बहिष्कार: कल से राजस्थान में भास्कर खरीदना व ईटीवी देखना किसानों का खून पीने के बराबर होगा…

*अपील* ✍✍✍ किसान भाईयों आज आप से एक महत्वपूर्ण अपील करने जा रही हूँ इसे गंभीरता से लें।

✍✍✍ *इस अपील से मेरा व्यक्तिगत नुकसान भी हो सकता है यह भी मैं मानती हूं लेकिन मैंने मेरा जीवन कौम व किसान वर्ग को समर्पित कर दिया इसलिये किसी भी नुकसान को मैं भुगतने के लिये तैयार हूं। यही कारण है कि किसान समाज से मैं वो पहली हुँ जो सार्वजनिक रूप से किसान वर्ग के लिये मीडिया व संघी मानसिकता से पंगा ले रही हुँ।*

✍✍✍ अपील यह है कि इस देश के किसानों की बर्बादी में जितनी भूमिका सरकारों की है उससे कहीं ज्यादा भूमिका मीडिया की है। लेकिन मीडिया कब किसको झुठा बदनाम कर दे इस बात से लोग डरते है इसलिये सरकार के खिलाफ तो हम लड़ाई लड़ लेते हैं लेकिन हमारी लड़ाई को कमजोर करने वाले मीडिया के खिलाफ हम लड़ाई करने से डरते हैं।अब हमें मीडिया से लड़ाई लड़ने के लिये भी तैयार रहना है और लड़ना भी है।

loading...

✍✍✍ *देश व प्रदेश में कई जगह किसान आंदोलन चल रहे है और 5-5 लाख किसान भाग ले रहे हैं लेकिन कोई भी मीडिया समूह उनकी बात को प्रमुखता से नहीं लिख रहा है और नहीं कोई इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दिखा रहा है। जबकि कई पाखण्डी बाबाओं की छोटी-छोटी कलश यात्राओं व भजन संध्यो की ब्रेकिंग न्यूज बना रहा है।*

✍✍✍ *पिछले वर्ष नागौर में चार से पांच लाख किसानों की रैली खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में हुई।नागौर के अलावा कोई मीडिया कवरेज नहीं।* इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में तो बिलकुल नहीं दिखाया। अभी जो कॉमरेड अमराराम जी के नेतृत्व में प्रदेश में किसान आंदोलन चल रहा है। *मेरी नजर में राजस्थान के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन है। मुख्यमंत्री की शव यात्रा दस किलोमीटर लंबी थी और पहली बार शव यात्रा में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया जिससे यह साबित होता है प्रदेश का किसान वास्तव में दुःखी है और आरपार की लड़ाई के मूड में है लेकिन किसी भी टी वी चैनल ने इस शव यात्रा को नहीं दिखाया और नहीं किसी प्रिंट मीडिया ने इसे राष्ट्रीय न्यूज बनाया। इसका मतलब मीडिया सरकार को बचाने में लगा है और किसान आंदोलन को दबाना चाहता है।*

अगले पृष्ठ को जरूर पढ़े 

Prev1 of 2Next
अगले पृष्ठ पर जाएँ

loading...