संजय कोटियाल का ब्लॉग: भारत का राजनैतिक द्वन्द

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ब्लॉग: संजय कोटियाल (यूनाइटेड हिन्दी) – भारत में भी राजनैतिक दृष्टि से मोटी मोटी दो ही धाराएं हैं । एक दक्षिणपंथ है एक झामपंथ है । बाकी राजनैतिक मोहक कॉम्बिनेशंस हैं जिनके विचार में अपने अपने अनुसार लोग जुड़े हैं या विचार बनाते या प्रकट करते हैं । आज ही से नहीं आजादी के बाद से ही ऐसा रहा है ।

आजादी के बाद से कोंग्रेस की मोनोपोली ही रही है । देश को आजाद करवाया, इस बात को अच्छे से भुनाया है । कोंग्रेस मजेदार तौर से दक्षिणपंथ और झामपंथ का हाइब्रिड दिखाई पड़ती है । अच्छे नेता भी रहे हैं । लाल बहादुर शास्त्री जैसे ।

इनके छोटे छोटे बालक जैसे समाजवाद या अन्य क्षेत्रीय दक्षिणपंथी या झामपंथ से जुडी पालटियां भी हैं जो अस्तित्व में हैं । और कोई ऑप्शन होना भी नहीं था । सम्भव ही नहीं है ।

कुल मिलाकर जो भी समस्या या प्रसंग लोकतान्त्रिक भारत में होता है, वो इन्ही दो विचारधाराओं के पत्थर पर घिस कर चमकाया जाता है ।

वामपंथ को “भारत में” झामपंथ कहने में मुझे व्यक्तिगत तौर पर सुख मालूम होता है । उसका कारण है जिसे लंबे समय से लिखता आया हूँ । सनातन भारत  में वो एलिमेंट्स हैं जिनके कारण वामपंथ के विदेश में सफल एजेंडा भारत में आते ही कंट्रोवर्शियल फॉर्म अख्तियार कर लेता है । गरीब गरीब तो ऐसे चिल्लाते हैं जैसे देशवासी गरीबो को ही फांसी के फंदे पे लटका रहे हों । ये इंडिया है यहाँ लंगर पंगत भंडारे चलते रहते हैं । बहरहाल ये बाते लंबी हो जाएंगी । कुल मिलाकर झामपंथ आपको ये बताता है कि सिस्टम में खामियां क्या हैं और स्टालिन जैसा तानाशाह विचार वाला ही सफल किरान्ति कर सकता है । उनके इतिहास में और कुछ है ही नहीं तो क्या बताया जाए ? चाइना और कोरिया गिरोह तो अपने में मस्त हैं वो भी नहीं छुपा । एक्स युगोस्लाविया और रशिया के हाल सबको पता हैं । बाकी पंगे करने में ये उस्ताद हैं । पर, भारत में ये गड़बड़ा जाते हैं । सामाजिक आधार के एलिमेंट्स इनको खा जाते हैं, अभी तो वैचारिक दृष्टि इतनी प्रबल नहीं है, पर भारत के आधार स्तंभ जितने भी हुए हैं जिनका मान भारत में है, उनके बारे में पढ़ा जाए तो झामपंथी बहुत गैर जिम्मेदार और उत्पात मचाने के अतिरिक्त और कोई कार्य नहीं कर पाते हैं ।

अब दक्षिणपंथी का बात देश की आइडेंटिटी से जुड़ा होता है । झामपंथ के वैचारिक सोचने के आधार से एकदम उलट । भारत में दक्षिण पंथ एकदम उलट है बाकी के संसार से । भारत और भारत के इतर ही जब सोच के आधार के एलिमेंट्स अलग हैं तो अलग तो होना ही है । विविधतता में एकता, वसुधैव कुटुम्बकम आदि के साथ या कहा जाए कि सामान्य परस्पर बातचीत जो दैनिक जीवन में होती है वो राजनैतिक विचारधारा से एकदम अलग होती है । ये मेरा व्यक्तिगत विचार है । क्योंकि देखा हुआ है । यहाँ एक बात समझ लेनी होगी कि दक्षिणपंथ और झामपंथ भी विदेशी आयातित शब्द ही हैं, जिनमे मेरी कोई रूचि नहीं है । बल्कि संदेह और अवांछित रूप से दिमाग को ही भ्रष्ट करने में इन शब्दों का बहुत दुरूपयोग हो जाता है ।

एक व्यक्तिगत बात मेरी अपनी है जिस पर मुझे ही आश्चर्य हो जाता है । निरपेक्ष निष्पक्ष रूप से रहने पर भी, मेरी अपनी जो हॉबी हैं या जीवन जीने के तरीके हैं, उसको पसंद नापसंद कौन कौन करता है, इसी आधार पर मुझे ही एक केटेगरी में आसानी से ढाल दिया गया है । मेरे चाहने या ना चाहने से कुछ नहीं होता । संवाद के आधार पर पसंद नापसन्द बनती है । देखते ही देखते भारत के आधार की बात कर सकने के कारण और स्पेस, रेस्पेक्ट आदि के मानवीय गुणों के आधार पर जब तोलना शुरू हुआ तो बड़े बड़े सुन्दर सुंदर नतीजे सामने आये । जनता इतनी भी गुणवान नहीं है ।  राजनैतिक दिमाग वाले तो ढींठ और भ्रष्ट ही हैं । झामपंथी विशेषकर ।

तो इस तरह से देश चल रहा था । अचानक से एक बन्दा आ जाता है जो रूटीन पॉलिटिक्स में नए नए प्रयोग करने का साहस रखता है । कोई कित्तना भी चिल्लाए पर उसने तो अपना काम करना ही है । वो दक्षिणपंथ और झामपंथ दोनों की बैंड बजाने में माहिर है । उनका नाम PM मोदी है । लोग खिसिया जाते हैं कि क्या किया जाए ।  वो सारे भ्रम तोड़ता चलता जा रहा है । आप साथ हैं या नहीं हैं, उसके फर्क नहीं पड़ता । वो स्वतंत्रता के मायने भी स्थापित कर रहा है, वो निर्णय ले सकने वाला है, वो झामपंथ की किरान्ति सरकार में ही बैठ के कर रहा है , वो दक्षिणपंथी की जेब भी टटोल रहा है । सही में निर्मोही है । मोह केवल देश से है । बाकी आप सब विद्वान् हैं ही । अभी उसकी टक्कर का किलोमीटरों दूर कोई नेता नहीं है । भारत का श्री और ऐश्वर्य बनकर ही वो निकला है ।

या तो कुढ़ लो या साथ रह लो । उसके फर्क नहीं पड़ेगा । वो झटके पे झटके देता रहेगा । जय जय ❤❤🤗

(लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं , एवं यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम स्‍वागत करता है। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया  unitedhindiweb@gmail.com पर भेज सकते हैं। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें। अगर आप भी भारत के लिए ब्‍लॉग लिखने के इच्छुक लेखक है तो भी आपका यूनाइटेड हिन्दी पर स्वागत है।)

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संजय कोटियाल

simple simpler simplest. Lives in Winterthur, Switzerland

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