ब्राह्मी द्वारा ब्रह्मचर्य को नष्ट होने से बचाने के 10 अचूक उपाय

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ब्राह्मी (वानस्पतिक नाम : Bacapa monnieri) एक औषधीय पौधा है जो भूमि पर फैलकर बड़ा होता है। इसके तने और पत्तियाँ मुलामय, गूदेदार और फूल सफेद होते है। यह पौधा नम स्‍थानों में पाया जाता है, तथा मुख्‍यत: भारत ही इसकी उपज भूमि है। इसे भारत वर्ष में विभिन्‍न नामों से जाना जाता है जैसे हिन्‍दी में सफेद चमनी, संस्‍कृत में सौम्‍यलता, मलयालम में वर्ण, नीरब्राम्‍ही, मराठी में घोल, गुजराती में जल ब्राह्मी, जल नेवरी आदि तथा इसका वैज्ञानिक नाम बाकोपा मोनिएरी है।

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यह पूर्ण रूपेण औषधीय पौधा है। यह औषधि नाडि़यों के लिये पौष्टिक होती है। कब्‍ज को दूर करती है। इसके पत्‍ते के रस को पेट्रोल के साथ मिलाकर लगाने से गठिया दूर करती है। ब्राह्मी में रक्‍त शुद्ध करने के गुण भी पाये जाते है। यह हृदय के लिये भी पौष्टिक होता है।

  1. अपस्मार (मिर्गी ) होने पर – 15 से 30 मिलीलीटर ब्राह्मी की जड़ का स्वरस या 4 से 7 ग्राम चूर्ण को दिन में 3 बार 150 से 275 मिलीलीटर देशी गाय के शुद्ध दूध के साथ मिलाकर सेवन करने से अपस्मार का रोग बिल्कुल ठीक हो जाता है।

  2. धातु क्षय (वीर्य का नष्ट होना) – 14 ब्राह्मी के पत्तों को दिन में 3 बार चबाकर सेवन करने से वीर्य के रोग का नष्ट होना काफी हद तक कम हो जाता है।

  3. एड्स – ब्राह्मी नामक बूटी का रस 7 से 12 मिलीलीटर अथवा चूर्ण 3 ग्राम से 6 ग्राम सुबह-शाम सेवन देने से एड्स में लाभ होता है क्योंकि यह शरीर की गांठों को खत्म करता है और शरीर को अंदर से गलने/सड़ने को रोकता है। निर्धारित मात्रा से अधिक लेने से चक्कर आदि आ सकते हैं।

  4. वीर्य रोग – शंखपुष्पी, ब्रह्मी, ब्रह्मदंडी, खरैटी, तथा काली मिर्च को पीसकर खाने से वीर्य रोग दूर होकर शुद्ध होता है।

  5. यादास्त शक्ति वर्द्धक – 1 बादाम की गिरी, 3 ग्राम काली मिर्च, 10 मिलीलीटर सूखी ब्राह्मी का रस, को पानी से पीसकर 3-3 ग्राम की टिकिया बना लें। इस टिकिया को रोजाना सुबह और शाम देशी गाय के शुद्ध दूध के साथ रोगी को देने से दिमाग को ताकत मिलती है।

  • 3 ग्राम शंखपुष्पी, 3 ग्राम ब्राह्मी, 3 ग्राम छोटी इलायची, 6 ग्राम बादाम गिरी के बीज को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को थोड़े-से पानी में पीसकर, छानकर मिश्री मिलाकर पीने से खांसी, पित्त बुखार और पुराने पागलपन में लाभ मिलता है।

  • ब्राह्मी के ताजे रस और बराबर मात्र में भारतीय नस्ल की काली गाय के दूध से निर्मित असली घी को मिलाकर शुद्ध घी में 5 ग्राम की खुराक सेवन करने से दिमाग को ताकत प्रदान होती है।

  1. नींद को कम करने के लिए – ब्राह्मी के 3 ग्राम चूर्ण को भारतीय नस्ल की गाय के आधा किलो कच्चे दूध में घोंटकर छान लें। इसे 1 सप्ताह तक सेवन करने से लाभ पहुंचता है।
  • 5-10 मिलीलीटर ताजी ब्राह्मी के रस को 100-150 ग्राम देशी गाय के कच्चे दूध में मिलाकर पीने से भी लाभ होता है।
  1. उन्माद में – 6 मिलीलीटर ब्राह्मी का रस, 2 ग्राम कूठ का चूर्ण और 6 ग्राम असली शहद को मिलाकर दिन में 3 बार पीने से पुराना उन्माद यानि पागलपन कम हो जाता है।
  • 3 ग्राम ब्राह्मी, 2 पीस कालीमिर्च, 3 ग्राम बादाम की गिरी, 3-3 ग्राम मगज के बीज तथा सफेद मिश्री को 25 गाम पानी में घोंटकर छान लें, इसे सुबह और शाम रोगी को पिलाने से पागलपन दूर हो जाता है।

  • 3 ग्राम ब्राह्मी के थोड़े से दाने कालीमिर्च के पानी के साथ पीसकर छान लें। इसे दिन में 3 से 4 बार पिलाने से भूलने की बीमारी से छुटकारा मिलता है।

  • ब्राह्मी के रस में कूठ के चूर्ण और शहद को मिलाकर चाटने से पागलपन का रोग ठीक हो जाता है।

  • ब्राह्मी की पत्तियों का रस तथा कूठ, बालवच, शंखपुष्पी का मिश्रण बनाकर देशी गाय गाय के पुराने घी के साथ सेवन करने से पागलपन का रोग दूर हो जाता है।

  1. बालों के लिए – 100 ग्राम ब्राह्मी की जड़, 50 ग्राम शंखपुष्पी और 100 ग्राम मुनक्का को चौगुने पानी में मिलाकर रस निकाल लें। इस रस का सेवन करने से बालों के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

  2. पेशाब करने में कष्ट होना (मूत्रकृच्छ) – ब्राह्मी के 2 चम्मच रस में, 1 चम्मच मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेशाब करने की रुकावट दूर हो जाती है।

  3. जलन – 5 ग्राम ब्राह्मी के साथ धनिया मिलाकर रात को भिगो दें। इसे सुबह पीसकर, छानकर मिश्री के साथ मिलाकर पीने से जलन शांत हो जाती है।

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