ब्लॉग: खालिस्तानी आतंकवाद को सिख आतंकवाद कहने का पाप कम से कम मुझसे तो नहीं होगा।

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ब्लॉग: अभिजीत सिंह ( यूनाइटेड हिन्दी) – खालिस्तानी आतंकवाद को सिख आतंकवाद कहने का पाप कम से कम मुझसे तो नहीं होगा, एहसानफरामोश लोग चाहें तो कहें।

पंजाब के नाभा जेल से खालिस्तानी आतंकियों के फरार होने की खबर के बाद फिर से देश में खालिस्तान आन्दोलन चर्चा में है। आज एक मित्र ने मुझे इनबॉक्स कर कहा कि आप सिख आतंकवाद को क्या कहतें हैं और उस पर भी कभी कुछ लिखिए।

मुझे लगता है कि यह प्रश्न और भी कई लोगों के मन में होगा इसलिये इसका विस्तृत और सार्वजनिक जबाब देना ज्यादा समयानूकूल है। सिख समाज और पंजाब के ऊपर लिखी अपनी पोस्टों में मैं बहुत बार ये स्पष्ट कर चुका हूँ कि सारे भारतीयों को क्यों सिख समाज और सिखों का कृतज्ञ होना चाहिये, आज फिर से उन्हीं बातों का बस सार-संक्षेपण करूँगा क्योंकि जो प्रश्न उठाये गयें हैं उसका जबाब और है।

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ये बात किसे पता नहीं है भारत पर हुए विदेशी आक्रमणों को सबसे पहले हमारा पंजाब और हमारे सिख भाई झेलते थे और अपना बलिदान देकर उन्होंने हमेशा भारत भूमि की रक्षा की है। भारत के स्वाधीनता संग्राम में एक से बढ़कर एक बलिदान देने वाले हमारे सिख वीर थे। आबादी में कम होते हुए भी प्रतिशत के हिसाब से आज भी भारत की सेना में सबसे अधिक हमारे सिख भाई हैं और तो और भारत माता के लिये बलिदान होने वाले सिखों की सूची अंतहीन है। पंजाब के तो कई गाँव ऐसे हैं जहाँ लगभग पूरा गाँव ऐसा है जिसके घर से एक न एक आदमी फौज में हैं। कई सिख परिवारों में तो फौज में जाकर भारत माँ की सेवा करने की परंपरा पुश्तैनी है यानि परदादा, दादा, पिताजी, बेटा, पोता सब के सब फौज में रहे हैं। ये समाज कभी देश के सामने भिखारी रूप में नहीं आता, चाहे कृषि हो, व्यवसाय हो, सेना हो, खेल, कला-संस्कृति हो या फिर सेवा क्षेत्र इस समाज ने देश की सेवा हर क्षेत्र में की है और सरकार को टैक्स देने वालों में भी ये देश में अव्वल समुदाय हैं। खैर यह सब गिनाकर मैं निःस्वार्थ भाव से ये सब करने वाले सिख समाज के अहसानों को कम नहीं करना चाहता। यहाँ प्रश्न है कि कुछ चंद लोगों की आतंकी गतिविधियों के लिये क्या पूरे सिख समाज को हम आतंकवादी कह सकतें हैं या खालिस्तानी आतंकवाद को सिख आतंकवाद कह सकतें हैं?

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