ब्लॉग :- इन 85,000 करोड़ के 57 अरबपति कर्जदारों से सीखो मेरे किसानों भाइयों !!

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ब्लॉग- महावीर प्रसाद (यूनाइटेड हिन्दी) : जब से किसी ने बताया है कि पूरे भारत में सिर्फ 57 लोग ऐसे हुए हैं, जिन पर सरकारी बैंकों के 85,000 करोड़ रुपये उधार हैं।  तब से मैं ख़ुद को कोस रहा हूं! ये तो वो लोग हैं जिन्होंने 500 करोड़ रुपये से कम का लोन लेना अपनी आन-बान व शान के ख़िलाफ़ समझा है। मतलब कि अगर बैंक का कर्ज (लोन) लेकर चंपत ही होना है तो 500 करोड़ रुपये से कम लेकर क्या भागें! बैंक को तो कोई दिक्कत नहीं है। कोई तीसरा परेशान आत्मा है कि बैंक इनसे पैसे नहीं ले रहे हैं! वो जाकर केस कर दे रहा है। इन अरबपति क़र्ज़दारों की सामाजिक प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, वो भी बैंकों को बचाने के लिए! ऐसा अनर्थ हमने तो पहले कभी नहीं देखा। 
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इन्हीं जागरूक मुकदमेबाजों के कारण अदालत को पूछना पड़ रहा है कि कौन लोग हैं, जो 85,000 करोड़ रुपये लेकर भी नहीं दे रहे हैं! इनका नाम क्यों न पब्लिक को बता दें! क्यों बता दें? क्या पब्लिक पैसे वसूलेगी? ये भारतीय समाज है! लोग ऐसे क़र्ज़दारों के यहां रिश्ता जोड़ने पहुंच जाएंगे! इससे भी ज़्यादा ख़ुशी की बात ये है कि इन 57 लोगों में से सिर्फ एक ही विदेश भागा है! इनका नाम विजय माल्या है और सुप्रीम कोर्ट को भी नाम मालूम है! बाकी 56 यहीं भारत में ही हैं! उनको पता है कि जब भागने से भी बैंक वापस नहीं ले सकते, तो क्यों न भारत में ही रहे! यहां रहकर भी तो वे बैंकों को लौटाने नहीं जा रहे।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि हुजूर इनके नाम पब्लिक को न बतायें। सरकार ने रिज़र्व बैंक पर छोड़ दिया कि चलो यही बताओ, क्यों न बतायें? इतना बड़ा सवाल था कि रिज़र्व बैंक को सोचने का टाइम भी दिया गया। चुनाव होता तो जरूर कोई नेता कहता कि जनता के पैसे दो वरना जनता को नाम बता देंगे। बैंक को भले न पैसे मिलते, लेकिन नेताजी को चुनाव के लिए चंदे तो मिल ही जाते।

आगे पढ़िये : किसान भी इन लोगों को अपना आदर्श बना ले तो! 

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