वियग्रा से भी 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली कौंच के बीज – Mardana Shakti kaunch seeds sey

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कपिकच्छू/कौंच/केवांछ (Cowhage) :

कपिकच्छुभृंश वृष्या मधुरा बृंहणी गुरुः।
तिक्ता वातहरी बल्या कफपिस्रानाशिनी।।
तद्विजं वातशमन स्मृतं वाजीकरं परम्।। भा. प्र.।।

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कपिकच्छू/कौंच/केवांछ (Cowhage) : सामान्य नाम

कौंच को कपिकच्छू और कैवांच वगैरह नामों से भी जाना जाता है. आयुर्वेद में इसे यौन कूवत बढ़ाने वाली दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. सेक्स कूवत बढ़ाने के लिए इस के बीज बेहद कारगर होते हैं. कौंच का इस्तेमाल मर्दों व औरतों की हमबिस्तरी की ख्वाहिश में इजाफा करता है. यह नपुंसकता दूर करने में मदद करती है।

रासायनिक संगठन : इसमें राल, टेनिन,वसा एवम मैगनीज रहता है।

गुण : गुरु ,स्निग्ध।
रस : मधुर , तिक्त।
वीर्य : उष्ण ।
विपाक : मधुर ।

कपिकच्छू/कौंच/केवांछ का विभिन्न रोगों में प्रयोग :

1. कौंच के बीज पोस्टिक उत्तेजक वाजीकरण एवं वातशामक होते हैं केंचुए को निकालने के लिए इसके रोमो को वृत मधु या गुड़ के साथ गोली बनाकर खिलाते है। इसके पश्चात विरेचक औषधि अवश्य देते हैं जिससे केंचुए निकल जाते है।

2. केवांच के पत्ते को कालीमिर्च के साथ पीसकर पिलाने से उदर कृमि नष्ट होते है। धातु पुष्टि के लिए बीज चोरों ने तालमखाने के चूर्ण को मिश्री मिलाकर ताजे दूध के साथ देते हैं इसकी जड़ों को मुख में रखकर चूसने से शीघ्रपतन नहीं होता हैं। बीज चूर्ण व गोक्षुर चूर्ण दोनों समान भाग लेकर ठंड के साथ मिलाकर दूध से लेने से यह है धातु पुष्ट करता हैं।

3. तीव्र ज्वर में मूल चूर्ण को शहद यहां गर्म जल से देने से दाह शांत होता है एवं ज्वार कम होता है। इसके जड़ का स्वरस या क्वाथ स्नायु दौर्बल्य अंगघात ,अर्दित आदि वात रोग में लाभ करता है।

4. कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा शीघ्रपतन के देसी इलाज के लिए कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। फिर एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसे रोग दूर हो जाते हैं।

कपिकच्छू/कौंच/केवांछ का उपयोगी भाग (प्रयोज्य अंग) : बीज, मूल एवं पत्र ।
बीज चूर्ण सेवन मात्रा : 2 से 6 ग्राम तथा रोम 250 मि. ग्राम की मात्रा में। मूल क्वाथ 5 से 10 तोला ।
आयुर्वेदीक स्टोर पर उपलब्ध विशिष्ठ योग : वानरी गुटिका, माषवलादि पाचन आदि ।

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