विनय कटियार- मन्दिर बलि माँग रहा है, लोग बोले – किसकी तोगड़िया की या तुम्हारी !

बीजेपी के इस बेरोजगार सांसद को इतना भी नहीं पता कि राममन्दिर मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। उसके बावजूद भी ये बेरोजगार आदमी मंदिर मंदिर की रट लगाए हुए है क्या ऐसे विवादित नेताओं के बोलने पर मोदी को रोक नहीं लगानी चाहिए ? क्या यह मन जाय कि विनय जैसे विवादित नेताओं को जानबूझकर ऐसे विवादित ब्यान देने के लिए छूट दी गयी है कि मामला गरमाए रहो। विनय कटियार को बलि देने का इतना ही शौक है तो ये चले जाय सुप्रीम कोर्ट के सामने और कह दे कि माई लार्ड, सबसे पहले मुझे फाँसी लगा दे दे ताकि राममंदिर बन जाय । शायद तेरे बलिदान कर देने से सुप्रीम कोर्ट को दया आ जाये।

अयोध्या हिंदी नववर्ष की पूर्व संध्या पर श्रीराम कोटि की परिक्रमा करने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के फायर ब्रांड नेता विनय कटियार ने राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान दिया है। विनय कटियार ने कहा कि अयोध्या में राम का मंदिर चाहिए। राम मंदिर के लिए एक और बलिदान चाहिए होगा। विनय कटियार यह बयान ऐसे समय में आया है जब मसला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। साथ केंद्र और उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। विनय कटियार ने मंच से साधू संतों के साथ हुई बातचीत की अहम बातें बताई।

विनय कटियार ने अयोध्या मसले में सुलह की पहल करने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों का अयोध्या मसले से लेना देना नहीं है वे भी अब फॉर्मूला लेकर आ रहे हैं। अयोध्या राम जन्मभूमि के आसपास किसी भी तरह की मस्जिद स्वीकार नहीं है। मुझे उम्मीद है की 2019-20 में राम का भव्य मंदिर निर्माण शुरू होगा। पत्थर तराशे जा चुके हैं पहली मंजिल के लिए पत्थर हैं, जिस दिन कोर्ट का फैसला आएगा राम मंदिर निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।

विनय कटियार ने कहा की मुलायम सिंह की सरकार में अयोध्या रक्त रंजित हुई थी। मुलायम ने स्वीकार भी किया है। अब हम सब को एक और बलिदान की तयारी करनी होगी। बीजेपी नेता ने कहा कि अयोध्या का जमीन विवाद सुप्रीम कोर्ट में है, इसपर क्या फैसला आएगा ये कोई नहीं जानता है, लेकिन इतने लोगों का बलिदान हुआ है वही निर्णय है। हम  मथुरा और काशी की बात नहीं कर रहे हैं। मुगलों ने कई जगहों पर तोड़फोड़ करके हमें अपमानित करने का कम किया है। हमें संकल्प लेना होगा जबतक मंदिर निर्माण नहीं हो जाता है, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे।

न्यायालय ने अयोध्या प्रकरण में हस्तक्षेप के लिये सारे आवेदन अस्वीकार किये 
सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्म भूमि- बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में हस्तक्षेप की अनुमति के लिये दायर सभी अंतरिम आवेदन आज अस्वीकार कर दिये। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर की तीन सदस्यीय विशेष खंडपीठ ने इस दलील को स्वीकार कर लिया कि भूमि विवाद के सभी मूल पक्षकारों को ही बहस करने की अनुमति दी जानी चाहिए और इस प्रकरण से असंबद्ध व्यक्तियों की हस्तक्षेप करने के लिये दायर सारी आर्जियां अस्वीकार की जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने भाजपा नेता सुब्रमणियन स्वामी की भी इस विवाद में हस्तक्षेप के लिये दायर अर्जी अस्वीकार कर दी।

हालांकि न्यायालय ने अयोध्या में विवादित स्थल पर बने राम मंदिर में पूजा करने के मौलिक अधिकार को लागू करने के लिये स्वामी की याचिका को बहाल करने का आदेश दिया। स्वामी की इस याचिका का पहले निबटारा कर दिया गया था। स्वामी ने कहा, ‘मैंने एक याचिका यह कहते हुये दायर की थी कि पूजा करना मेरा मौलिक अधिकार है और यह संपत्ति के अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण है।’ विशेष खंडपीठ के पास इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ14 अपीलें विचारार्थ हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2010 में बहुमत के फैसले में इस विवादित भूमि को राम लला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था।