भाईयों और बहनों, क्या मैं चाइनीज प्रोडक्ट हूँ की मेरा यूज करके थ्रो कर दिया?

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ब्लॉग: सिद्धार्थ भदोरीया (यूनाइटेड हिन्दी) – मेरे एक पाठक ने पूछा था की…. आपके ब्लॉग में पढ़ा था.. 18 वीं शती में अंग्रेजों द्वारा संवर्धित इस्लाम का कट्टर स्वरुप ! इस विषय में और जानकारी मिल सकती है.. ? उसके पहले और बाद में.. क्या अंतर आ गया इस्लाम में.. ये भी समझा सकें तो..

जाकिर इज प्रोडक्ट इन माफिया
जाकिर इज प्रोडक्ट इन माफिया

संवर्धित नही, संस्करण । १८वीं सदी का इस्लामी संस्करण । संस्करण का मतलब होता है अच्छी तरह ठीक करना, दुरुस्त या शुद्ध करना। उस समय बेन्कर माफियाओं की कंपनी “इस्ट इन्डिया कंपनी” ने भारत पर कबजा कर लिया था । उन लुटेरों के सभी संस्करण ठीक करने के नही, बीगाड़ने के लिए ही होते है ।

क्या था उनका १८वीं सदी का इस्लामी संस्करण?
एक इरादा, एक सुनियोजित प्लान । जिसमें इस्लाम के कट्टरवाद का उपयोग हिन्दु लोगों के खिलाफ करना था । भारत में हिन्दु मुस्लिमो के दंगों की शुरुआत इसी प्लान का नतिजा था । देश का भारत पाक और बंगला देश में विभाजन हो जाना इसी प्लान का नतिजा है ।
बदशाहों के जमाने में भी हिन्दु मुस्लिमों के बीच दंगे नही होते थे । उस जमाने की मुस्लिम जनता जानती थी कि उनकी रगों में हिन्दु बाप दादा का खून बहता है, आखिर हम हिन्दु की औलाद है । सब भाईचारे के साथ रहते थे, हिन्दुत्व को काटती मिठी छुरियां सुफि जमात के कारण भी भाईचारा ही बढता था । हिन्दुओं को मारनेवाले मुस्लिम आम आदमी नही होते थे, हिन्दुओं को लूटनेवाले, हिन्दुओं के धर्म को छुडानेवाले कट्टरवादी बादशाहों के सैनिक होते थे, सामान्य मुस्लिम नही ।

भारत के राजा और बादशाह धनमाफियाओं की ‘कंपनी सरकार’ के अधिन हो गये थे, उनकी सेना भी किसी काम की ना रही । कंपनी सरकार की सेना बढती गयी । सेना में हिन्दु और मुस्लिम सभी थे । मात्र हिन्दुओं को टार्गेट करने के लिए बादशाहों की तरह सेना का उपयोग नही हो सकता था । मुस्लिम आम जनता का ही उपयोग करना था । मुस्लिमों में धार्मिक कट्टरता भरी जाने लगी, हिन्दुओं के विरुध्ध जहर उगलनेवाले प्यादों की फौज खडी कर दी । उसके परिणाम स्वरूप ही हिन्दु-मुस्लिम जनता आमने सामने आ गयी और सिधे ही आम जनता के बीच टकराव शुरु हो गये । ये जनरल बात है, अन्य कारणो से अपवाद हुए होन्गे ।

इसी संस्करण के फलस्वरूप हिन्दुओं में नास्तिकवाद फैला, नास्तिकवाद पर साम्यवाद सवार हो गया । आजादी से पहले कलकत्ता नगर पालिका में उंचे पद पर बिराजमान सुभाष बोज नाम के एक नास्तिक ने हिन्दुओं की आस्था पर प्रहार किया । हिन्दु मंदिरों पर सरकारी कबजे की शुरुआत कर दी । कलकता का एक बडा शिवमंदिर अंग्रेज सरकार के हवाले कर दिया ।

