डॉन ने कोर्ट को बताया- मैं हूं देशभक्त, 25 वर्षों से देश के लिए मुस्लिम आतंकवाद से जंग लड़ रहा था

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अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन पर हत्या, जबरन वसूली, ड्रग्स की तस्करी जैसे 70 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। वह इंटरपोल की वांटेड लिस्ट में 1995 से था।
अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन पर हत्या, जबरन वसूली, ड्रग्स की तस्करी जैसे 70 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। वह इंटरपोल की वांटेड लिस्ट में 1995 से था।

नई दिल्ली- अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन ने मंगलवार को सीबीआई की विशेष कोर्ट को संकेत दिए कि भारतीय एजेंसियों ने उसे फर्जी पासपोर्ट दिया था, जिसके सहारे वह आस्ट्रेलिया में एक दशक से ज्यादा समय तक छुपा रहा। छोटा राजन का दावा है कि उस पर जालसाजी के आरोप झूठे हैं, क्योंकि वह देश की मदद कर रहा था। अंग्रेजी अखबार मेल टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक उसने अपने आपको सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा कि वह पिछले 25 सालों से आतंकवाद से लड़ रहा था। छोटा राजन को पिछले साल अक्टूबर में इंडोनेशिया की पुलिस ने बाली में गिरफ्तार किया था। उसके बाद नवंबर में उसे भारत लाया गया।

दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद छोटा राजन का ट्रायल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चल रहा है, क्योंकि उसे जान से मारने का खतरा है। इसको लेकर कई बार धमकियां भी मिल चुकी हैं। छोटा राजन ने कोर्ट को बताया कि उसने पासपोर्ट का गलत यूज नहीं किया। वह इसका इस्तेमाल आतंकवाद से जंग लड़ने के लिए ही कर रहा था। सीबीआई ने भी कोर्ट में तीन अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि छोटा राजन को मोहन कुमार के नाम से पासपोर्ट जारी करके कानून का उल्लंघन किया। छोटा राजन ने बताया था कि मुंबई हमले अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने करवाए थे। छोटा राजन ने बताया, ‘मैंने दाऊद और आतंकवाद से लड़ने के लिए जितना संभव हो सकता था भारतीय एजेंसियों की मदद की। मैं अपने रिकोर्ड में अधिकारियों का नाम नहीं ले सकता क्योंकि इससे मेरे देश की छवि खराब हो सकती है।

छोटा राजन इंटरपोल की वांटेड लिस्ट में 1995 से था। उस पर फिरौती, हत्या, हथियारों की तस्करी जैसे आरोप हैं। वह पिछले 27 वर्षों से भारत से फरार था, जिसकी सुरक्षा एजेंसियों तलाश कर रही थीं। 55 साल के राजन पर हत्या, जबरन वसूली, ड्रग्स की तस्करी जैसे 70 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

ताजा टिप्पणी :- 25 साल तक लड़ा हूँ इस्लामिक आतंक से! भारत वालों मेरा साथ दो:- छोटा राजन

किसे बुला रहे हो राजन भाई ! ये हिन्दू हैं ! इनके लिए लड़ने की सजा सिर्फ एक ही है और वो है दर्दनाक मौत ! तुम्हे 18 साल पहले दारा सिंह को व कुछ वर्ष पूर्व साध्वी प्रज्ञा जी देख कर फैसला कर लेना चाहिए था !

अलविदा राजन…… याद रखना….  ये हिन्दू हैं केवल हिन्दू !!

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