आरएसएस के कार्यक्रम के चलते दिल्ली प्रदेश उपाध्यक्ष ने दिया बीजेपी से इस्तीफा

25 अक्टूबर को आरएसएस की शाखा “राष्ट्रीय सिख संगत” (जो जाट सिखों को हिन्दू जट्टों के खिलाफ भड़ाकाने में लगी है) की ओर से दिल्ली में आयोजित गुरू गोविंद सिंह की 350 वीं जयंती को लेकर बीजेपी की दिल्ली इकाई के उपाध्यक्ष सरदार कुलवंत सिंह बाठ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने अपना इस्तीफा देते हुए कहा कि वह दिल्ली भाजपा उपाध्यक्ष के तौर पर इस्तीफा दे रहे हैं क्योंकि वह पिछले कुछ दिनों में पार्टी के कार्यक्रमों में योगदान नहीं कर सके। ध्यान रहे सिक्ख समुदाय की सर्व्वोच धार्मिक संस्था “अकाल तख्त्त” ने सिक्ख समुदाय से इस कार्यक्रम से दूर रहने का हुक्मनामा जारी किया था।

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ध्यान रहे ‘अकाल तख़्त” पांच तख़्तों में सबसे पहला तख़्त है। इसे सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिन्द ने न्याय-संबंधी और सांसारिक मामलों पर विचार करने के लिए स्थापित किया, यह ख़ालसा की सांसारिक एवं सर्वोच्च प्राधिकारी है। और इस तख़्त पर बैठने वाला जथेदार को सिखों के सर्वोच्च प्रवक्ता माना जाता है।

अकाल तख्त के जत्‍थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने सिख समाज से सिख समुदाय को निर्देश दिया कि वह आरएसएस की शाखा “राष्ट्रीय सिख संगत” समारोह में भाग न लें। उन्होंने कहा, हम सिख इतिहास को अन्य धर्मों में मिलाने की अनुमति नहीं दे सकते और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सिख जाटों का एक अलग समुदाय है, अलग पहचान के साथ हमारे पास अपना अनूठा इतिहास है।

उन्होंने कहा, सिख समाज अन्य समुदायों के धार्मिक विश्वासों, परंपराओं और इतिहास में हस्तक्षेप नहीं करता है और इसलिए वे सिख धर्म में भी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेगा।

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