मोदी सरकार ने किया अडानी के NGO का लाइसेंस रद्द, अम्बानी पर 10 हजार करोड़ का जुर्माना

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नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बेहद करीबी माने जाने वाले दो गुजराती उद्योगपतियों अंबानी और अडानी को सरकार ने बड़ा झटका दिया है। गौरतलब है कि दोनों उद्योगपतियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत करीबी माना जाता है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री रिलायंस की जियो के एड में मॉडलिंग करते नजर आए थे। साथ ही पीएम चुनाव प्रचार के दौरान अडानीका हेलीकॉप्टर यूज करते रहे हैं। सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्री पर ओएनजीसी के ब्लॉक से गैस चोरी करने पर जुर्माना लगाया है। इस मामले में रिलायंस इंडस्ट्री को 10 हजार करोड़ का मुवावजा भरने को कहा है। वहीँ गौतम अडानी के एनजीओ का रजिस्ट्रशन रिन्यू करने से सरकार ने इनकार कर दिया है।

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केंद्र सरकार ने एफसीआरए एक्ट का उल्लंघन करने वाले 25 एनजीओ के लाइसेंस रिन्यू करने से इंकार किया है। इन 25 एनजीओ में कई बड़े उद्योगपतियों और राजनीतिक लोगों के एनजीओ भी हैं। इनमें अडानी फाउंडेशन, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर ऑफ़ आर्ट, ऑक्सफ़ैम इंडिया ट्रस्ट, संजय गाँधी मेमोरियल ट्रस्ट शामिल हैं। इससे पहले सरकार ने 11319 एनजीओ का लाइसेंस रद्द कर दिया था। इन एनजीओ पर आरोप था कि ये राष्ट्रहित के विपरीत काम कर रहे थे। हालांकि सरकार ने पहले इन एनजीओ का नाम सार्वजानिक करने से इंकार कर दिया था। केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने उन 11,319 संगठनों का पंजीकरण रद्द कर दिया है जिन्होंने इस साल 30 जून तक एफसीआरए के तहत पंजीकरण के नवीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था। ‘उनके पंजीकरण की वैधता एक नवंबर, 2016 से समाप्त मानी जाएगी।’

मोदी सरकार ने पिछले सात सालों से केजी बेसिन में रिलायंस और उसकी सहयोगी कंपनियों की दखलंदाजी के लिए 1.55 बिलियन डॉलर (लगभग 10311.76 करोड़ रूपये) की माँग की है। इस बेसिन में तेल निकालने का हक़ राज्य के अधीन काम करने वाली कंपनी ओएनजीसी का है। इसमें रिलायंस और उसकी सहयोगी कंपनियों ने दखलंदाजी की है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिलायंस समूह के पास 1.55 बिलियन डॉलर मुआवजे के लिए नोटिस भेजा है। जस्टिस ए.पी. साह की समिति ने पेट्रोलियम मंत्रालय को इस मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा गया है कि रिलायंस इंडस्ट्री बंगाल के केजी बेसिन में ओएनजीसी के पास ही प्राकृतिक गैस निकालने का काम कर रही है, इसके एवज में उसे सरकार को पैसे देने चाहिए। इसी रिपोर्ट में एक सदस्य ने कहा है कि, ओएनजीसी से निकालकर गैस अपनी जगह ले जाने के लिए मुकेश अम्बानी को सरकार को पैसे देने चाहिए।

ओएनजीसी नहीं बल्कि सरकार को मिलना चाहिए मुआवजा 
ओएनजीसी से गैस निकालकर अपने फायदे के लिए रिलायंस समूह उसे बेचती है जो अन्यायपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रिलायंस समूह की भूमि ओएनजीसी के क्षेत्र में पड़ती है। 1 अप्रैल 2009 से लेकर 31 मार्च 2015 के बीच 11 अरब घन मीटर गैस प्रवाहित होती थी, जिसमे से केवल 9 अरब घन मीटर गैस रिलायंस समूह ने उत्पादित किया है। हालांकि समिति ने कहा है कि, मुआवजा सरकार को मिलना चाहिए ना कि ओएनजीसी को।

समिति ने कहा है कि रिलायंस ने अन्यायपूर्ण तरीके से लाभ कमाया है, इसके लिए उसे भारत सरकार को मुआवजा देना चाहिए ना कि ओएनजीसी को। ओएनजीसी को कोई अधिकार नहीं है कि कपटपूर्वक रिलायंस के ऊपर दावा करे और उससे पैसे की माँग करे।

कुल मिलाजुलाकर यह कहा जा सकता है कि इस बार मोदी सरकार पूरी तैयारी में है, अपने विरोधियों का मुँह बंद कराने के लिए। जो लोग सरकार के ऊपर यह इल्जाम लगाते थे कि यह सरकार उद्योगपतियों के कहने पर ही सारे काम करती है और उन्ही के इशारों में काम करती है। सरकार ने इतना बड़ा कदम उठाकर यह साबित कर दिया है कि, वह किसी के कहने पर नहीं बल्कि जनता के हित को ध्यान में रखकर काम करती है।

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