ईस्ट से आये सुभाष ने वेस्ट से आये गांधी से दोस्ती कर ली, कुछ बडा करने का ईरादा था । इस्लामी संस्करण को आगे बढाते हुए तय किया गया की राष्ट्र के निर्माण में हमे मुस्लिम जनता को साथ में रखना पडेगा, और उसके लिए हिन्दु जनता को ही सहना होगा, हिन्दु जनता को ही बलिदान देने होन्गे । अपने हित छोडने हैं तो हिन्दु जनता को, धन खोना है तो हिन्दुओं को, जाना भी देनी है तो हिन्दुओं को ।
सुभाष को तो आगे मौका नही मिला लेकिन नास्तिक गांधी ने पूरी इमानदारी से अपने आकाओं की इच्छाओ का मान रखते हुए, हिन्दुओं को पिडा देते हुए, अपना फर्ज निभाया और भारत को नास्तिक (धर्म निरपेक्ष) देश बना दिया ।

गांधी के मानसपुत्रों ने इस्लामी संस्करण जारी रख्खा और आजादी से आज तक हिन्दु मुस्लिमों को लडाते रहे और उनके आकाओं के प्रतिनिधि बन के भारत पर राज करते रहे ।

मुस्लिम देशों पर कबजा पाने के लिए बेन्कर मफियाओं ने इस्लामी संस्करण में बहुत बडा बदलाव किया । खलिफाओं का बहुत बडा खलिफा (ओट्टोमेन) साम्राज्य ख़त्म करने के बाद भी उनके हाथ कुछ नही लगा था, छोटे बडे मुस्लिम देशों में बंट गया था, जीन पर अब भी मुस्लिम ही शासन कर रहे थे । इस्लामी कट्टरवाद से ही आम मुस्लिमों को मारने, उन शासकों को हराने का प्लान बनया गया । अमरिकी प्रमुख रोनाल्ड रेगन ने १९८२ योजना बनाई । सीआईए के प्रमुख सिनियर बूश ने योजना सफल की । वो योजना थी इस्लामी आतंकवाद की ।

बेन्कर माफियाओं के इस आतंकी योजनाओं का उन्हे बहुत बडा फायदा हुआ । मुस्लिम जगत के असली शासकों को आतंकियों और आतंकियों के बाप अमरिका द्वारा खतम करवा दिया, बचे हुए को अपने चरणो में जुकाकर अपना प्यादा बना लिया ।

आतंकियों से जगत की जनता डर गयी, जगत के देशों में राज कर रहे उनके प्यादे आतंकवाद का नाम भूनाकर अपनी अपनी प्रजा को गुलाम बनाने के नियम कानून बनाती रही और जनता खूशी खूशी सब कुछ स्विकारती रही ।

खून के प्यासे दरिंदो ने जगत के असली शासकों को खतम कर दिया, नागरिकों अपना गुलाम बना लिया । एक अध्याय खतम, बात खतम, दुसरा अध्याय मेरा अनुमान है, सहमत होना जरूरी नही ।

अब लगता है दुसरा अध्याय, दुसरा कोइ संस्करण शुरु हुआ है । अमरिका का अपने ही प्यादे बगदादी पर स्ट्राईक, भारत की पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राईक, जाकिर नायक पर हो रही स्ट्राईक संकेत दे रहे हैं कि इस्लामी संस्करण की अब जरूरत नही । क्यों कि जाकिर के साथ आज कोइ नही खडा है । जकिर के पक्ष में कहीं से भी चूं या चां की आवाज नही निकली है । मुल्ले शांत, मुस्लिम की पक्षधर सभी पार्टी शांत, वामपंथी शांत, धर्मनिर्पेक्ष बुध्धि के बारदान शांत, जेएनयु में इस्लाम बाबत वेकेशन । जाकिर सोच रहा होगा कि ये क्या हो रहा है? मेरा युज किया और मुझे ही थ्रो कर दिया? लाहोर गया कुवैत!! मात्र अल्लाह से डरनेवाले नोटबंदी से ही डर गये ये पूरा सच तो नही हो सकता? लेकिन कुछ तो है । और वो ‘कुछ’ ही शैतान बेन्कर माफियाओं के नये संस्करण का अंडा है और वो जल्दी से फुट जायेगा ।

 (लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं , एवं यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम स्‍वागत करता है। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया  unitedhindiweb@gmail.com पर भेज सकते हैं। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें। अगर आप भी भारत के लिए ब्‍लॉग लिखने के इच्छुक लेखक है तो भी आपका यूनाइटेड हिन्दी पर स्वागत है।)

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