भोपाल के बीचो-बीच खुल रहा स्लॉटर हाउस, विरोध के बावजूद BJP सरकार बंद करने को राजी नहीं!

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भोपाल। मध्य प्रदेश में शिवराज के राज में भोपाल शहर के बीचोंबीच खुल रहे नये स्लॉटर हाउस पर बवाल मचा है। सात एकड़ में बनने वाले बूचड़खाने की ज़मीन की कीमत करीब ढ़ाई सौ करोड़ रूपये है। आसपास की कॉलोनी के लोग रोज़ नये नये तरीके से इसका विरोध कर रहे हैं। मंत्री, विधायक तक इसके खिलाफ़ हैं। लोगों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में भी दस्तक दे दी है, बावजूद सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं है।

भोपाल के ग्रीन मिडोस, पद्मनाभ नगर औऱ सुभाष नगर में रहने वाले लोग गलियों में कभी कैंडिल मार्च निकाल रहे हैं तो कभी अपनी कॉलोनी के सामने खड़े होकर सरकार के ख़िलाफ नारे लगा रहे हैं। विरोध की ये चिंगारी नये स्लॉटर हाऊस से निकली है जो नये औऱ पुराने भोपाल के बीच हरी भरी पहाड़ी पर बनना है। सैकड़ों लोगों के हस्ताक्षर कराये जा चुके हैं। लोगों की दलील है कि जब सरकार ने सब्जी मंडी, अनाज मंडी, ट्रांसपोर्ट हाऊस शहर के बाहर कर दिया तो बूचड़खाना शहर के अंदर क्यों।

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भोपाल निवासी रेणु भार्गव कहती हैं कि अगर एक गाय मर जाती है ट्रक टक्कर मार दे तो उसे जला देते हैं औऱ हमारे शहर के बीचों बीच इतना बड़ा बूचड़खाना खोला जा रहा है। हमारे ऊपर क्या असर पड़ेगा। मुख्यमंत्री इसे शहर के बाहर करें)

अपने घर के बगल में स्लॉटर हाउस बनने की कल्पना से डरी रेणु जैसी कई महिलायें हैं। दरअसल भोपाल के मौजूदा मास्टर प्लान में शहर के अंदर बने पुराने स्लॉटर हाऊस को भी दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात कही गई है। पर्यावरण मंत्रालय के नियम भी यही कहते हैं कि बूचड़खाना शहर की सीमा पर बने क्योंकि इसे खतरनाक उद्योग की श्रेणी में गिना जाता है।

स्लॉटर हॉउस को लेकर घबराए लोगों ने मंत्री विश्वास सारंग से भी मुलाकात की। मंत्री ने भी उन्हें मदद का भरोसा दिया है, पर समूचे मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री औऱ नगरीय प्रशासन मंत्री खामोश हैं।

प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मैंने इस बात को लेकर जिला प्रशासन को पत्र लिखा है कि स्लाटर हाऊस शहर में नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की भी रूलिंग है। उसके हिसाब से भी शहर के बाहर होना चाहिये। रहवासी भी विरोध कर रहे हैं। ज़मीन का कोई और उपयोग हो तो बेहतर होगा।

स्लॉटर हॉउस की जमीन को लेकर भोपाल के कलेक्टर का कहना है कि स्लॉटर हॉउस की सात एकड़ ज़मीन शासन ने आबंटित की है। इसके बारे में जो भी फैसला होगा वो सरकार ही कर सकती है।

कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे पर जोरदार हमला बोला है। कांग्रेस नेता मुकेश नायक का कहना है कि पूरा शहर विरोध कर रहा है कि वहां बूचड़खाना ना बने. फिर भी बन रहा है। ये पैसे की ताकत है। 1200 पशु हर दिन काटे जाएंगे। ये मोदीजी की मांस निर्यात पॉलसी के तहत है।

गौरतलब है कि भोपाल तो क्या, किसी भी शहर के अंदर किसी को गौशाला खोलना होती है या फिर डेरी चलाना हो तो तमाम पापड़ बेलने के बाद भी खोलने की इजाज़त नहीं मिलती। लेकिन बीजेपी के राज में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बीचो-बीच रिहायशी इलाके में बूचड़ खोलने की तैयारी है।

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