ब्लॉग- फर्जी एनकाउंटर ही था तो ऐसा क्यों है कि हिन्दू खुश है और मुसलमान दुखी हैं ?

ब्लॉग : संजय कुमार  (यूनाइटेड हिन्दी) – अगर ये फर्जी एनकाउंटर ही था तो ऐसा क्यों है कि हिन्दू खुश है और मुसलमान दुखी हैं? हिन्दू ये सोच रहे हैं कि चाहे वो एनकाउंटर परिस्थितिवश हुआ हो या जानबूझकर……. लेकिन आख़िरकार वो आतंकवादी ही थे, मर गए तो क्या हुआ.. ? sanjay-ka-blog

आपको किसी आदमी का सिग्नेचर (हस्ताक्षर) चाहिए… अब वो आदमी दाएं हाथ से सिग्नेचर करे या बाएं हाथ से… उससे आपको क्या समस्या है.. बहुत लोग बाएं हाथ से लिखते हैं… आपको सिग्नेचर से मतलब है.. वो डॉटेड पेन से लिखे या स्याही वाले पेन से… अब आतंकवादी था मर गया, आखिर देश के दुश्मन था, कई हत्याओं का मुजरिम था… उससे क्या सहानुभूति ? कल होकर वो बम फोड़ता तो मेरा ही कोई मरता… अब फांसी के इंतेजार में तो था ही.. चलो इस तरह मर गया।

लेकिन एक मुस्लमान ऐसा नहीं सोचता है… आतंकवादी था तो क्या.. मेरा मजहबी भाई था… वो रेपिस्ट था, सैकड़ों हत्याओं का दोषी था तो भी क्या हुआ.. मेरा भाई था क्योंकि वो मुस्लमान था। एक मुस्लिम अगर दूसरे मुस्लिम को मार दे तो कोई बात नहीं लेकिन अगर दूसरे धर्म का आदमी (भले वो पुलिस हो या सेना) मुस्लिम को मार दे तो फिर वो इस्लाम पर हमले की गिनती में आ जाता है, फिर वो मुस्लिम पर अत्याचार है, फिर तो बवाल होना ही है। ख़िलजी द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय को जलाने से लेकर अलगाववादियों द्वारा कश्मीर घाटी में स्कूलों को जलाने तक, हमें ये बताता है कि इस्लाम में शिक्षा का क्या महत्व है। इस मानसिकता को दूर करना संभव नहीं है, वैसी मानसिकता जिस मस्तिष्क में है… उसको उड़ा देना ही इलाज है… ना मस्तिष्क रहेगा ना मानसिकता।

आतंकियों के हिमायती कश्मीर के हालातों से सबक क्यों नहीं लेते? भोपाल की घटना पर क्यों उठाए जा रहे हैं सवाल?
1 नवंबर को एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल की सेंट्रल जेल के उस हैड कांस्टेबल रमाशंकर चादव के परिजनों से मुलाकात की, जिसे 31 अक्टूबर को जेल के अंदर ही मौत के घाट उतार दिया था। आतंकी वारदातों में लिप्त सिमी के 8 कैदी जेल तोड़ कर भाग निकले थे। भोपाल पुलिस ने अचारपुरा के जंगलों में मुठभेड़ के दौरान आठों आतंकियों को मार गिराया। कांग्रेस, लेफ्ट, आप, राजद आदि राजनीतिक दलों के नेता अब आतंकियों की मुठभेड़ पर सवाल उठा रहे हैं। सीएम चौहान ने हैड कांस्टेबल के परिजनों से मिलने के बाद कहा कि देश की राजनीति इतनी घटिया हो गई है कि देश के लिए जान गंवाने वालों की चिंता नहीं होती, बल्कि देश को नुकसान पहुंचाने वालों की हिमायत की जाती है। यादव की बेटी का विवाह इसी माह होने वाला है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस बेटी के दिल पर क्या बीत रही होगी। जो लोग दो-दो बार जेल प्रहरियों की हत्या कर, जेल तोड़ कर भाग रहे हैं, उनके एनकाउंटर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि ऐसे आतंकी एमपी या देश के अन्य किसी हिस्से में वारदात कर देते तो कौन जिम्मेदार होता?

कश्मीर के हालात
जो लोग मुस्लिम आतंकियों की हिमायत कर रहे हैं, उन्हें कश्मीर के हालातों से सबक लेना चाहिए। सही है कि कश्मीर के अधिकांश मुसलमान शांति चाहते हैं व कश्मीर के युवा रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है, लेकिन अलगाववादियों और आतंकियों की डर की वजह से परेशान मुसलमान खामोश है। आज 3 महीने से ज्यादा का समय हो गया, कश्मीर में हालात बद से बदतर है। आतंकियों और अलगाववादियों की हिमायत करने का नतीजा ही रहा कि पहले कश्मीर से हिन्दुओं को पीट-पीट कर भगा दिया गया, उसके बाद केन्द्र सरकार के शिक्षण संस्थानों में पढऩे वाले गैर मुसलमान विद्यार्थियों को स्कूल-कॉलेज छोडऩे के लिए मजबूर किया गया।

इतना ही नहीं अब तो कश्मीर में लगभग सरकारी स्कूलों को जलाया भी जा चुका हैं। कश्मीर के बच्चे खासकर लड़कियां स्कूलों की सुरक्षा के लिए गुहार लगा रही है, जो लोग मुस्लिम आतंकियों के हिमायती बने हुए हैं, उन्हें यह बताना चाहिए कि कश्मीर के हालातों का कौन जिम्मेदार है?

ऐसा न हो जिस तरह आतंकियों और अलगाववादियों ने कश्मीर के हालात बनाए है, वैसे हालात देशभर में न हो जाए। बार-बार यह दावा किया जाता है कि आतंकियों को कोई धर्म नहीं होता। सवाल उठता है कि फिर कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह भोपाल की घटना को धर्म विशेष से क्यों जोड़ रहे हैं? दिग्विजय सिंह, लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव, अरविंद केजरीवाल, वृंदा करात, ममता बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं को ये समझना चाहिए कि अब इस देश में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सूफीवाद से ही अमन चैन कायम हो सकता है। यदि कट्टरपंथियों को शह दी जाती रही तो फिर देश की एकता और अखंडता खतरे में पड़ जाएगी।

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