विश्वजीत कुमार झा का ब्लॉग : ‘काम’-रेड और दरकता वामपंथ

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ब्लॉग : विश्वजीत कुमार झा (यूनाइटेड हिन्दी) – प्रारम्भ में ही बता दूं कि मैं सिर्फ वर्तमान के मुद्दों पे बात करूंगा , यथार्थ का निरूपण प्रासंगिक है बाकी आपका आदर्श आपको जगह विशेष पर मुबारक हो! क्योंकि वो मुझे फर्जी यूटोपिया के अतिरिक्त कुछ नहीं लगता।

वामपंथी दल (प्रतीक फोटो)
वामपंथी दल (प्रतीक फोटो)

राम मनोहर लोहिया ने अपनी पुस्तक ‘भारत विभाजन के गुनहगार’ में लिखा था , “आजादी के समय वामपंथी भारत विभाजन के पक्षधर थे क्योंकि उन्हें पाकिस्तान में अपनी मजबूत स्थिति दीख रही थी ।” तो सनद रहे कि वामपंथ की नींव ही उसके विचारों को प्रदर्शित कर देती है।

वर्तमान वामपंथ जो मार्क्स और माओ के विचारों का भटका हुआ आयातित संस्करण है वो मुझे बौद्धिक बकलोली और राष्ट्र विरोधी मानसिकता का कॉकटेल पेग लगता है। आप किसी भी मुद्दे पर इनके विचार को देखेंगे तो यह द्रोही व विभाजनकारी होने के अतिरिक्त और कुछ नहीं लगता….  और जैसे ही आप बहस करेंगे तो यह कहेंगे कि आप तो भक्त हो जबकि ये वो ब्रेन वाश्ड क्रांतिकारी हैं जो थेथरई के अतिरिक्त कुछ नहीं कर पाया।

नक्सलवाद इन्हें क्रान्ति लगता है , ये शोषण की बात करते हैं और लोकतांत्रिक समाधान की विकल्प इन्हें बेमानी लगती है। सुदूर क्षेत्र में घने जंगलों के बीच स्कूल जलाना , सड़कें काटना , जबरन नक्सली बनने पे मजबूर करना , मुखबिरी के नाम पे निर्दोष आदिवासियों की हत्या , ये सब इन्हें समाजवाद व क्रान्ति लगती है।

जब आतंकवाद की बात आये तो कश्मीर के नाम पे इनका विलाप शुरू हो जाता है। शान्ति का कोई समाधान नहीं इनके पास लेकिन अलगाववादियों पर हुयी कार्यवाही पर इनके भीतर का मानव जग जाता है। सैनिकों के शहादत इनके लिये मायने नहीं रखती लेकिन ‘भारत मुर्दाबाद’ के नारे लगाकर पथराव करने वाले पर पेलेट गन की चोट से ही इनका कलेजा फट के फ्लावर हो जाता है।

ये इंसानियत की बात करते हैं और धर्म को अफीम कहेंगे लेकिन इनकी चरसी मानसिकता इन्हें धर्म विशेष के विरोध और दो धर्मों के बिखराव के अतिरिक्त कहीं नहीं ले जाती! ये आस्था पर चोट करके लोगों को और अधिक उन्मादित बनाते हैं। ये सेनेटरी और किस्सी डे को नारीवाद मानते हैं और तीन तलाके पर दिव्यांग बन जाते हैं , वरना इनका स्यूडो सेकुलरिज्म जो खतरे में पड़ जायेगा।

इन्हें भक्त कहना है या जो भी कहना हो कहने दीजिये , इनकी थेथरई पर तर्क देकर अपनी ऊर्जा से इन्हें टीआरपी मत दीजिये। आजादी के पहले से अब तक इनकी मानसिकता एक ग्लास भर में कैद हैं , वहीं छलकते हैं और नाचते हैं , वर्तमान में फेसबुक पर अपने चट्टे बट्टे लेकर क्रान्ति करते हैं।

इनकी जगह बहुत छोटी है और संख्या बेहद नगण्य है। ये जिन मुद्दों की बात करते हैं उनसे इनका असल में कोई सरोकार ही नहीं होता है। इनकी आड़ में ये विशुद्ध राष्ट्रविरोधी मानसिकता का प्रदर्शन करते हैं।

देश एक बेहतरीन दशा व दिशा से गुजर रहा है और गुजरता रहेगा , कुछ की भौं-भौं भी जरूरी है ताकि मनोरंजन भी बना रहे।

#बागोंमेंबहारहोनाहोहमकोवतनसेप्यारहै

(लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं , एवं यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम स्‍वागत करता है। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया  unitedhindiweb@gmail.com पर भेज सकते हैं। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें। अगर आप भी भारत के लिए ब्‍लॉग लिखने के इच्छुक लेखक है तो भी आपका यूनाइटेड हिन्दी पर स्वागत है।)

 

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