शेयर करके आप इस जानकारी को करोड़ो किसानों तक पहुँचा दीजिए : रवीश कुमार

मार्च के आख़िरी हफ्ते में जब यूपी चुनाव का नशा छाया था, तभी उड़ीसा की विधानसभा ने एक प्रस्ताव पास किया, जो देश के किसानों के लिए लड़ाई की उम्मीद बन सकता है।

उड़ीसा विधानसभा में कृषि मंत्री ने प्रस्ताव पेश किया कि धान की लागत के अनुपात में समर्थन मूल्य कम है। राज्य के आँकड़े के हिसाब से एक क्विंटल धान उगाने की लागत 2,343 रुपये आती है। इसलिए उन्हें 2500 रुपये प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना चाहिए। सदन में कांग्रेस के नेता विपक्ष ने कहा कि यह कम है, 3516 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए। अंत में सहमति बनी कि 2930 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य होना चाहिए। उस समय न्यूनतम समर्थन मूल्य था 1470 रुपये प्रति क्विंटल। इसमें बीजेडी, कांग्रेस, बीजेपी सब दल शामिल थे।

न्यूनतम समर्थन मूल्य केंद्र सरकार तय करती है इसलिए तय हुआ कि विधानसभा का सर्वसम्मति से पास किया हुआ प्रस्ताव प्रधानमंत्री को दिया जाएगा इसके लिए स्पीकर की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी। उसके आगे का समाचार गूगल से नहीं मिला।

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योगी योगी के शोर में यह ख़बर दब गई। मंदसौर आंदोलन के समय भी किसी को इसका ख़्याल नहीं आया। नवनिर्माण किसान संगठन के नेता अक्षय कुमार ने महीनों के अहिंसक आंदोलन से यह कामयाबी हासिल की थी। इस ख़बर को राजनीतिक दल से लेकर मीडिया तक इसलिए दबाते हैं ताकि राज्यों में किसान अपनी विधानसभा से प्रस्ताव पास कराने की मांग न करने लगे। आप इस सूचना को करोड़ो किसानों तक पहुँचा दीजिए।

कहिए कि उड़ीसा की सरकार मानती है कि एक क्विंटल धान की लागत 2344 है और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य 2930 रुपये प्रति क्विंटल मिलना चाहिए तो फिर क्यों नहीं मिल रहा । हमने आज के प्राइम टाइम में इस सूचना का इस्तमाल किया था।

Source : Ravish Kumar ji

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