बाप की सरकार : कीर्ति चक्र विजेता NSA अजित डोवाल के बेटे की ‘शौर्य’ गाथा का विडियो देखे

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नई दिल्ली :  माँ भारती के चरणों में  बैठ कर और वन्दे  मातरम की हुंकार लगाकर दिल्ली दरबार में किस तरह ‘दलाली’ को नई तरह से परिभाषित किया जा रहा है इसकी ताजा मिसाल है इंडिया फाउंडेशन। नीति निर्धारण और सेमिनार के नाम पर इंडिया फॉउंडेशन, विदेशी कंपनियों से लेकर देशी उद्योगपतियों को मोदी सरकार के मंत्री एवं सचिवों से मिलने का ऐसा मंच देता है जहाँ किसी भी डील को आसानी से अंजाम दिया जा सकता है। ये गज़ब का फॉउण्डेशन,  कीर्ति चक्र विजेता और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के बेटे शौर्य डोवाल चलाते हैं। इंडिया फॉउंडेशन में शौर्य के साझेदार हैं बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव। 

मोदी के कई मंत्री हैं शौर्य के फॉउंडेशन में डायरेक्टर 

मोदी सरकार के खिलाफ ताबड़तोड़ ख़बरें करके तेज़ी से पहचान बनाने वाली वेबसाइट ‘द वायर’ ने शुक्रवार को इंडिया फॉउंडेशन की फॉउंडेशन यानी नीव हिला कर रख दी है। वायर ने कोई स्टिंग नहीं किया है बल्कि इंडिया फॉउंडेशन के काम करने के तरीके और उसमे सहयोग दे रहे मोदी के मंत्रियों की सिर्फ लिस्ट छापी है। वायर ने बताया है कि मोदी के जेम्स बांड के नाम से मशहूर अजित डोवाल के बेटे शौर्य देश की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से लेकर मोदी के ख़ास मंत्री सुरेश प्रभु, जयंत सिन्हा और एमजे अकबर के ज़रिये कैसे इंडिया की फॉउंडेशन मज़बूत कर रहे हैं। ये सारे मंत्री शौर्य डोवाल के साथ इंडिया फॉउंडेशन के डायरेक्टर हैं। वायर की पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी का कहना है कि मोदी सरकार के ये सारे रसूखदार लोग जब दिल्ली में कोई भी सेमिनार का आयोजन करते हैं तो देश विदेश के प्रभावशाली लोग एक छत के नीचे एकत्र होते हैं और स्पोंसरशिप के नाम पर पैसों का अम्बार लग जाता है।

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शौर्य ने नहीं दिया विदेशी कंपनियों से मिलने वाली रकम ब्यौरा 

पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने जब शौर्य डोवाल से पूछा कि इंडिया फॉउंडेशन ने मोदी सरकार आने के बाद कितना पैसा कमाया और उस पैसे का सोर्स क्या है तो उन्हें गोल मोल जवाब मिला। शौर्य ने जवाब में कहा कि उन्हें वित्तीय मदद विज्ञापन, सेमिनार और पत्रिका प्रकाशित करने से मिलती है। कमाल की बात है कि शौर्य डोवाल ने पिछले ही साल अपनी निजी कम्पनी ‘जियस कैप्स’ को एक अंतराष्ट्रीय कम्पनी जैमिनी फाइनेंसियल सर्विसेज का रूप दिया है। जैमिनी में शौर्य के साझेदार सऊदी अरब के प्रिंस मिशाल बिन अब्दुल्लाह बिन टर्की हैं। शौर्य दिन भर अपनी वित्तीय कम्पनी जैमिनी के बड़े बड़े क्लाइंट को देते हैं और बाकी बचा समय इंडिया फॉउंडेशन को उपलब्ध कराते हैं। शौर्य के रसूख का आलम ये है कि भारत में ऑपरेट करने वाली बड़ी बड़ी मल्टी नेशनल कंपनियां उनके चक्कर काट ती  हैं।

मिसाल के तौर पर हवाई जहाज बनाने वाली कम्पनी बोईंग ने शौर्य द्वारा आयोजित एक सीमा सुरक्षा सेमिनार में बड़ी स्पॉन्सरशिप दी। इसी बोईंग कम्पनी पर सीबीआई, भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर जांच कर रही है। इजराइल की कम्पनी मगल और विदेशी बैंक डीबीएस ने भी इंडिया फॉउंडेशन को दिल खोल के धनराशि दान की है। चौंकाने वाली बात ये है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बेटे शौर्य, ज्यादातर सेमिनार, देश की सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, ओशन और जलसंसाधन विषयों पर करते आये हैं। ये विषय संवेदनशील है और ऐसे सेमिनारों से देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के परिवार को दूर रहना चाहिए।

द वायर का कहना कि शौर्य के इंडिया फॉउंडेशन में जिस तरह से देश के कई वर्तमान कैबिनेट मंत्री डायरेक्टर हैं और वे खुद राष्ट्रीय सुरक्षा के बेटे हैं, ऐसी स्थिति में विदेशी कंपनियों के साथ नीतिगत विषयों पर सेमिनार करना उनसे स्पॉन्सरशिप लेना कनफ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट हैं। लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय से ले कर किसी भी मंत्री ने इस सवाल पर वायर को कोई भी जवाब नहीं दिया।

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