अमरीका वाले भी हंसते होंगे! कहते होंगे कि देखो इन भारतीय सोशल मीडिया वालों को?

Prev1 of 2Next
Click on Next Button
याद रखें, इतिहास में जीने वाले भविष्य की इबारत नहीं लिखा करते। गुरुदेव इतिहास में थे, नरेन्द्र मोदी वर्तमान हैं, हमारे और आपके बच्चे भविष्य हैं।
याद रखें, इतिहास में जीने वाले भविष्य की इबारत नहीं लिखा करते। गुरुदेव इतिहास में थे, नरेन्द्र मोदी वर्तमान हैं, हमारे और आपके बच्चे भविष्य हैं।

ब्लॉग : Yashark Pandey (यूनाइटेड हिन्दी – कुछ लोग अल्ट्रा हिंदुत्व के चक्कर में अल्ट्रा लेफ्टिस्ट बन जाते हैं। ये लोग कहते हैं कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने जन-गण-मन अंग्रेज सम्राट के लिए लिखा था। चलो मान लिया कि लिखा था। तो का करें? का करें बताओ! ऐसे देखा जाये तो तिरंगा झण्डा भी सही नहीं है। सब जगह का झण्डा उखाड़ के फेंक दें? नेहरूआ चूतिये को देस का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिये था। का करें? टाइम मशीन में पीछे जा के पटेल को प्रधानमंत्री बना दें? क्या गज़नी ग़ोरी तुग़लक़ सबको समय में पीछे जा के खत्म किया जा सकता है? अल सुबह मैंने एक पोस्ट देखी जहाँ लोग स्वामी विवेकानंद और दयानन्द सरस्वती को लेकर झगड़ रहे थे। अजीब वाहियात राष्ट्रवाद है यहाँ! लोग किसी भी मुद्दे पर एकमत हो ही नहीं सकते। सबके सामने एक होने का नाटक करेंगे फिर कमेंट में जा के भसड़ मचाएंगे कि ऐसा नहीं वैसा था।

ताजा कमेन्ट : देख रहा हूं सोशल मीडिया पर राष्ट्रगान के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। दूसरे सारे देश अपने यहाँ के कायदे कानून का सम्मान करते है । उसे मानते हैं । लेकिन आप कोई पाबंदी नही चाहते। लोकतंत्र के नाम पर देशहित से जुड़े हर अच्छे फैसले का मज़ाक उड़ाते हैं। सवाल ये नही है कि राष्ट्रगान सिनेमाघर में बजता है या किसी तवायफ के कोठे पर। असल सवाल है कि आप कब सुधरेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कल ये फैसले देते हुए कहा अब समय आ गया है कि जब लोगो को ये अहसास हो कि वह एक देश में रहते हैं। लोगों को महसूस करना चाहिये कि ये देश उनकी मातृ भूमि है – दया सागर 

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर को एक पगला रिटायर्ड जज मरकण्डा काट’जूं’ ब्रिटिश एजेंट लिखता है। ये विवाद पुराना है। गुरुदेव ने 1937 में पुलिन बिहारी सेन को एक चिट्ठी लिख कर स्पष्ट किया था कि उन्होंने जन-गण-मन अंग्रेज सम्राट के लिए नहीं लिखा था। यह कविता यदि सम्राट के सामने गाई न गई होती तो ब्रिटिश मीडिया कभी इसका संज्ञान ही नहीं लेता। उस समय का मीडिया ही था जिसने लिख दिया था कि हमारे सम्राट के सम्मान में यह गीत गाया गया। गुरुदेव इस प्रकरण से व्यथित थे।

गुरुदेव ही नहीं, अमर्त्य सेन पर भी अनर्गल प्रलाप किया जाता है। कहा गया कि सेन नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुत्थान में 2000 करोड़ खा गए। जबकि मामला 40-50 करोड़ से ज्यादा का नहीं था। मैं ये नहीं कह रहा कि अमर्त्य सेन बहुत अच्छे व्यक्ति हैं। लेकिन बिना तथ्यों को जाने बेवजह की बातें करना राष्ट्रवादियों का शगल बन चुका है। अमर्त्य सेन नोबेल से सम्मानित हैं। विश्व में उनका सम्मान भारत से ज्यादा है। अर्थशास्त्र में सेन ने ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स की थ्योरी दी। सदी के महानतम् अर्थशास्त्रियों में उनका नाम गिना जाता है। लेकिन हम ये नहीं सोचते कि किसी व्यक्ति को दुनिया किस तरह देखती है। हमें तो अपनी पड़ी है। हम सही तो सब सही, हम गलत तो सब गलत। अरे अमर्त्य सेन की आलोचना करनी है तो उनकी Argumentative Indian पढ़ के करो न! केवल मोदी वाला बयान ही क्यों पकड़ते हो? बुद्धिजीवी के प्रोपेगैंडा को बुद्धि से मारो। इसी तरह डॉ रघुराम राजन की खिल्ली उड़ाई गयी थी। राजन देशद्रोही है, अमरीका का एजेंट है फलाना ढिमका खूब कहा सुना गया। जबकि राजन ने कभी देश विरोधी बात नहीं की न ही कभी कुछ ऊंट पटांग लिखा। कैसी विचित्र विडंबना है कि एक विश्व विख्यात अर्थशास्त्री को अपने ही देश में गाली सुननी पड़ी।

अमरीका वाले भी हंसते होंगे। कहते होंगे कि देखो इन भारतीय सोशल मीडिया वालों को, ये अपने देश के प्रतिष्ठित जनों को ही गाली देते हैं। जब फेसबुक पे ज्ञान बांटने की बारी आएगी तो सब राजा महाराजा की तरह ज्ञान रूपी मोतियों की माला गले से तोड़कर फेंकते हैं। य्ये ल्लो! ऐश करो। कोई ज्ञानी राष्ट्रवादी फेसबुकिया संगठित रूप से अपनी बात नहीं कहता। ज्ञान का संगठित होना आवश्यक है। पोर्टल पर छितरा हुआ ज्ञान दिशाहीन मस्तिष्क को और भटकाता है। कहाँ कमेंट करना चाहिये कहाँ नहीं इतनी भी समझ नहीं है यहाँ।

याद रखें, इतिहास में जीने वाले भविष्य की इबारत नहीं लिखा करते। गुरुदेव इतिहास में थे, नरेन्द्र मोदी वर्तमान हैं, हमारे और आपके बच्चे भविष्य हैं। एक भी शब्द बेवजह न लिखें, न पढ़ें न शेयर करें न कमेंट करें। संगठन में शक्ति है। विखण्डन के प्रयास हमारे ज्ञान के चोंचलों से ज्यादा शक्तिशाली हैं।

अगले पृष्ठ पर पढे – जन गण मन – राष्ट्रिय गान और विवाद

Prev1 of 2Next
Click on Next Button

To Share it All 🇺🇸🇮🇹🇩🇪NRI Citizens