी जाती है

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