या तो चीन भारत से सम्बन्ध सुधारे नहीं तो CPEC कोरिडोर को भूल जाये :- रिपोर्ट

Click on Next Button

(यूनाइटेड हिन्दी) – चीन चाइना पाकिस्तान कोरिडोर यानि CPEC को किसी भी हाल में पूरा करना चाहता है। क्यूंकि इसके बिना बीजिंग पूरे विश्व में ग्लोबल उपस्थिति दर्ज नहीं करा सकता। चाइना की अर्थव्यवस्था का भविष्य इसी इकनोमिक कोरिडोर पर निर्भर है। अब चूँकि यह कोरिडोर उस हिस्से से होकर जाता है जिस पर भारत अपना अधिकार बताता है और यही कारण है की चीन को भारत से शांति के साथ इस मामले पर बात करनी चाहिए।

cpecSource – swarnimhind

 

उधर फोर्ब्स में छपी एक रिपोर्ट अनुसार भी चीन कठोरता से भी चाइना पाकिस्तान इकनोमिक कोरिडोर बनाने को दृढसंकल्प है। जिसकी अनुमानित लागत करीब 46 बिलियन डॉलर है और इस कोरिडोर से चीन सरलता से पश्चिमी चीन मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के बीच परिवहन संपर्क बना लेगा।

46 अरब डॉलर की लागत से बन रहा है कॉरिडोर 
चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर, पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से चीन के शिनझियांग को जोड़ने वाले कॉरिडोर की योजना है। यह कॉरिडोर ग्वादर से शुरू होकर काशगर तक जाएगा। अरबों डॉलर के इस प्रोजेक्ट के लिए गिलगित-बाल्टिस्तान एंट्री गेट का काम करेगा। चीन इस क्षेत्र में औद्योगिक पार्क, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट, रेलवे लाइन और सड़कें बना रहा है। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट में काराकोरम हाईवे का विस्तार चीन के अशांत रहने वाले शिंजिआंग सूबे तक किया जाएगा।

इससे घाटी तक चीन को मुक्त और ट्रेन से तेज रफ्तार पहुंच मिलेगी। गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के अन्य प्रांतों तक रेलवे लाइन और सड़कों का काम पूरा हो जाने पर, ग्वादर, पासनी और ओरमारा में चीन निर्मित नौसेना बेस के रास्ते आने वाले चीनी कार्गो को पाकिस्तान पहुंचने में सिर्फ 48 घंटे लगेंगे. अभी इसमें 16 से 25 दिन का समय लगता है।

लेकिन इस कोरिडोर में गड़बड़ यह है की इसका बड़ा हिस्सा भारत द्वारा के क्षेत्र से होकर जाता है और इसी बात ने नई दिल्ली में बैठी भारत सरकार को परेशान कर दिया है और वह भी इसका पुरजोर विरोध दर्ज करा रही है। जबकि चीन भी इस बात को समझता है और वो अपने प्लान अनुसार ही काम कर रहा है। और भारत की मोदी सरकार से सकारात्मक वार्तालाप की जगह एकदम शत्रु जैसा व्यवहार कर रहा है और उसी अनुरूप भारत की राह में रोड़े बिछाए और भारत को NSG का सदस्य देश नहीं बनने दिया।

और उधर दूसरी तरफ चीन सयुंक्त राष्ट्र में सरेआम मौलाना मसूद का पक्ष लेते हुए उसे आतंकी संगठन घोषित ना करवाने में भी कामयाब हो जाता है। और कश्मीर मुद्दे पर भी पाकिस्तान के साथ खड़ा दीखता है और जिसकी वजह से भारत को भी साउथ चाइना समुन्द्र के मुद्दे पर अमेरिका के साथ खड़ा होना पड़ता है प्रतिक्रिया स्वरुप। अगर बीजिंग ने यह मामला अभी शुरुआत में ही नहीं संभाला तो बहुत देर भी हो सकती है क्यूंकि अभी पाकिस्तान में ही इस प्रोजिक्ट का विरोध होना शुरू हो गया है। और अगर पाकिस्तान में ही इस प्रोजेक्ट में बलोचिस्तान में जैसा विरोध हो रहा है अगर वो कामयाब रहे तो चीन के इस कोरिडोर में पलीता भी लग सकता है और फिर यह एक विवादस्पद योजना बन कर रह जाएगी और चीन का लाखों करोड़ रुपया पानी में बह जायेगा। बलूच लीडर और बलूच आर्मी इस cpec प्रोजेक्ट का विरोध करने की ठान ही चुकी है।

बलूच नेता हम्मल हैदर ने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का किसी भी कीमत पर बलूचिस्तान विरोध करेगा क्योंकि ये उनके लिए जीवन मृत्यु का मामला है।

उधर पाकिस्तान की संसद में भी इस CPEC का विरोध होना शुरू हो चूका है और प्लानिंग ऐंड डिवेलपमेंट पर बनी सेनेट स्टैंडिंग कमिटी के चेयरमैन ताहिर मशादी ने कहा, ‘यदि राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा नहीं की गई तो निकट भविष्य में हम एक और ईस्ट इंडिया कंपनी देख सकते हैं। हमें पाकिस्तान और चीन की दोस्ती पर नाज है लेकिन हमें अपने हितों को प्राथमिकता देनी होगी पाकिस्तानी सांसद कह रहे हैं की अगर इस प्रोजेक्ट को रोका नहीं गया तो पाकिस्तान के लिए ये कोरिडोर ईस्ट इंडिया कंपनी बन जायेगा क्यूंकि इस परियोजना में जितना पैसा लग रहा है उसका सत्तरह प्रतिशत सालाना गारंटी वापसी की दिए बैठी है पाकिस्तान सरकार। जबकि पाकिस्तान सरकार को इससे मिलने वाला कुछ नहीं ….. प्रत्यक्ष रूप से .. यह बस राजमार्ग ही तो है .. कोई उत्पादकता वाला निवेश नहीं।

कुल मिला कर भारत वासियों को भी चीन को हतोत्साहित करना चाहिए और भारत सरकार ने नोट पाबन्दी करके चीन की चिंता और भी अधिक बढ़ा दी है। क्यूंकि भारत और चीन का इम्पोस्त अधिकतर कैश में होता था। एक नंबर से इम्पोस्त बहुत कम होता था व्यापारी यहाँ पैसा देता था रूपये में और बाहर से डॉलर चीनी कंपनी को मिल जाते थे अब नोट पाबन्दी से वो काम पर कुठाराघात हो गया है जिसके कारण चीन में वो सभी औद्योगिक क्षेत्र जहाँ पर भारत के लिए विशेष उत्पादन होता था अब सूने हो रहे हैं वहां उत्पादन कम हो रहा है … धीरे-धीरे मंदी की आशंका बढ़ रही है क्यूंकि चीन की मुद्रा पर भी अभी बहुत दवाब है …. कुल मिला कर अगर हम सभी भारतीय इस समय पर चीनी वस्तुओं पर लगाम कसनी शुरू कर दें तो चीन की कमर भी तोड़ी जा सकती है।

अभी हाल में ही यह खुलासा भी हुआ है की चीन में बने मोबाइल में जासूसी उपकरण होते थे जो बीजिंग स्थित सर्वर में सारा डाटा भेजता रहता था। मतलब आपके स्मार्टफोन में जो भी जानकारी है वो चीन की पहुँच में है। इसीलिए इस चीन से जितना बचा जाये उतना ही बढ़िया।

Click on Next Button

To Share it All 🇺🇸🇮🇹🇩🇪NRI Citizens

Leave a Reply

Your email address will not be published.