अर्नब गोस्वामी का टाइम्स नाउ पर सर्जिकल स्ट्राइक कहीं कांग्रेस का हथकंडा तो नहीं?

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ब्लॉग : महावीर प्रसाद (यूनाइटेड हिन्दी) – अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से कल यह खबर छापी थी उसके बाद से ऐसी खबर सोशल मीडिया पर वायरल चल रही है। लेकिन टाइम्स नाउ या खुद अरनब की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया है।

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वैसे मैं खुद निजी तौर पर इंडियन एक्सप्रेस को ज्यादा महत्व नहीं देता क्योंकि उसका संपादक कांग्रेस के बौरहे प्रवक्ता संजय झा का भाई है और कांग्रेस पिछले काफी लम्बे समय से अर्नब गोस्वामी को निपटाने का हर हथकंडा अपना रही है। अरनब का नेशनलिस्ट का स्टैंड लेना बहुत से लोगो को आखर रहा, खासकर के रीसेंट पास्ट में, जिस तरह अर्नब गोस्वामी पॉलिटिक्स और एनजीओ को नंगा कर रहे है उससे बौखलाहट तो है ही, और सबको पता है अधिकांश मीडिया की फंडिंग और अतीत की राजनीतिक गठबंधन ने देश का बहुत नुक्सान पहुचाया है। दागी अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अर्नब गोस्वामी ने टाइम्स नाउ को अलविदा कह दिया है साथ ही बीबीसी या सीएनएन की तर्ज पर नया मीडिया चैनल लाने की योजना भी बनायी है। उम्मीद है की जल्द ही ये बात अर्नब गोस्वामी द्वारा सार्वजनिक होगी।

टाइम्स नाउ के सर्वाधिक देखे जाने वाले प्राइमटाइम न्यूज़ आवर से अर्नब गोस्वामी का इस तरह जाना लाखों दर्शकों एवं चैनल के लिए सदमे की तरह होगा ।

ये होगा तो टाइम्स नाऊ को भरपाई करना बेहद कठिन होगा
वैसे हो सकता है शायद अर्नब ने अपनी बड़ी सोच को साकार करने हेतु टाइम्स नाउ छोड़ने की तैयारी पहले से ही कर ली थी। अभी अर्नब का ये एक बड़ा साहसिक कदम होगा इससे पहले भी रजत शर्मा, राजदीप सरदेसाई जैसे आला दर्जे के पत्रकार भी अपने सफल न्यूज़ चैनल ला चुके है। बस फर्क यही है की रजत शर्मा आज समय की नजाकत को समझकर मजबूती से इंडिया टीवी को आगे ले जा रहे है और राजदीप अपनी लुटिया डुबोकर टीवी टुडे की शरण में जा बैठे हैं।

सायद अर्नब वर्तमान समय में उफान पर राष्ट्रवाद की ताजा नजाकत को भांपकर ही इस साहसिक फैसला लेने के लिए तैयार हुए होंगे क्योंकि राष्ट्रवाद के अनुकूल माहौल और साथ ही मोदी के मजबूत कंधो के सहारे उन्हें न्यूज़ चैनल की दुनिया में कुछ बड़ा करने का मौका अवश्य मिलेगा।

भले ही आज उनके समर्थक मायूस और विरोधी खुश हों लेकिन उनके इस साहसिक कदम की सराहना होनी चाहिए क्योंकि कई सौ में एक पत्रकार ही ऐसी हिम्मत जुटा सकता है।

वैसे कल शाम को टाइम्स नाऊ पर अर्नब  ने भोपाल में मारे गए आतंकियों के समर्थकों को पर अकाट्य तर्कों तथ्यों के साथ जिस तरह नंगा किया है वह देखने लायक था।  कल की बहस में अरनब ने अपने सवालों से उन प्रेस्टिट्यूट्स को भी बेनकाब करते हुए यह सन्देश दिया है कि… आतंकवादियों के समर्थकों के सवालों पर मुजरा करने के बजाय उनसे क्या और कैसे सवाल पूछने चाहिए?

साभार – महावीर प्रसाद खिलेरी (एक ग्रामीण कलमिया)

(लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं , एवं यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी यूनाइटेड हिन्दी डॉट कॉम स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया unitedhindiweb@gmail.com पर भेज सकते हैं। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें।)

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