रूपये रद्द कर हम को करवायेंगे नंगा तो यकीन मानो हम मुल्क में करवायेंगे दंगा – सुप्रीम कोर्ट

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united hindi – ठाकुर साहब को नोट के लिए लाइन में लगी जनता की बड़ी फिक्र है! मि-लॉर्ड अदालतों में लगी लंबी लाइनों का क्या? इस पर भी नजर डालिए, या फिर क्यों न माना जाए कि #DeMonetization से इंसाफ के धंधे में भी मंदी आ गयी है?pending

सर्वोच्च अदालत के प्रधान को तनिक इस ओर भी सज्ञान लेना चाहिए कि पता नही कितने लोग अदालतों से न्याय में विलम्ब के कारण आत्म हत्या तक कर लेते हैं। अतः सर्वप्रथम भारत के प्रधान न्यायाधीश को अदालतों मे विलम्बित पड़े केशों पर संज्ञान लेने की आवश्यकता है,न कि एटीएम पर लगी लाइनों की। मी-लॉर्ड ATM की लाइन, अदालतों में लगी लाइन से काफी छोटी है! आईना सामने रखें, फिर बयान दें!

Supreme Court में पेंडिंग केसों की संख्या- – 61,436

High Courts में पेंडिंग केसों की संख्या- – 38,91,076

Lower Courts में पेंडिंग केसों की संख्या- 2,30,79,723

1) मी-लॉर्ड ATM की लाइन आपके सभी अदालतों में लगी लाइन से कम ही है!

2) बैंकों में लोग लाइन से तो आते हैं, आपके यहां सलमान खान जैसों के लिए तो कोई लाइन का नियम ही नहीं है?

3) बैंक सबके लिए समान समय पर खुलते और बंद होते हैं, आपके यहां तो आतंकवादी याकूब मेनन के लिए रात दो बजे सुप्रिम कोर्ट खुल जाता है?

जज ने कहा “दंगे हो जायेंगे ! जबकि “दंगे हो जाते नहीं, दंगा कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है कि बिना किसी से करवाए हो जाए! दंगे करवाए जाते हैं, लोग करते हैं और उनके उद्देश्य होते हैं, दंगे करने के लिएसोची समझी कृति है दंगा! इसलिए जो दंगे ‘हो जाने’ की आगाहियाँ करते हैं उन्हें यह बता देना चाहिए कि दंगे हो जाते नहीं, करवाए जाते हैं। कौन करेगा दंगे ? अगर आप सीना ठोंक कर कह रहे हैं कि दंगे होंगे, तो आप को यह भी पता ही होगा कि दंगे करवाने – करने वाले कौन होंगे! जरा बताइये कौन करनेवाले हैं दंगे ताकि पुलिस अग्रिम कारवाई कर सके। आप एक प्रतिष्ठित और जिम्मेदार नागरिक हैं, पुलिस की मदद करना आप का फर्ज है। बताइए कौन दंगा करनेवाला है?

लगता है हम मीडिया वालों से कुछ ज्यादा ही अपेक्षा कर रहे हैं। वे बेचारे मालिक की मर्जी संभालकर नौकरी बचाए या असली पत्रकारिता करें? घर तो नौकरी से चलता है जी, पत्रकारिता के बारे में फिर कभी सोचेंगे, ठीक ?

कोई नहीं, लेकिन हमें तो पता होना चाहिए, दंगे हो जाते नहीं, करवाए जाते हैं।

और हाँ, दंगे होने के बाद उनको लेकर मुक़दमें दायर हो जाते हैं। मुकदमे का उद्देश्य यही होता है कि सच साबित किया जाए। याने अगर पॉलिटिकली दिक्कत न हो या फायदा हो तो दंगे किसने और क्यों करवाए यही साबित करना कोर्ट का काम होता है ?

ऐसे में “दंगे हो जायेंगे” सुनकर …. आश्चर्य तो नहीं, … खैर, जाने दीजिये….

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