बहुत हो चूका ढिंढोरा, सेना के कंधे पर बैठकर राजनीति करना बंद करे सत्ताधारी पार्टीयां !

भारतीत सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर (पाक समझने की भूल ना करे, विभिन्न न्यूज चैनल उन्माद में इसे पाकिस्तान बता रहे है) में सर्जिकल स्ट्राइक किये गए। कई आतंकी ठिकानो को नष्ट किया गया और मीडिया चैनेलो के मुताबिक 38-40 आतंकियों को हमाने जबांज सैनिको ने मार गिराया। अलग अलग न्यूज वाले विभिन्न आंकड़े बता रहे हैं पर यहाँ मैंने कोई एक संख्या ले ली है। PoK में ये हमला उरी में हुए फिदायीन हमले का जवाब था। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद काफी कुछ हो रहा है जिसकी किसी को आशंका नही थी। सैन्य पराक्रम और सरकार के कुशल नेतृत्व के साथ भारत ने जरूर पाकिस्तान को सबक सिखाया है पर सेना का ये प्रयास एक ‘गुप्त मिशन’ था और इसे गुप्त ही रखना चाहिए था। पर सरकार के इस कदम का ढिंढोरा टेलीविज़न पर अभी तक पीटा जा रहा है और सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी सेना के इस बहादुरी का राजनैतिक लाभ लेने की पूरी कोशिश कर रही है। सरकार जहाँ खुद को शाबाशी देते नही थक रही वहीँ कुछ चैनल जो सत्ताधारी पक्ष के लिए काम करती जान पड़ती है, वो प्रधानमंत्री को ऊँचा दिखाने का हर संभव प्रयास कर रही है। सेना का ये दुरूपयोग हर कोने से शर्मनाक है। इस तरह के सर्जिकल स्ट्राइक पिछली सरकारों के कार्यकाल में भी कई बार हुए पर मोदी सरकार की तरह उन्होंने एक गुप्त मिशन का अत्यधिक प्रचार नही किया और ना ही कभी राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की।

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उरी आतंकी हमले में हमारे 19 सैनिक शहीद हो गए। ये भारत सरकार के दावों और चुनाव पूर्व किये गए वादों पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह था। पठानकोट हमला और अब इस उरी हमले ने सरकार को देशवाशियों के सामने घुटने पर ला दिया। पाकिस्तान को लाल आँखे दिखाने से लेकर एक सर के बदले 10 सर लाने की बात जुमले लगने लगे। पूरा देश एक स्वर में सरकार से अनुरोध कर रहा था कि उन्हें भाषण नही अब काम चाहिए। सोशल मीडिया और न्यूज चैनल पर घनघोर युद्ध चलने लगा। इसी बीच नरेंद्र मोदी ने केरल में एक भाषण दिया जिसमे उन्होंने कहा की पाकिस्तान और भारत गरीबी भुकमरी भृष्टाचार हटाने में युद्ध करे फिर देखे कौन जीतता है। उन्होंने पाकिस्तानी नागरिको से अपील की कि सरकार को इन सब मश्लो पर काम करने को बोले। इसी के साथ युद्ध की अटकलों पर विराम लग गया था। इसके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को अलग-थलग करने की बात की। लगा की अब भारत पाकिस्तान से विभिन्न तरह से लड़ना चाहता है। पर विपक्षी पार्टियों और सामाजिक तत्वो की ओर से लगातार होते आलोचनाएं और अपनी साख बचाने के लिए भारत सरकार ने सेना के द्वारा PoK के आतंकी ठीकनो को निशाना बनाया। सरकार के इस कदम का सभी ने जोरदार स्वागत किया। यहाँ तक की कांग्रेस की आलकमान ने भी राजनीती को अलग रख कर सरकार का पूरा समर्थन किया। पर इन सबके बाद भारत के मीडिया ने जो एक गुप्त सैन्य मिशन का ढिंढोरा पीटा वो वाक़ई शर्मनाक है और देश के अश्मिता पर सवाल है।

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हालाँकि पाकिस्तान अपने अधिकृत इलाके में हुए कार्यवाई को मानने को तैयार नही है या यूँ कहिये की मानना नही चाहता। पाकिस्तान के मानने ना मानने से फर्क नही पड़ता पर संयुक्त राष्ट्र और विश्व के कई जाने माने अख़बार जैसे की वाशिंगटन पोस्ट, cnn, bbc इत्यादियों ने भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। इससे हमें फर्क पड़ता है क्योंकि ये हमारे सैनिको के पराक्रम के ऊपर एक सवाल है जिसका जवाब भारत सरकार को देना चाहिए। ऐसा क्यू है की उनके पास इस सर्जिकल स्ट्राइक को ले कर दूसरी धारणाये हैं? ऐसा उस वक़्त क्यों नही था जब कांग्रेस के समय में ऐसी कार्यवाई हुई? क्या भारत सरकार का फ़र्ज़ नही बनता की उनके सवालों का विस्वसनीय जवाब दे और बताये की हम क्या क्या कर सकते हैं? संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता ने बताया कि UNMOG ने नियंत्रण रेखा पर किसी तरह की गोलीबारी नही देखी और किसी प्रकार के हमले का खंडन किया। अगर भारत सरकार ने इन दावों का खंडन नही किया तो हमारे सेना के पराक्रम की साख के ऊपर सवाल आ सकता है।
बीते 2 सालों में देशभक्ति विषय पर काफी चर्चाएं होती आ रही है। इन गंभीर मश्लो को काफी सूक्ष्म दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। किसी को भी देशद्रोही होने का तमगा पहना दिया जाता है जैसे ये बच्चे का खेल हो। यही कारण है कि सोचने समझने वाले लोग भी सवाल ना कर चुपचाप जैसे नदी के वेग के साथ हो लेते हैं। मौजूद स्थिति सचमुच में दुखद है जब लोग प्रश्न पूछने से डरने लगे हैं।

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